AI Impact Summit: नई दिल्ली। हाल में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में एक रोबोटिक प्रदर्शनी को लेकर उपजा विवाद चर्चा का विषय अवश्य बना, किंतु यह व्यापक और सफल आयोजन की केवल एक झलक भर था। समिट ने यह स्पष्ट किया कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तीव्र गति से अग्रसर है और वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। India News
इससे पहले गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई (Google CEO Sundar Pichai) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से बुधवार को मुलाकात करके भारत में एआई के विकास पर चर्चा की। इस बैठक के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के साइडलाइन में सुंदर पिचाई से मुलाकात करना बेहद सुखद अनुभव रहा। हमने एआई क्षेत्र में भारत द्वारा किए जा रहे कार्यों और इस क्षेत्र में हमारे प्रतिभाशाली छात्रों और पेशेवरों के साथ गूगल किस प्रकार सहयोग कर सकता है, इस बारे में चर्चा की।”
इस मंच पर स्वदेशी फाउंडेशनल मॉडल, स्वायत्त ड्रोन, डेटा सुरक्षा आधारित प्रणालियाँ तथा ग्रामीण भारत के लिए तैयार किए गए एआई समाधान जैसे अनेक नवाचार प्रस्तुत किए गए। देश के विभिन्न राज्यों से आए तकनीकी उद्यमियों और शोधकर्ताओं ने भविष्य की डिजिटल संरचना की दिशा में अपने प्रयास प्रदर्शित किए।
समिट का प्रमुख आकर्षण ‘भारतजेन एआई’ पहल रही, जिसका उद्देश्य देश की 22 आधिकारिक भाषाओं में सक्षम फाउंडेशनल मॉडल विकसित करना है। इससे भाषा संबंधी अवरोध कम होंगे और एआई तकनीक आम नागरिकों तक अधिक सहजता से पहुँच सकेगी। India News
‘सॉवरेन एआई बॉक्स’ नामक स्वदेशी समाधान भी विशेष चर्चा में रहा
‘सॉवरेन एआई बॉक्स’ नामक स्वदेशी समाधान भी विशेष चर्चा में रहा। इसे डेटा गोपनीयता को सुदृढ़ करने और राष्ट्रीय एआई मिशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। वर्तमान डिजिटल युग में डेटा संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुका है, ऐसे में यह पहल आत्मनिर्भर तकनीकी ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कई नवोन्मेषी स्टार्टअप्स ने भी समिट में उल्लेखनीय योगदान दिया। एक ड्रोन-आधारित लॉजिस्टिक कंपनी ने लाखों स्वचालित डिलीवरी पूरी कर कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी का दावा किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि एआई केवल कार्यक्षमता बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक बन रहा है। AI Impact Summit
ग्रामीण क्षेत्र के लिए विकसित ‘एआई ट्रेनर मशीन’ जैसी पहल ने तकनीकी शिक्षा को जनसामान्य तक पहुँचाने की दिशा में नई संभावनाएँ प्रस्तुत कीं। इसी प्रकार, एक सामाजिक उद्यम ने एआई आधारित उपकरणों के माध्यम से ग्रामीण महिला उद्यमियों को बेहतर व्यापारिक निर्णय लेने में सहायता देने का मॉडल प्रदर्शित किया।
युवा नवाचारियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। छात्र-प्रेरित स्टार्टअप्स ने स्वायत्त नेविगेशन और रोबोटिक्स के क्षेत्र में नए प्रयोग प्रस्तुत कर यह संकेत दिया कि देश की युवा प्रतिभा तकनीकी सीमाओं को विस्तार देने के लिए तैयार है। बिहार सहित अनेक राज्यों के पवेलियन में स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु एआई आधारित परियोजनाएँ प्रदर्शित की गईं। इससे यह संकेत मिलता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल महानगरों तक सीमित न रहकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी परिवर्तन का माध्यम बन रही है। India News















