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    एक सप्ताह में चार रैक लगने से खाद की किल्लत में हुआ सुधार

    Hanumangarh
    • जल्द ही जिले को आवंटित होंगे चार और रैक
    • एक लाख मैट्रिक टन डिमांड, 70 हजार मैट्रिक टन हुई उपलब्ध

    हनुमानगढ़। पिछले एक सप्ताह में खाद के चार रैक लगने के बाद हनुमानगढ़ जिले में यूरिया की किल्लत काफी हद तक दूर हुई है। इस कारण यूरिया के लिए किसानों में पैदा हुई मारामारी की स्थिति में सुधार हुआ है। जल्द ही जिले को खाद के चार रैक और आवंटित होने की बात कृषि अधिकारी कह रहे हैं। इसके बाद जिले में डिमांड अनुसार खाद की आपूर्ति होने की उम्मीद है। कृषि अधिकारियों की मानें तो जिले को करीब एक लाख मैट्रिक टन खाद की आवश्यकता है। इसमें से 70 हजार मैट्रिक टन खाद उपलब्ध हो चुकी है। कृषि उपनिदेशक दानाराम गोदारा ने बताया कि वर्तमान समय में यूरिया की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। पिछले एक सप्ताह में ही चम्बल, आईपीएल, कृभको व इफको के चार रैक सरकार की ओर से हनुमानगढ़ जिले को दिए गए। इस यूरिया की आपूर्ति भी की जा चुकी है। आने वाले दिनों में यूरिया के चार रैक और मिलेंगे। जिले में अनुमानित एक लाख मैट्रिक टन यूरिया की डिमांड है।

    अब तक 70 हजार मैट्रिक टन यूरिया पहुंच चुकी है। मार्च तक यूरिया की आपूर्ति की जानी है। जनवरी माह में डिमांड को पूरा करने के लिए उच्चाधिकारियों से निवेदन किया गया है। जनवरी माह में अधिकतर डिमांड यूरिया की रहेगी। उसके बाद यूरिया की डिमांड कम हो जाएगी। आश्वासन मिला है कि अब जिले में यूरिया की किल्लत नहीं होगी। शीघ्र ही जिले को चार रैक और आवंटित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों में यूरिया का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने का ट्रेंड बढ़ रहा है। किसानों से आग्रह है कि जितनी जरूरत है उसी अनुसार यूरिया काम में लें। इन दिनों में जब तापमान कम होता है और धुंध होती है।

    अगले दिनों में मावठ होती है तो विशेष तौर पर नाली बैल्ट में गेहूं में पीलेपन की शिकायत रहती है। जब गेहूं में पीलापन आता है तो किसानों के दिमाग में यह बात आती है कि वह यूरिया का छिड़काव कर पानी लगाए। लेकिन इस सीजन में गेहूं की फसल में जरूरत से ज्यादा यूरिया का पानी देना अधिक फायदेमंद नहीं है। इसके लिए किसानों के पास आसान तरीका है कि वे 100 लीटर पानी में दो किलोग्राम यूरिया और 100 ग्राम जिंक सल्फेट मिलाकर छिड़काव करें। इससे गेहूं के पीलेपन की समस्या खत्म हो जाएगी और निश्चित रूप से उत्पादन भी बढ़ेगा।

    तापमान गिरने पर सरसों को नुकसान की आशंका

    कृषि उपनिदेशक दानाराम गोदारा ने बताया कि वर्तमान समय में सरकार की ओर से मौसम को लेकर कुछ चेतावनी जारी की गई है। हनुमानगढ़ जिले में यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि तापमान काफी नीचे जाएगा। यदि आने वाले दिनों में तापमान और नीचे जाता है तो गेहूं, चना व जौ जैसी फसलों में तो नुकसान की संभावना कम है लेकिन सरसों फसल में वर्तमान समय में फलियां बन रही हैं।

    इसमें नुकसान होने की आशंका है। ऐसे में किसानों को सलाह है कि वे सौ लीटर पानी में एक एमएल गंधक डालकर छिड़काव करें। इसका करीब एक सप्ताह तक रिजल्ट रहता है। इसके अलावा जिन किसानों के पास पानी की सुविधा उपलब्ध है और सरसों में पानी देना बाकी है। वे किसान सरसों में पानी लगा दें। जिन किसानों ने सब्जियां लगा रखी हैं वे उत्तर-पश्चिम दिशा में धुआं करें। इससे इस मौसम से सब्जियों की बचत हो सकती है। इस सीजन में किसान अपने खेत को समय-समय पर संभालते रहें। जरूरत अनुसार ही खाद आदि का इस्तेमाल करें।

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