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    वाहनों के बढ़ते काफिले ने बिगाड़ी यातायात व्यवस्था

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    बठिंडा में हर वर्ष हो रही वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि

    बठिंडा(अशोक वर्मा)। बठिंडा में हर वर्ष वाहनों की संख्या में हो रहे बेतहाशा वृद्धि के कारण मुख्य सड़कों पर पैदल चलना मुश्किल होने लगा है महानगर की कई सड़कें तो ऐसीं हैं जहां पलक झपकते ही जाम लग जाता है, जिला हैडक्वाटर व राजनैतिक सरगर्मियों का गढ़ होने के कारण रोजमर्रा की ही जिले भर में से लोगों का आना-जाना लगा रहता है। ट्रांसपोर्ट विभाग के आंकड़ों पर नजर मारें तो बठिंडा जिले में 15 लाख के करीब गाड़ियां हैं यह संख्या दुपहिया वाहनों से ले कर कारों आदि का है। बड़ी गाड़ियां इस से अलग हैं।

    कई घर तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने घरों में तीन से चार वाहन भी रखे हुए हैं। प्राप्त जानकारी मुताबिक वर्ष 2007 में बठिंडा जिले में 5लाख 60 हजार गाड़ियां थी जो कि पांच वर्ष बाद बढ़कर सवा 11 लाख भाव दुगुना हो गई। इस हिसाब से जिले की सड़कों पर हर वर्ष 1 लाख नए वाहन उतर रहे हैं। जिला ट्रांसपोर्ट कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि शहर की आबादी के लिहाज से वाहनों की औसत संख्या तो चण्डीगढ़ के नजदीक तक पहुंचने लगी है। यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि गाड़ियां बढ़ी परन्तु प्रबंध नहीं बढ़ाए, जिसका खामियाजा आम आदमी को हादसों व भीड़ में फंसने के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

    बठिंडा जिले में 15 लाख के करीब गाड़ियां

    दिन-प्र्रतिदिन गाड़ियों में हो रहे वृद्धि के कारण यातायात व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। हालात यह हैं कि माल रोड,धोबी बाजार,कीकर बाजार,बैंक बाजार और अमरीक सिंह रोड आदि क्षेत्रों में तो सड़क के एक तरफ से दूसरी तरफ गुजरना कठिन हो रहा है हालांकि इस दिशा में चिंताप्रस्त हुए पुलिस प्रशासन ने ट्रैफिक पुलिस की संख्या बढ़ाई है। फिर भी ट्रैफिक को सुचारू में चलाना टेढ़ी खीर बना हुआ है ट्रैकिफ पुलिस के कर्मचारियों का कहना है कि शहर की सड़कों पर गाड़ियों में हो रहे हैरानीजनक वृद्धि के बावजूद सड़कों की चौड़ाई पहले की तरह ही है उन्होंने बताया कि यातायात कंट्रोल करने के लिए लाईटें भी लगीं हुई हैं परंतु कुछ प्वार्इंटों पर पुलिस की तैनाती न होने ने भी समस्या में विस्तार किया है

    बठिंडा में तेल डीपू होने के कारण रोजमर्रा की सैंकड़ों गाड़ियां शहर में से गुजरतीं हैं, जिससे भी अक्सर ही यातायात प्रभावित होता रहता है देखने में आया है कि शहर में से गुजरते राष्ट्रीय सड़क मार्ग, माल रोड और मुलतानियां रोड पर तो जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। मामले का सुखदाई पहलू यही है कि माल रोड पर सरकारी एलिमेंट्री स्कूल (लड़कियों) वाली जगह पर आरजी पार्किंग बनी हुई है, जहां काफी लोग अपनी, कारें, मोटरसाईकल व ऐक्टिवा आदि खड़ी कर देते हैं, जिससे नजदीक के बाजारों में वाहनों की भीड़ बहुत ही कम होती है।

    रिंग रोड फेज वन कारण भी बढ़ी समस्या

    नगर सुधार ट्रस्ट ने साल 2000 में शहर में से यातायात के बोझ को कम करने के लिए रिंग रोड फेज वन प्रोजैक्ट बनाया था। वर्ष 2001 में केंद्र से स्वीकृति मिलने पर नींव पत्थर रखा गया उसके बाद में रिंग रोड के लिए जमीन एक्वायर की गई। रिंग रोड 3.69 किलोमीटर लम्बी है और यह दिल्ली फाटक तक बननी है रिंग रोड का बड़ा हिस्सा बन चुका है और करीब एक किलोमीटर टुकड़े का मुसीबत है। ट्रस्ट द्वारा रिंग रोड सहित अन्य कार्याें के लिए एक्वायर की संपत्ति के मालिक अदालत में चले गए जहां यह मामला विचाराधीन है।

    टैफिक कर्मचारियों में विस्तार करने की योजना: एसएसपी

    सीनियर पुलिस कप्तान बठिंडा डॉ. नानक सिंह ने कहा कि यातायात को सुचारू रूप में चालू रखने के लिए स्टाफ बढ़ाया जा रहा है इससे ही आम लोगों को नियमों की पालना प्रति उत्साहित करने के लिए चेतना मुहिम शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस के बावजूद यदि कोई व्यक्ति कानून भंग करता है तो उसके खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाएगी

    प्रशासन निभाए अपनी जिम्मेदारी : बहल

    ज्वाईंट एक्शन समिति के कनवीनर एमएम बहल ने कहा कि यदि पुलिस अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाए तो सड़कों पर लगते जाम कम किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों को भी यातायात के नियमों की पालना करनी होगी। बहल ने मांग की कि प्रशासन लंबे समय की रणनीति तैयार कर उसे सख्ती के साथ लागू करे तो भी मसले का हल निकल सकता है।

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