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    टाइटल गीत लिखने में माहिर थे हसरत जयपुरी

    Hasrat Jaipuri

     जन्मदिवस 15 अप्रैल 

    मुम्बईl हिन्दी फिल्मों में जब भी टाइटल गीतों का जिक्र होता है। गीतकार हसरत जयपुर का नाम सबसे पहले लिया जाता है । वैसे तो हसरत जयपुरी ने हर तरह के गीत लिखे लेकिन फिल्मों के टाइटल पर गीत लिखने में उन्हें महारत हासिल थी । हिन्दी फिल्मों के स्वर्ण युग के दौरान टाइटल गीत लिखना बड़ी बात समझी जाती थी । निर्माताओं को जब भी टाइटल गीत की जरूरत होती थी तब हसरत जयपुरी से गीत लिखवाने की गुजारिश की जाती थी। उनके लिखे टाइटल गीतों ने कई फिल्मों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी।

    कुछ टाइटल गीत

    हसरत जयपुरी के लिखे कुछ टाइटल गीत हैं.. दीवाना मुझको लोग कहें..दीवाना.. दिल एक मंदिर है..दिल एक मंदिर.. रात और दिन दीया जले.. रात और दिन.. तेरे घर के सामने इक घर बनाऊंगा.. तेरे घर के सामने.. ऐन इवनिंग इन पेरिस.. ऐन इवनिंग इन पेरिस.. गुमनाम है कोई बदनाम है कोई.. गुमनाम.. दो जासूस करें महसूस.. दो जासूस..आदि । 15 अप्रैल 1922 को जन्मे हसरत जयपुरी मूल नाम इकबाल हुसैन ने जयपुर में प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने के बाद अपने दादा फिदा हुसैन से उर्दू और फारसी की तालीम हासिल की । बीस वर्ष का होने तक उनका झुकाव शेरो-शायरी की तरफ होने लगा और वह छोटी-छोटी कविताएं लिखने लगे ।

    वर्ष 1940 में नौकरी की तलाश में हसरत जयपुरी ने मुम्बई का रूख किया और आजीविका चलाने के लिए वहां बस कंडक्टर के रूप में नौकरी करने लगे। इस काम के लिये उन्हे मात्र 11 रुपये प्रति माह वेतन मिला करता था। इस बीच उन्होंने मुशायरों के कार्यक्रम में भाग लेना शुरू किया। उसी दौरान एक कार्यक्रम में पृथ्वीराज कपूर उनके गीत को सुनकर काफी प्रभावित हुये और उन्होने अपने पुत्र राजकपूर को हसरत जयपुरी से मिलने की सलाह दी। राजकपूर उन दिनों अपनी फिल्म ..बरसात ..के लिये गीतकार की तलाश कर रहे थे।

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