भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता अमेरिकी कृषि क्षेत्र को लाभ पहुंचाने वाला: टिकैत
- भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौतों से कृषि संबंधी प्रावधान हटाए जाए: भाकियू
- हालिया भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता अमेरिकी कृषि क्षेत्र को लाभ पहुंचाने वाला: सुधाकर सिंह
नई दिल्ली (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। New Delhi: राजधानी स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में बीज विधेयक, विद्युत (संशोधन) विधेयक और भारत-अमेरिका व भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर व्यापक जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए और इन्हें किसान विरोधी बताया। सभा को बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह, भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत, बिहार प्रदेश प्रभारी दिनेश कुमार, हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष रतन मान सिंह सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हालिया भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता अमेरिकी कृषि क्षेत्र को लाभ पहुंचाने वाला है, जबकि भारतीय किसानों को सीमित टैरिफ रियायत मिली है।उन्होंने कहा कि 2 जनवरी को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा सोशल मीडिया पर अंतरिम समझौते की घोषणा की गई थी, जिसे 6 फरवरी के संयुक्त बयान में मान्यता दी गई। समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी कृषि एवं खाद्य उत्पादों,जैसे डीडीजी (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स), सोयाबीन तेल, पशु चारा, मेवे, प्रसंस्कृत फल, शराब एवं अन्य उत्पादों के लिए बाजार खोल दिया है। किसान नेताओं का दावा है कि इससे मक्का, ज्वार, सोयाबीन जैसी फसलों के घरेलू दामों पर दबाव पड़ेगा। विशेष रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और राजस्थान के सोयाबीन उत्पादक किसानों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
जेनेटिकली इंजीनियर (GE) उत्पादों पर भाकियू ने जताई चिंता
संयुक्त बयान में गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने की सहमति का उल्लेख करते हुए भाकियू ने आशंका जताई कि इससे जेनेटिकली इंजीनियर (GE) कृषि उत्पादों के आयात का रास्ता खुल सकता है। संगठन ने बायोसेफ्टी प्रोटोकॉल और स्वास्थ्य प्रभावों के दीर्घकालिक अध्ययन की कमी पर चिंता व्यक्त की।
भारत-यूरोपीय संघ एफटीए:“समान अवसर नहीं”
27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिए जाने का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यूरोपीय संघ को भारतीय बाजार में व्यापक पहुंच मिलेगी, जबकि भारतीय कृषि निर्यात को यूरोपीय संघ के कठोर स्वास्थ्य एवं गुणवत्ता मानकों के कारण वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा।
बीज संप्रभुता पर संकट की आशंका | New Delhi
भाकियू ने पौधों की किस्मों पर बौद्धिक संपदा संरक्षण (UPOV 1991) के संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई। नेताओं का कहना है कि यदि भारत ने UPOV 1991 जैसे प्रावधानों को स्वीकार किया, तो इससे किसानों के पारंपरिक बीज बचाने और साझा करने के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
ड्राफ्ट सीड बिल 2025:“कॉरपोरेट नियंत्रण को बढ़ावा”
भाकियू ने ड्राफ्ट सीड बिल 2025 का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह बीज कीमतों में वृद्धि और कॉरपोरेट नियंत्रण को मजबूत करेगा। संगठन के अनुसार, यह विधेयक राज्यों की शक्तियों के केंद्रीकरण और किसानों को खराब बीज से हुए नुकसान पर पर्याप्त मुआवजे की व्यवस्था नहीं करता।
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 पर सवाल
संगठन ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 को उद्योग समर्थक बताते हुए कहा कि इसमें मूल्य नियंत्रण, स्पष्ट देयता तंत्र और राज्यों को प्रभावी प्रतिबंध लगाने की पर्याप्त शक्तियां नहीं दी गई हैं। भाकियू ने मांग की कि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा जाए।
विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025: “निजीकरण का खतरा”
भाकियू ने विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 के मसौदे को किसानों के लिए घातक बताया। नेताओं का कहना है कि इससे बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और राज्यों की भूमिका सीमित होगी।उन्होंने चेतावनी दी कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर जैसी व्यवस्थाएं छोटे और सीमांत किसानों के लिए अतिरिक्त बोझ बनेंगी। सिंचाई के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने से फसल नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।
भाकियू की केंद्र सरकार से ये है प्रमुख मांगें
कार्यक्रम के अंत में भाकियू ने केंद्र सरकार से मांग की कि भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौतों से कृषि संबंधी प्रावधान हटाए जाएं।
ड्राफ्ट सीड बिल 2025 और विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 को वापस लिया जाए।कीटनाशक प्रबंधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा जाए। New Delhi
किसानों की नीतिगत संप्रभुता और बीज अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो देशभर में व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के अनुसार इसी क्रम में भाकियू 12 फरवरी-26 को देशभर में जिला मुख्यालयों पर और किसान अपने – अपने खतों पर भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते का विरोध करेंगे।
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