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    तंबाकू से तौबा करते युवा

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    सुखद है कि देश में वर्ष 2016-17 के दौरान तंबाकू का सेवन करने वालों की संख्या में तकरीबन 81 लाख की कमी आयी है और इनमें किशोर और युवाओं की संख्या सर्वाधिक है।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ‘ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वेक्षण द्वितीय’ की रिपोर्ट से उद्घाटित हुआ है कि 2009-10 के दौरान तंबाकू सेवन के मामले जहां 34.6 प्रतिशत थे, वहीं 2016-17 में यह 6 प्रतिशत घटकर 28.6 प्रतिशत पर आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान 15 से 24 वर्ष के युवाओं में तंबाकू सेवन में औसतन 33 प्रतिशत, 15 से 17 वर्ष के वर्ग में 54 प्रतिशत और 18 से 24 वर्ष के वर्ग में 28 प्रतिशत की कमी आयी है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से तैयार इस रिपोर्ट के अनुसार देश में 42.4 प्रतिशत पुरुष और 14.2 प्रतिशत महिलाएं, यानी कुल 28.6 प्रतिशत व्यस्क तंबाकू सेवन करते हैं। तंबाकू की खपत के मामले में 6 पूर्वोत्तर राज्य-मिजोरम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा और असम सबसे आगे हैं।

    इनमें मिजोरम पहले स्थान पर जहां 15 से 49 वर्ष उम्र के बीच के 80.4 प्रतिशत पुरुष और 59 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मिजोरम के बाद मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा और असम का स्थान है। रिपोर्ट से यह भी उद्घाटित हुआ है कि पिछले 12 महीनों में तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों में से 55 प्रतिशत ने इसे छोड़ने की कोशिश की है।

    दरअसल तंबाकू सेवन से गहराती बीमारी और जनजागरुकता के कार्यक्रम ने युवाओं को तंबाकू से दूर किया है। तंबाकू सेवन से कैंसर, फेफड़ों की बीमारियां और हृदय संबंधी कई रोगों की संभावना बढ़ती है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन के टुबैको-फ्री इनिशिएटिव के प्रोग्रामर डा. एनेट की मानें, तो अगर लोगों को इस बुरी लत से दूर नहीं रखा गया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    ‘ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वेक्षण द्वितीय’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सबसे ज्यादा सेवन खैनी और बीड़ी जैसे उत्पादों का होता है। इसमें 11 व्यस्क खैनी का और 8 प्रतिशत व्यस्क बीड़ी का सेवन करते हैं। कार्यालयों और घरों के अंदर काम करने वाले हर 10 में से 3 व्यक्ति पैसिव स्मोकिंग का शिकार होते हैं। जबकि सार्वजनिक स्थानों पर इसके प्रभाव में आने वाले लोगों की संख्या 23 प्रतिशत है।

    गत वर्ष ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में फ्रेमवर्क कन्वेंशन आॅन टोबैको कंट्रोल (एफसीटीसी) कॉप-7 (कॉन्फ्रेंस आॅफ पार्टीज-7) सम्मेलन में भारत की ओर से विभिन्न संस्थानों के सहयोग से चबाने वाले तंबाकू की वजह से होने वाले कैंसर, हृदय रोग और मुंह की बीमारियों के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 15 साल और उससे अधिक उम्र की सात करोड़ महिलाएं भी चबाने वाले तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रही हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि तंबाकू के सेवन से प्रतिवर्ष 60 लाख लोगों की मौत होती है और तरह-तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू का सेवन मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह और बीमारियों को उत्पन करने के मामले में चौथी बड़ी वजह है। दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों में 30 फीसदी लोगों की मौत तंबाकू उत्पादों के सेवन से होती है।

    स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट को मानें तो वर्ष 2011 में केवल तंबाकूजनित बीमारियों के इलाज के नाम पर देश के सकल घरेलू उत्पाद का 1.16 फीसदी यानी एक लाख 5 हजार करोड़ रुपए खर्च करना पड़ा। यह धनराशि केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में 2011-12 में जितना खर्च किया गया उससे तकरीबन 12 फीसद अधिक है।

    अच्छी बात है कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत देश में तंबाकू उत्पादों के सेवन में 2020 तक 15 प्रतिशत और 2025 तक 30 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब ठोस उपाए अपनाए जाएंगे।

    -अरविंद जयतिलक

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