कैसे कमाए किसान बागवानी से अच्छा मुनाफा

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उकलाना (सच कहूँ /कुलदीप स्वतंत्र)। पूरे भारत वर्ष की जीडीपी लगभग कृषि पर निर्भर करती है। आजकल किसान कृषि के लिए नई-नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। हरियाणा में जहां गन्ने की पैदावार घटी है। वहीं किसान धान की खेती को ज्यादा तवज्जो देने लगे हैं। कपास की खेती भी अब तक ठीक-ठाक है। बाजरा, तिलहन की खेती किसान अब नहीं करना चाहते क्योंकि ऐसी फसलों के अनुकूल मिटटी अब नहीं रही। लगातर भूमिगत जल स्तर काफी नीचे जा चुका है। रही बात मूंग, अरहर, उड़द की ये फसलें अब केवल रेतीले क्षेत्रों में ही की जाने लगी है क्योंकि वहां खाद व दवाइयों का कम प्रयोग होता है।

दूसरा वहाँ खेती केवल बरसात पर ही निर्भर करती है। सरकार अब सदाबहार फसलों की जगह बागवानी को बढ़ावा देने लगी है। इसके लिए सरकार अनुदान भी प्रदान करती है। उकलाना खंड के गांव सुरेवाला निवासी किसान दरवेश पातड़ ने सितम्बर 2019 में नरमा की फसल खराब होने पर बागवानी करने का लिया फैसला लिया, जो उनके लिए कारगर साबित हुआ। आज दरवेश पातड़ नई तकनीक द्वारा बागवानी खेती कर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। बागवानी कृषि की नई तकनीक के विषय में सच कहूँ के संवाददाता ने दरवेश पातड़ से खास-बातचीत की। तो आईए जानते हैं दरवेश पातड़ की खेती की नई तकनीक के विषय में –

किसान दरवेश पातड़ अनेक फलदार पौधों की कर रहे हैं बागवानी

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कृषि एक ओर जहां घाटे का सौदा बनती जा रही है व बढ़ती हुई महंगाई के कारण किसान अपने खर्चे भी पूरे नहीं कर पा रहे हैं वही उकलाना खंड के गांव सुरेवाला के युवा पढ़े-लिखे किसान दरवेश पातड़ ने आधुनिकता का फायदा उठाते हुए कृषि को एक नया स्वरूप दिया है। सुरेवाला निवासी दरवेश ने नई तकनीक द्वारा अपने खेत में किन्नू, अमरुद, आलू, बुखारा उगाया हुआ है और इसके लिए वे सिंचाई की नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। सच कहूँ से खास बातचीत में उन्होंने बताया की आजकल परम्परागत खेती में हो रहे घाटे को देखते हुए वे आज बागवानी में अनेक फलदार पौधे लगाकर नई तकनीक द्वारा खेती को बढ़ावा देते हुए अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं।

हरियाणा सरकार माइक्रो इरिगेशन को दे रही है, बढ़ावा

कृषि में अच्छी उपज लेने के लिए पानी की एक अह्म भूमिका होती है परंतु पिछले काफी सालों से बरसात में हो रही कमी से भूमिगत जल स्तर में लगातार गिरावट के कारण ज्यादातर किसान खारे पानी को कृषि में सिंचाई के लिए प्रयोग करते हैं, जिससे उनकी भूमि उपजाऊ क्षमता में कमी होती है। परन्तु दरवेश पातड़ ड्रिप प्रणाली के माध्यम से पानी व खाद की बचत करते हैं और उन्होंने अपने खेत में सिंचाई के लिए तालाब बनवा रखा है, जिसमें आवश्यकतानुसार पानी स्टोर किया जा सकता है फसलों को पानी दिया जा सकता है। हरियाणा सरकार भी माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा दे रही है और लगभग 85% तक सब्सिडी किसानों को दे रही है।

गोबर गैस प्लांट व 7.5 एचपी का लगवा रखा है, सोलर पंप

दरवेश पातड़ ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में गोबर गैस प्लांट लगवा रखा है, जिससे खेत के लिए वे उच्च क्वालिटी का आॅर्गेनिक खाद तैयार करते हैं व इससे बनने वाली गैस से खाना बनाते हैं और इंजन भी चलाते हैं इससे डीजल की बचत भी होती है। साथ ही साथ उन्होंने खेत में 7.5 एचपी का सोलर पंप लगवा रखा है, जिससे उनको बिजली भी प्राप्त होती है।

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इनके खरबूज व तरबूज है, उकलाना में मशहूर

किसान दरवेश 10 एकड़ में खेती करते हैं, जिसमें बागवानी में किन्नू, अमरूद, आलू बुखारा लगा रखा है। इनसे वे समय अनुसार सब्जियों की अच्छी पैदावार लेते हैं। उनके द्वारा उगाया गया खरबूजा वह तरबूज पूरे उकलाना में मशहूर है। वहीं उन्होंने 1 एकड़ में नेट हाउस लगा रखा है, जिसमें खीरे की फसल से काफी अच्छी आमदनी किसान को हो रही है। सर्दियों में लो टनल पर सब्जियां उगाई जाती है, जिससे बाजार में भाव बहुत अच्छे मिलते हैं।

ऑनलाइन बेचेगा अपनी फल व सब्जियां

किसान दरवेश का सपना है कि आने वाले दिनों में अपने सभी फल-सब्जियां व अन्य प्रोडक्ट को ऑनलाइन बेचेगा। जिससे उनकी आमदनी काफी बढ़ेगी व किसान को अच्छे प्राइस मिल पाएंगे। इसके लिए उन्होंने इसकी एक रूपरेखा भी तैयार कर ली है । हरियाणा सरकार की तरफ से किसान को नेट हाउस, पैक हाउस, ड्रिप सिस्टम, तालाब पर सब्सिडी भी मिली है, जिससे किसान को काफी अच्छी आर्थिक मदद भी मिली है।

बागवानी करके कमा सकते है अच्छा मुनाफा

डॉ. विनीता राजपूत ने बताया कि बागवानी करके अपनी आय दोगुनी करने के साथ-साथ एक स्वस्थ जीवन शैली की ओर अग्रसर हो रहे हैं। बागवानी विभाग की योजनाओं से प्रेरित होकर किसान पारम्परिक कृषि से बागवानी फसलों की खेती की तरफ रुख कर रहे है और लाखों कमा रहे हैं। विभाग का उद्देश्य यही है की अधिक से अधिक किसानों को योजनाओं का लाभ पहुँचाना है, जिससे किसान अपनी आय दोगुनी करने के साथ- साथ एक स्वस्थ जीवन शैली की ओर अग्रसर हों। अमरूद, बेर, व नीम्बू वर्गीय फलों के नए बाग की स्थापना व 2 साल तक रख-रखाव के लिए 40-50% अनुदान विभाग की तरफ से दिया जा रहा है।

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सरकार किसानों को मुहैया करा रही अनुदान राशि

सरकार ने सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए हाइब्रिड सब्जी, मल्चिंग, प्लास्टिक लो टनल व बांस की खेती पर भी 50% अनुदान का प्रावधान है। टपका सिंचाई व मिनी स्प्रिंकलर पर 85% अनुदान के साथ एकल व सामुदायिक तालाब बनवाने हेतु 70-100 % अनुदान दिया जा रहा है। भूमि रहित किसान भी मशरूम की खेती और मधुमक्खी पालन करके विभाग की योजनाओं का लाभ उठा सकते है। सब्जियों एवं फलों के ग्रेडिंग, पैकिंग व भंडारण हेतु पैकहाउस और प्याज भंडारण घर पर 50 % अनुदान राशि उपलब्ध करायी जा रही है।

वहीं मेरा पानी मेरा विरासत के तहत धान की जगह बागवानी फसल का चुनाव करने वाले किसानों को 8000 रुपये अतिरिक्त अनुदान राशि बागवानी विभाग की तरफ से दी जा रही है। इसके अतिरिक्त बागवानी उपकरणो, नर्सरी स्थापना, कोल्ड स्टोरेज, घुलनशील खाद आदि पर भी किसानों को अनुदान दिया जा रहा है। विभाग की सभी अनुदान सम्बंधित योजनाओं को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा गया है। किसान घर बैठे ही अनुदान हेतु आवेदन कर सकते हैं।

 

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