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Sunday, February 8, 2026
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    संजीवनी है प्रभु-परमात्मा का नाम

    Gods name is Sanjeevani
    सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का नाम सुखों की खान है। इस घोर कलियुग में मरती हुई इन्सानियत के लिए प्रभु का नाम संजीवनी है। प्रभु का नाम आत्मा की सच्ची खुराक है और इसी आत्मबल से ही दुनिया के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि आत्मबल प्राप्त करने के लिए अगर कोई गॉड गिफ्टिड है, तो काफी हद तक उनके अंदर आत्मविश्वास होता है, परंतु इतना नहीं होता है कि वह आदमी मालिक के दर्शन कर सके। इसलिए अगर किसी के अंदर आत्मविश्वास कम है तो आत्मविश्वास को हासिल करने के लिए आत्मिक चिंतन करना, प्रभु का नाम लेना अति जरूरी है। आत्मिक चिंतन से आत्मबल बढ़ता है और आत्मबल बढ़ने से आदमी दुनिया के हर क्षेत्र में तरक्की हासिल करता है।
    आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को मालिक के सुमिरन के द्वारा अपने अंदर के आत्मविश्वास को जागृत करना चाहिए। कई बार काम-धन्धा करते हुए आदमी का जी घबरा जाता है, टेंशन, परेशानी आ जाती है और मन इतना हावी हो जाता है कि मन कहता है-चल छोड़ यार, इन काम-धन्धों से कोई फायदा नहीं है। तो यह मन की गिरावट, आत्मविश्वास की कमजोरी के कारण ऐसा होता है। इन्सान का मन बड़ा ही शातिर है। यह ऐसी-ऐसी चालें चलता है कि आदमी से बुराई भी करवा लेता है और पता भी नहीं चलते देता। मन कहता है यह तो आजकल फैशन है। यह तो आज के जमाने की जरूरत है। परन्तु इन्सान को मन की नहीं सुननी चाहिए। यह मन जालिम लारे लगाकर आदमी को नर्कों में ले जाने का काम करता है। इसलिए अपने मन को कंट्रोल करना चाहिए और मन को कंट्रोल करने के लिए राम-नाम के अलावा अन्य कोई दवाई नहीं है।
    पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि दुनिया में अलग-अलग बीमारियों के ईलाज के लिए अलग-अलग दवाइयां बनी हैं, परन्तु ऐसी कोई दवाई नहीं बनी है जो आदमी के गम, चिंता, टेंशन, परेशानी को खत्म कर सके। आदमी के अंदर के बुरे विचारों को कंट्रोल कर सके। इसका कोई जिक्र ऐलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेदा, नेच्यूरोपैथी आदि चिकित्सा पद्धतियों में नजर नहीं आता। ऐसी दवाई सिर्फ हमारे धर्मों में है, जिससे अंदर की चिंता, परेशानियों को खत्म किया जा सकता है और उस दवाई का नाम प्रभु का नाम है। इसे नाम-शब्द, कलमां, मैथड आॅफ मेडिटेशन कहा जाता है। मालिक के नाम का जाप करने से आदमी के अंदर आत्मविश्वास आता है और आत्मविश्वास से आत्मिक शक्ति आती है और उस आत्मिक शक्ति के द्वारा आप अपने अंदर के गम, चिंता, परेशानियों को खत्म कर सकते हैं और मालिक की दया-मेहर, रहमत के काबिल बन सकते हैं।
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