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Thursday, March 19, 2026
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    Haryana News: खुशखबरी, हरियाणा में अब इन जातियों को भी मिलेगा आरक्षण, हुआ बड़ा ऐलान

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    Haryana News: खुशखबरी, हरियाणा में अब इन जातियों को भी मिलेगा आरक्षण, हुआ बड़ा ऐलान

    Haryana News: चंडीगढ़। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए मंगलवार को कहा कि हरियाणा में विपक्ष के नेता भूपेन्द्र सिंह हुड्डा पिछड़े वर्ग की बात तभी शुरू करते हैं जब चुनाव नजदीक आता है। शाह ने कांग्रेस पर हमेशा ओबीसी समुदाय के खिलाफत करने का आरोप लगाया। शाह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ओबीसी आरक्षण के लिए 1957 में काका साहेब आयोग का गठन किया गया था, लेकिन कांग्रेस ने इसे वर्षों तक लागू नहीं किया। 1980 में, इंदिरा गांधी ने मंडल आयोग को ताक पर रख दिया और जब इसे 1990 में पेश किया गया तो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने 2 घंटे और 43 मिनट के भाषण में ओबीसी आरक्षण का विरोध किया। इसके विपरीत भाजपा ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक मान्यता देकर पिछड़े वर्गों को संवैधानिक अधिकार प्रदान किए हैं। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने पहली बार केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, सैनिक स्कूलों और नीट परीक्षाओं में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण शुरू किया है।

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    ओबीसी के लिए तीन बड़ी घोषणाएं | Haryana News

    केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रैली के मंच से ओबीसी के लिए तीन बड़ी घोषणाएं कर दी हैं। हरियाणा में ओबीसी आरक्षण में लगाई गई क्रीमीलेयर की सीमा छह लाख से आठ लाख करने की घोषणा की। इसमें तनख्वाह और कृषि आय भी नहीं गिनी जाएगी। पंचायतों में ओबीसी ग्रुप ए में आठ प्रतिशत आरक्षण था। अब ओबीसी ग्रुप-बी के लिए पंचायतों और नगर परिषद में भी पांच-पांच प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। सीएम नायब सिंह सैनी ने इन तीनों घोषणाओं से संबंधित नॉटिफिकेशन की कॉपी भी हाथोंहाथ मंच पर ही मुहैया करवा दी। बीसी ए का आठ प्रतिशत आरक्षण बना रहेगा।

    पिछड़ा वर्ग बी की जातियां

    पिछड़ा वर्ग बी में अहीर-यादव, गुर्जर, लोध-लोधा-लोधी, सैनी-शाक्य-कुश्वाहा-मौर्या-कोइरी, मेव, गोसाई- गोस्वामी-गोसैन और बिश्नोई शामिल हैं। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले अहीरवाल में इसी वर्ग का वर्चस्व है। रैली स्थल महेंद्रगढ़ चुने जाने के पीछे का मकसद भी यहीं था, ताकि भाजपा अपने पुराने गढ़ का किला न केवल बचाए रखने में कामयाब हो सके,बल्कि आने वाले चुनावों में भी सरकार बनाने में यह वर्ग भाजपा की शक्ति के रूप में उभरे।

    पिछड़ा वर्ग-ए की जातियां

    पिछड़ा वर्ग ए में पाल, गडरिया, बघेल, गढ़ी लोहार, हज्जाम, नाई, सेन, जांगड़ा-ब्राह्मण, खाती, सुथार, धीमान-ब्राह्मण, तरखान, अहेरिया, अहेरी, हेरी, नाइक, थोरी, तुरी, हरी, बारा, हेंसी, हेसी, बगरिया, बरवाड़, बढ़ई, तंबोली, बरागी, बैरागी, स्वामी साध, बत्तेरा, भरभुंजा, भरभुजा, भट, भातरा, दरपी, रमिया, भुहलिया, लोहार, चंगार, चिरिमार, चांग, चिंबा, छिपी, चिंपा, दरजी, रोहिल्ला, दईया शामिल हैं। इनके अलावा धोबी, गोवाला, बरहाई, बद्दी, जोगीनाथ, जोगी, नाथ, योगी, कंजर या कंचन, कुर्मी, कुम्हार, प्रजापति, कंबोज, खंघेरा, कुछबंद, लबाना, लखेड़ा, मनिहार, कचेरा, लोहार, पांचाल-ब्राह्मण, मदारी, मोची, मिरासी, नर, नूंगार, नलबंद, पिंजा, पेनजा, रेहर, रेहरा या रे, रायगड़, राय सिख भी इसी वर्ग में शामिल हैं। इनके अतिरिक्त रीचबंद, शोरगीर, शेरगिरो, सोई, सिंघिकांत, सिंगीवाला, सुनार, जरगर, सोनिक, ठठेरा, तमेरा, तेली, बंजारा, जुलाहा, रहबरी, चरण, चारज (महाब्राह्मण), रंगरेज, लिलगर, नीलगर, लल्लारिक, भर, राजभरी, नेट (मुस्लिम), जंगम, डकौत, धिमार, मल्लाह, कश्यप- राजपूत, कहार, झिवार, धिनवार, खेवत, मेहरा, निषाद, सक्का, भिस्ती, शेख-अब्बासी, धोसाली, दोसाली, फकीर, ग्वारिया, गौरिया या ग्वार, घिरथ, घासी, घसियारा या घोसी, गोरखास, गवाला भी पिछड़ा वर्ग ए में शामिल हैं।

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