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Wednesday, February 11, 2026
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    Farmers News: सरकार-प्रशासन की अनदेखी, सीआरएम के लाभ से वंचित किसान

    Hanumangarh News
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    ”जिला मुख्यालय नहीं पहुंच रही पीड़ा लेकिन दिल्ली पहुंच रहा धुआं”

    हनुमानगढ़। पराली प्रबंधन के लिए केन्द्र सरकार की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) Yojana के तहत किसानों को संसाधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इसका लाभ पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र का किसान ले रहा है। लेकिन राजस्थान के किसान इस योजना के लाभ से वंचित हैं। किसानों ने इसके पीछे प्रदेश सरकार व स्थानीय प्रशासन को जिम्मेवार ठहराया है। प्रगतिशील किसान भगवान सिंह खुड़ी का कहना है कि चाहे भाजपा की सरकार हो या कांग्रेस की, लेकिन किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। लेकिन धान की कटाई के बाद पराली जलाने पर किसान पर दण्ड अवश्य लगा दिया जाता है। Hanumangarh News

    किसान भी नहीं चाहता कि वह पराली जलाए और जमीन की उपजाऊ क्षमता कम हो। उसे मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ता है। केन्द्र सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए योजना शुरू की है लेकिन उसका लाभ किसानों को दिलवाने के लिए सरकार और प्रशासन पीछे हट रहा है। खुड़ी ने बताया कि धान की कटाई के बाद पशुचारा एकत्रित करने के बाद उसी हालत में उस जमीन पर गेहूं की बिजाई हो सकती है और हो भी रही है। यह संभव है लेकिन सरकारें व प्रशासन जो किसान हित की बात तो जरूर करते हैं लेकिन किसान हित से उनका कोई लेना-देना नहीं। दण्ड की कार्रवाई हाथोंहाथ कर दी जाती है।

    जिला मुख्यालय किसानों के खेतों से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है वहां तक किसानों की पीड़ा नहीं पहुंचती लेकिन दिल्ली जो हनुमानगढ़ से करीब तीन सौ किलोमीटर दूर है वहां पराली जलाने से निकलने वाला धुआं जरूर पहुंच जाता है। खुड़ी के अनुसार वे 2018 से फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) के लिए प्रयास किया जा रहा है लेकिन सरकार व प्रशासन की अनदेखी के कारण आज तक कुछ नहीं हुआ। खुड़ी ने बताया कि उनके खेत में करीब 35 बीघा में पीआर धान की बिजाई की गई थी। सात सौ क्विंटल की पैदावार हुई। धान की एमएसपी पर खरीद नहीं होने से उसका 3 लाख 27 हजार रुपए का नुकसान हो गया।

    उन्होंने 1900 रुपए प्रति क्विंटल के अनुसार धान बेचा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से पराली जलाने पर किसान को दण्डित करने की बजाए फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना के तहत केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से मिलकर दिए जाने वाले 80 प्रतिशत अनुदान का लाभ किसान को दिलवाकर पराली का प्रबंधन करवाया जा सकता है। इससे पर्यावरण भी शुद्ध होगा और किसान की आय भी बढ़ेगी। पराली जमीन में जाएगी तो जमीन की उपजाऊ क्षमता में भी बढ़ोतरी होगी। किसान और अन्न के बगैर जीवन संभव नहीं है। Hanumangarh News