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    झारखंड सीएम सोरेन की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश, सोरेन के दफ्तर में हलचल तेज

    Hemant Soren
    Hemant Soren, Take, Oath, Chief Minister

    निर्वाचन आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सदस्यता मामले में अपना मंतव्य राजभवन भेजा

    रांची (एजेंसी)। भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खनन पट्टा मामले में अपना मंतव्य राजभवन को भेज दिया है। भाजपा के गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे की ओर से आज दावा किया गया है कि चुनाव आयोग का पत्र राजभवन पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द होगी या उन्हें क्लीनचिट मिल जाएगा, इसका खुलासा अब जल्द ही होने की संभावना है। मुख्यमंत्री सोरेन द्वारा रांची के अनगड़ा में पत्थर खनन लीज लिये जाने मामले में भाजपा नेताओं ने फरवरी महीने में राज्यपाल रमेश बैस से मुलाकात कर शिकायत की थी। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल से मांग की थी कि मुख्यमंत्री सोरेन को भारत के संविधान के अनुच्देद 191 (ई) के साथ-साथ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9 (ए) के तहत पत्थर खनन का पट्टा प्राप्त करने के लिए अयोग्य किया जाना चाहिए। बीजेपी नेताओं की इस शिकायत के बाद राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत चुनाव आयोग से परामर्श मांगा था।

    क्या है मामला:

    राज्यपाल के परामर्श मांगने के बाद चुनाव आयोग की ओर से मुख्य सचिव से भी रिपोर्ट मांगी गयी। मुख्य सचिव की ओर से खनन लीज के मामले में अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंप दी गयी, जिसके बाद आयोग की ओर से मुख्यमंत्री सोरेन को नोटिस जारी कर पूछा गया कि क्यों नहीं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएं। इस संबंध में मुख्यमंत्री सोरेन की ओर से अपना पक्ष अधिवक्ता के माध्यम से चुनाव आयोग में रखने का काम किया गया। सोरेन के वकील ने आयोग के समक्ष दलीलें रखे जाने के दौरान कहा कि मामला लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9ए के तहत नहीं आता है, जो सरकारी अनुबंधों के लिए अयोग्यता से संबंधित है। निर्वाचन आयोग ने 18 अगस्त को इस मामले में सुनवाई पूरी कर ली है। अब आयोग अपनी राय से सीलबंद लिफाफे में झारखंड के राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट भेज दी है। संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या किसी राज्य के विधानमंडल के सदन का कोई सदस्य किसी अयोग्यता के अधीन हो गया है, तो इस मामले राज्यपाल को भेजा जाएगा, जिनका निर्णय अंतिम होगा। इसके अनुसार इस तरह के किसी भी प्रश्न पर कोई निर्णय देने से पहले राज्यपाल निर्वाचन आयोग से राय प्राप्त करेंगे और उसकी राय के अनुसार करेंगे।अब चुनाव आयोग की ओर से राजभवन को रिपोर्ट भेज दी है, जल्द ही सारी स्थिति स्पष्ट हो जाने की संभावना है।

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