हमसे जुड़े

Follow us

11.7 C
Chandigarh
Saturday, February 7, 2026
More
    Home विचार संपादकीय : वि...

    संपादकीय : विरासत को कबाड़ न समझा जाए

    Heritage
    हमें इस मानसिकता से बाहर निकलने की आवश्यकता है कि अगर किसी हवाई जहाज की आयु सीमा पूरी होने पर उसे बाहर कर दिया गया है तो उसके आगे बैल जोड़कर बोझा ढोहने के काम में ले लिया जाए। जैसे कि पुरानी वस्तुएं, फर्नीचर, मुद्राएं, भवन आदि सहेजे जाते हैं। (Heritage )  ठीक ऐसे ही युद्धक साजो-सामान भी सहेजा जाना संभव है। भले ही वह कोेई जंगी समुद्री बेड़ा ही क्यों न हो? ताजा मामला जंगी बेड़े आईएनएस विराट को कबाड़ में बेचने का है। सुप्रीम कोर्ट ने एक पिटीशन की सुनवाई करते हुए समुद्री बेड़े को तोड़ने पर रोक लगा दी है। वास्तविकता में एक संग्रहालय में किसी देश की सभ्यता, विरासत व इतिहास की झलक होती है।
    सभी जहाजों व बेड़ों को न तो संभाल कर रखा जा सकता है और न ही इसकी आवश्यकता होती है लेकिन किसी वर्ग की प्रतिनिधिता करती एक वस्तु को हमेशा संभाल कर जाना चाहिए। जहां तक जंगी बेड़ों का संबंध है, पुराने बेड़ों को केवल देखने के साथ ही उनसे विद्यार्थी बहुत कुछ सीख लेते हैं। यूं भी यह राष्टÑ की शान व तरक्की की कहानी बयान करते हैं। आईएनएस विराट भारत ने ब्रिटेन से 1986 में खरीदा था व करीब 7 साल यह समुन्द्र में सेवाएं देता रहा है। यह हमारे जवानों की वीरता का सुबूत है। जो नई पीढ़ियों को न सिर्फ विरासत के साथ जोड़ता है बल्कि उनमें साहस का भी संचार करता है। पुरानी ईमारतों को बचाने के लिए पुरातत्व विभाग अरबों रूपये खर्च करता है फिर तकनीक व रक्षा के क्षेत्र जैसे मामलों में विरासत के प्रति लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
    ऐसी ही मांग बठिंडा के ताप बिजली प्लांट को लेकर उठ रही है कि पुराने थर्मल प्लांट को तोड़ने की बजाय इसे ईमारत के तौर पर संभाला जाए। पुराने थर्मल प्लांट में नए वैज्ञानिकों के लिए जानकारी के साथ-साथ पर्यटन उद्योग को भी प्रफु ल्लित कर सकते हैं। कबाड़ से मिलने वाली रकम से कहीं अधिक कमाई पर्यटन उद्योग से हो सकती है।
    ताज महल को देखने वालों से सरकार को प्रतिदिन लाखों रूपयों की कमाई होती है। इतिहास व विरासत को संभालने की प्रेरणा हमें दुनिया से भी सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने युद्ध में गोली लगी दीवारों, देशों को बांटने वाली दीवारों, हिटलर के अत्याचारों में काम में लिए गए गैस चैम्बर्स, हथियारों व अपनी ताकत रही इतिहासिक धरोहरों को संभाला हुआ है व उन्हें भी संग्रहालय का रूप दे दिया है। यह सच्चाई है कि जिन राष्टÑों को उनका इतिहास याद नहीं होता वह कभी भी आगे नहीं बढ़ सकते। इसलिए इतिहास को संभालने के लिए हमें अपना पुराना नजरिया बदलना होगा। इतिहास के साथ संबंधित वस्तुओं को कबाड़ समझने की जगह इसकी चमक को देखने की आवश्यकता है जो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य रौशन कर सकती हैं।’

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।