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    सावधानी के बिना बासमती धान की पत्ता कटाई पड़ सकती है अन्नदाता को महंगी

    Basmati Dhan
    कुरुक्षेत्र। कटाई किया गया बासमती धान का पत्ता।

    कृषि विशेषज्ञ बोले: बासमती रोपाई से 52 से 60 दिन तक ही करें पत्ता कटाई

    कुरुक्षेत्र (सच कहूँ, देवीलाल बारना)। सावधान, यदि आप अंधाधुंध बासमती धान (Basmati Dhan) की पत्ता कटाई कर रहे हैं तो यह आपको महंगी पड़ सकती है। इससे किसानों को बासमती धान की फसल में मोटा घाटा उठाना पड़ सकता है। जी हां, आजकल बासमती धान की पत्ता कटाई का सीजन चल रहा है। लेकिन ज्यादातर किसान ऐसे हैं जिनको पत्ता कटाई के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं होता, जिससे किसानों को फसल कटाई के समय नुकसान का सामना करना पड़ता है।

    इस बारे में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को विशेष रूप से सलाह दी है कि बासमती धान की पत्ता कटाई के समय कुछ आवश्यक बातों का ध्यान रखना जरूरी है। कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व वैज्ञानिक डा. जयनारायण भाटिया ने दैनिक सच कहूँ से विशेष बातचीत में बताया कि बासमती धान की पत्ता कटाई का उपर्युक्त समय धान रोपाई के बाद 52 से 60 दिन तक का होता है। जो किसान 60 दिन के बाद भी पत्ता कटाई का कार्य करते हैं, उन फसलों के झाड़ में नुकसान होना तय है। डॉ. भाटिया ने बताया कि धान के सिर्फ पत्ते की ही कटाई करें। पत्ते से नीचे नाली की कटाई करने से भी झाड़ कम होता है।

    बासमती धान में डालें मात्र 50 किलोग्राम यूरिया | Basmati Dhan

    डॉ. जयनारायण भाटिया ने विशेष बातचीत में बताया कि बासमती की एचबीसी-19 व 301 देशी किस्मों में 50 किलोग्राम यूरिया, 75 किलोग्राम फासफोरस व 10 किलोग्राम जिंक की आवश्यकता होती है। इसके अलावा सीएसआर 30 किस्मों में 80 किलोग्राम तक यूरिया, 75 किलोग्राम फासफोरस व 10 किलोग्राम जिंक की आवश्यकता होती है। वहीं जिन खेतों में मूंग व ढ़ांचा उगाया गया हो, उन खेतों में यूरिया डालने की कोई आवश्यकता नहीं होती। बासमती धान में ज्यादा यूरिया डालने के कारण ही पत्ता ज्यादा बढ़ता है, जिस कारण पत्ता कटाई की नौबत आती है।

    Dr. Bhatia

    फसल में बीमारी हो तो करें छिड़काव

    डॉ. भाटिया ने बताया कि आजकल के मौसम में धान में जीवाणु पत्ता अंगमारी, पर्ण छज्ज अंगमारी व ब्लास्ट (जुलस रोग) आमतौर पर आ जाते हैं। पत्ता कटाई कर आमतौर पर काटे गए पत्ते को खेत के बीच में ही छोड़ देते हैं, यदि फसल में ये बीमारी आई हैं तो पत्ता खेत के बीच में न गिराकर खेत से बाहर करें। खेत में ही पत्ता गिराने से यह बीमारी पूरे खेत में फैल जाती है। वहीं दरांती से पत्ता काटते वक्त भी ये बीमारियां खेत में फैल जाती हैं। इसलिए पत्ता कटाई के बाद 200 ग्राम ब्लाईटोक्स व 12 ग्राम स्ट्रेटो साईक्लीन प्रति एकड़ के हिसाब से 150 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें।

    काली करने के चक्कर में न फंसे किसान

    कृषि विशेषज्ञ ने किसानों को सलाह दी है कि कुछ किसान बासमती धान को काली करने के चक्कर में अंधाधुंध खाद डालते रहते हैं, जोकि नुकसानदायक है। बासमती धान जितनी काली होगी, धान में कटाई के समय उतना ही फूंस बनेगा। इसलिए बासमती का रंग हल्का पीला रहना जरूरी है। Basmati Dhan

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