हमसे जुड़े

Follow us

20.6 C
Chandigarh
Tuesday, March 31, 2026
More
    Home देश कैसे युसूफ खा...

    कैसे युसूफ खान से बने बॉलीवुड स्टार दिलीप कुमार

    Dilip Kumar Career

    दिलीप कुमार ने अभिनय सम्राट के तौर पर बनाई पहचान

    मुंबई (सच कहूँ डेस्क)। बॉलीवुड में दिलीप कुमार का नाम एक ऐसे अभिनेता के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने अपने दमदार अभिनय और जबरदस्त संवाद अदायगी से सिने प्रेमियों के दिल पर अपनी अमिट पहचान बनायी। 11 दिसंबर 1922 को पेशावर अब पाकिस्तान में जन्में युसूफ खान उर्फ दिलीप कुमार अपनी माता-पिता की 13 संतानों में तीसरी संतान थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पुणे और देवलाली से हासिल की।

    इसके बाद वह अपने पिता गुलाम सरवर खान कि फल के व्यापार में हाथ बंटाने लगे। कुछ दिनों के बाद फल के व्यापार में मन नहीं लगने के कारण दिलीप कुमार ने यह काम छोड़ दिया और पुणे में कैंटीन चलाने लगे। वर्ष 1943 में उनकी मुलाकात बांबे टॉकीज की व्यवस्थापिका देविका रानी से हुयी, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचान मुंबई आने का न्यौता दिया। पहले तो दिलीप कुमार ने इस बात को हल्के से लिया लेकिन बाद में कैंटीन व्यापार में भी मन उचट जाने से उन्होंने देविका रानी से मिलने का निश्चय किया।

    युसूफ खान को वासुदेव, जहांगीर और दिलीप कुमार में से एक नाम चुनना था

    देविका रानी ने युसूफ खान को सुझाव दिया कि यदि वह अपना फिल्मी नाम बदल दे तो वह उन्हें अपनी नई फिल्म ज्वार भाटा बतौर अभिनेता काम दे सकती है। देविका रानी ने युसूफ खान को वासुदेव, जहांगीर और दिलीप कुमार में से एक नाम को चुनने को कहा। वर्ष 1944 में प्रदर्शित फिल्म ज्वार भाटा से बतौर अभिनेता दिलीप कुमार ने अपने सिने करियर की शुरूआत की।

    1948 में प्रदर्शित फिल्म मेला से मिली सफलता

    फिल्म ज्वार भाटा की असफलता के बाद दिलीप कुमार ने प्रतिमा (जुगनू ) अनोखा प्यार, नौका डूबी जैसी कुछ बी और सी ग्रेड वाली फिल्मों में बतौर अभिनेता काम किया लेकिन इन फिल्मों से उन्हें कोई खास फायदा नहीं पहुंचा। चार वर्ष तक मायानगरी मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1948 में प्रदर्शित फिल्म मेला की सफलता के बाद दिलीप कुमार बतौर अभिनेता फिल्म इंडस्ट्री में अपनी बनाने में सफल हो गए।

    जब अमिताभ बच्चन दिलीप कुमार की आंखों में देख नहीं पाते थे

    वर्ष 1982 में प्रदर्शित फिल्म शक्ति हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की बेहतरीन क्लासिक फिल्मों में शुमार की जाती है। इस फिल्म में दिलीप कुमार और अमिताभ बच्चन ने पहली बार एक साथ काम कर दर्शको को रोमांचित कर दिया। अमिताभ बच्चन के सामने किसी भी कलाकार को सहज ढ़ंग से काम करने में दिक्कत हो सकती थी लेकिन फिल्म शक्ति में दिलीप कुमार के साथ काम करने में अमिताभ बच्च्न को भी कई दिक्कत का सामना करना पड़ा।

    फिल्म शक्ति के एक दृश्य को याद करते हुए अमिताभ बच्चन ने बताया था कि फिल्म के क्लाइमेक्स में जब दिलीप कुमार उनका पीछा करते रहते है तो उन्हें पीछे मुड़कर देखना होता है, जब वह ऐसा करते है तो वह दिलीप कुमार की आंखों में देख नहीं पाते है और इस दृश्य के कई रिटेक होते है। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बतौर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता सर्वाधिक फिल्म फेयर पुरस्कार प्राप्त करने का कीर्तिमान दिलीप कुमार के नाम दर्ज है। दिलीप कुमार को अपने सिने कैरियर में आठ बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

    दिलीप कुमार ने करीब 60 फिल्मों में ही अभिनय किया

    फिल्म जगत में दिलीप कुमार के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हे वर्ष 1994 मे फिल्म इंडस्ट्री के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्केअवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावे पाकिस्तान सरकार ने उन्हें वहां के सर्वोच्च सम्मान निशान.ए.इम्तियाज से सम्मानित किया। वर्ष 1980 में दिलीप कुमार मुंबई में शेरिफ के पद पर नियुक्त हुए। फिल्म इंडस्ट्री में दिलीप कुमार उन गिने चुने चंद अभिनेता में शामिल रहे जो फिल्म की संख्या से अधिक उसकी गुणवत्ता पर यकीन रखते थे, इसलिए उन्होंने अपने छह दशक लंबे सिने करियर में करीब 60 फिल्मों में ही अभिनय किया।

     

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramlink din , YouTube  पर फॉलो करें।