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Sunday, February 8, 2026
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    रोगियों की जान बचाते खुद हो रहे संक्रमित

    Getting infected by saving the lives of patients themselves

    हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। कोरोना की दूसरी लहर के कहर के बीच टाउन स्थित राजकीय जिला चिकित्सालय में बनाए गए कोविड वार्डां में भर्ती कोविड-19 रोगियों की जान बचाने में जुटा स्टाफ भी संक्रमित हो रहा है। इससे भी अस्पताल स्टाफ को काम करने में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रोगियों के इलाज में जुटे चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन यहां तक की बाबू व सुरक्षाकर्मी भी कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। हालांकि सीएमएचओ कार्यालय की ओर से अतिरिक्त स्टाफ कोरोना वार्ड में लगाया जा रहा है। लेकिन फिर भी अन्य दिक्कतों के साथ कोरोना वॉर्डों में स्टाफ की कमी भी निरंतर बनी हुई है।

    पीएमओ डॉ. दीपक मित्र सैनी ने बताया कि जिला अस्पताल में कोरोना के पांच वार्ड चल रहे हैं। इस समय जिला अस्पताल में जो सबसे बड़ी समस्या सामने आ रही है कि वह यह है कि इन पांच कोरोना वॉर्डों में जो स्टाफ लगाया गया है उनमें काफी लोग पॉजिटिव हो रहे हैं। 5-6 चिकित्सकों के अलावा 15 नर्सिंग स्टाफ, 3 गार्ड, ऑफिस के 2 बाबू, लैब टेक्नीशियन पॉजिटिव हो रहे हैं। इससे काम करने में कुछ दिक्कतें आ रही हैं। क्योंकि जो भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है और वह गंभीर रूप से बीमार नहीं, उसे पूरी तरह से स्वस्थ होने में 10 से 15 दिन लग जाते हैं। फिर वह काम पर लौट आता है।

    इससे स्टाफ की कमी भी निरंतर बनी हुई है। निरंतर काम की अधिकता के कारण स्टाफ को भी मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है। इन सब चीजों को लेकर रोजाना जिला अस्पताल में सुबह मीटिंग होती है। स्टाफ की समस्या को सुना जाता है। समस्या का निस्तारण करने का प्रयास किया जाता है। पीएमओ ने बताया कि जिला चिकित्सालय में कुल 149 कोरोना रोगी भर्ती हैं। इनमें से 103 ऑक्सीजन पर हैं। 7 रोगी वेंटीलेंटर पर हैं। उन्होंने बताया कि लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई श्रीगंगानगर आ गई है। तीन गाडिय़ां श्रीगंगानगर भेजी गई हैं। जैसे-जैसे नंबर आता जाएगा वैसे-वैसे जिला अस्पताल को ऑक्सीजन उपलब्ध होती रहेगी।

    पीएमओ ने बताया कि जिला अस्पताल में दिन में कई बार लगातार राउंड चलता रहता है। कई रोगियों का आॅक्सीजन लेवल सही होने पर ऑक्सीजन हटाई भी जाती है। उस रोगी को नॉर्मल बेड पर रखा जाता है। रिकवर होने पर रोगियों को डिस्चार्ज भी किया जा रहा है। नया रोगी भी भर्ती किया जाता है। बेड की उपलब्धता अस्पताल में मरीज के आने पर ही पता लग पाती है। वेटिंग वाले रोगियों को कुछ देर के लिए ट्रोमा सेंटर में रखकर आॅक्सीजन दी जाती है। फिर बेड की उपलब्धता होने पर उन रोगियों को बेड पर रखा जाता है।

    उपकरण मिलें तो बढ़े बेड संख्या : पीएमओ डॉ. सैनी ने बताया कि जिला अस्पताल में बेड संख्या बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। अस्पताल भवन की ऊपरी मंजिल के कुछ वार्डों में गैस पाइप लाइन तो बिछी हुई है। लेकिन प्लांट से निर्बाध ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए कुछ अतिरिक्त उपकरण लगवाने की जरूरत है।

    इसके लिए दिल्ली, बठिंडा व श्रीगंगानगर की कंपनी से वार्ता चल रही है। उनके पास कुछ सामान उपलब्ध नहीं है। क्योंकि ऑक्सीजन की डिमांड एकदम बढ़ गई है। लेकिन जिला अस्पताल का निरंतर प्रयास है कि वह उपकरण जल्द से जल्द उपलब्ध करवाए जाएं। उसके आने के बाद ही कुछ बेडों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी। उन्होंने जनता से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें, हम निरंतर प्रयासरत हैं।

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