India News: नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुआ नवीन व्यापार समझौता देश की बाह्य आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक प्रमुख ब्रोकिंग संस्था की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता भारत के चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने, रुपये की स्थिरता बनाए रखने तथा वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव से उत्पन्न जोखिमों को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकता है। अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले प्रतिदानात्मक शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) को पूर्व निर्धारित 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है। India-US Trade Deal
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि यह समझौता मध्यम अवधि में भारत की आर्थिक वृद्धि और बाह्य स्थिरता को प्रोत्साहित करेगा। शुल्क में स्पष्टता और स्थिरता से निर्यात को गति मिलेगी, विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बल मिलेगा। विशेष रूप से वस्त्र उद्योग, रसायन क्षेत्र, औषधि निर्माण, वाहन पुर्जे, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएँ और कुछ औद्योगिक क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। India-US Trade Deal
बढ़ते निर्यात आदेशों, उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग
विश्लेषण के अनुसार, बढ़ते निर्यात आदेशों, उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग और आय में स्थिरता से संबंधित स्पष्टता के कारण इन क्षेत्रों की कंपनियों में दीर्घकालिक विकास की संभावना प्रबल होगी। भारत-अमेरिका व्यापार संबंध अब सहयोगात्मक चरण में प्रवेश कर रहे हैं। पूर्व में ये संबंध शुल्क विवादों और नियामकीय चुनौतियों से प्रभावित रहे थे, किंतु वर्तमान में दोनों देश आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ बनाने, चीन पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने की दिशा में अग्रसर हैं।
यह समझौता भारत की उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, निर्यात संवर्धन रणनीति और वैश्विक आर्थिक मंच पर सशक्त भूमिका निभाने की नीति के अनुरूप है। अमेरिका के लिए भी भारत एक विश्वसनीय एवं व्यापक बाजार के रूप में उभर रहा है।
पूंजी बाजार के दृष्टिकोण से यह समझौता निर्यातोन्मुख तथा पूंजीगत व्यय से जुड़े क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास बढ़ा सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मत है कि इसके प्रभाव को तात्कालिक लाभ के बजाय मध्यम अवधि के संरचनात्मक परिवर्तन के रूप में देखा जाना चाहिए। यदि इसका क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से किया गया, तो यह भारत की निर्यात क्षमता और विनिर्माण आधार को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है। India-US Trade Deal















