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    Same Sex Marriage Update: समलैंगिकता एक विकार, सर्वोच्च न्यायालय ने किया साफ!

    Homosexuality
    समलैंगिकता एक विकार, सर्वोच्च न्यायालय ने किया साफ!

    Same Sex Marriage Update: माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कर दिया कि न्यायालय में कानून नहीं बनाया जा सकता। विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव का अधिकार केवल संसद के पास है। केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह की मान्यता का विरोध करते हुए कहा कि भारतीय समाज में इस प्रकार के संबंध को स्वीकार नहीं किया जा सकता। विवाह एक सामाजिक मान्यता है, जिसका हल अदालत में नहीं किया जा सकता। Homosexuality

    राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग व संत समिति ने भी सर्वोच्च न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका दायर कर कहा कि समलैंगिक विवाह की अवधारणा पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव है। भारत की महान संस्कृति में किसी भी प्रकार से स्वीकार्य नहीं। भारत की संस्कृति में परिवार की व्यवस्था, जो समाज के सुख व खुशहाली का आधार है, जिसे किसी भी तरह से विकृत नहीं किया जा सकता। बेशक दुनिया के 33 देश ऐसे हैं, जिनमें समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता है लेकिन 71 ऐसे भी देश हैं जिनमें समलैंगिकता एक अपराध की श्रेणी में आता है, जिसके तहत कठोर दंड का प्रावधान है। धर्मों के अनुसार भी समलैंगिकता एक बुराई है, विकार है।

    समलैंगिकता एक विकृत मानसिकता का परिणाम है, जिसका वैज्ञानिक व मनोवैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाना चाहिए। पुरूष का पुरूष के साथ, स्त्री का स्त्री के साथ प्रेम प्यार से रहना कोई बुराई नहीं बल्कि यह तो सभ्य समाज का अंग है लेकिन पुरूष का पुरूष के साथ या स्त्री का स्त्री के साथ वैवाहिक संबंध या लैंगिक संबंध न तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सही है और न ही धार्मिंक व प्राकृतिक दृष्टि से। Homosexuality

    प्रकृति ने (भगवान ने) सृष्टि की रचना के साथ इसके विकास के लिए नर और मादा बनाए। नर और मादा केवल मनुष्य जाति में ही नहीं बल्कि हर जीव-जन्तु में बनाए और इस तरह वंश वृद्धि की एक व्यवस्था कायम की। प्रकृति द्वारा स्थापित व्यवस्था में दखल देने पर अवश्य गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जिस प्रकार किसी समाज की व्यवस्था में दखल देना, किसी राष्ट्र की व्यवस्था में दखल देना उस समाज व राष्ट्र को स्वीकार्य नहीं होता तो प्रकृति की व्यवस्था में दखल देना प्रकृति को स्वीकार्य कैसे हो सकता है। प्रकृति की व्यवस्था में दखल का मतलब है प्रकृति का कोप भाजन बनना। अत: समलैंगिकता को एक मनोविकार की तरह लेना चाहिए और इलाज करवाना चाहिए। Homosexuality

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