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    भविष्य संवारने का बेहतर विकल्प है आईआईटी

    IIT is a better option to improve the future

    पहले चरण में जेईई मेंन की परीक्षा होती है। Indian Institute of Technology

    (करियर डेस्क)। (Indian Institute of Technology) आज अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं, जिसका मुख्य कारण बढ़ती हुई जनसंख्या व बेरोजगारी है। एक अच्छे रोजगार के साथ-साथ बच्चा अपने मां-बाप का समाज में नाम रोशन करे, यह इच्छा हर अभिभावक की होती है। जिसके परिणाम स्वरूप विधार्थियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है। इस स्थिति में अभिभावकों व बच्चों द्वारा सही दिशा का चुनाव अत्यंत अनिवार्य हो जाता है। कक्षा दसवीं के बाद विद्यार्थी के पास अपने भविष्य से संबधित बहुत से विकल्प होते हैं। वैसे तो विद्यार्थी को उसी दिशा में जाना चाहिए। जिसमें उसकी अधिक रुचि है, लेकिन यदि विधार्थी का गणित व विज्ञान विषयों के प्रति झुकाव है तो आईआईटी उसके लिए एक बहुत अच्छा विकल्प है।

    क्या है आईआईटी | Indian Institute of Technology

    इसका पूरा नाम इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी (भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान) है, जिसकी पूरे भारत में 23 शाखाएं हैं व इंजीनियरिंग के लिए 11279 सीटें हैं, प्रथम भारतीय प्रोधोगिकी संस्थान की स्थापना 1951 में खड़गपुर में की गई थी। इंजीनियरिंग के लिए यह सबसे बड़ा शिक्षण संस्थान है तथा विद्यार्थियों व अभिभावकों का सपना इन शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाना हमेशा ही रहा है।

    आईआईटी में प्रवेश की प्रक्रिया

    कक्षा दसवीं के बाद विद्यार्थी को नॉन मेडिकल संकाय से बाहरवीं की परीक्षा कम से कम 75 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण करनीहोती है। इसके साथ साथ आईआईटी में प्रवेश के लिए विद्यार्थी को दो चरणों से गुजरना होता है। पहले चरण में जेईई मेंन की परीक्षा होती है। जिसमें लगभग 15 लाख विधार्थी भाग लेते हैं। इस परीक्षा की लिए विद्यार्थी को दो अवसर दिए जाते हैं। एक जनवरी व दूसरा अप्रैल में। विद्यार्थी की जिस परीक्षा में अधिक अंक होते हैं।

    उसे मान्यता देते हुए रेंकिंग बनाई जाती है, जिसमें से पहले अढ़ाई लाख चयनित विद्यार्थी ही दूसरे चरण की परीक्षा दे सकते हैं। जेईई मेंन की परीक्षा में कुल 75 वैकल्पिक प्रश्न पूछे जाते हैं। जिसमें गणित, भौतिकी व रसायन विज्ञान से 25-25 प्रश्न होते हैं, जिसके लिए तीन घंटे की अवधि रहती है। प्रत्येक ठीक प्रश्न के लिए चार अंक दिए जाते हैं व गलत पर एक अंक काट लिया जाता है। इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए विद्यार्थी को कक्षा ग्यारहवीं व बाहरवीं की काफी अच्छे से तैयारी करनी होती है। पूरे भारत में एक ही पैटर्न को अपनाया जाता, इसलिए विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पुस्तकें जरूर पढ़नी चाहिये। इसके बाद दूसरे चरण की परीक्षा जेईई एडवांस के नाम से मई माह में ली जाती है, जिसकी रेंकिंग के आधार पर विधार्थी शिक्षण संस्थान व ट्रेड का चयन करते हैं।

    एनआईटी में प्रवेश कैसे लें विद्यार्थी

    यदि विद्यार्थी का एडमिशन आईआईटी में नहीं होता तो भी विद्यार्थी के पास एक और बेहतरीन विकल्प है। एनआईटी (नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलॉजी), जिसकी पूरे देश में 31 शाखाएं हैं। जेईई मेंन की परीक्षा की रेंकिंग की आधार पर एनआईटी के संस्थानों में विद्यार्थियों का एडमिशन होता है।

    बढ़ी कंपनियों से अच्छा पकेज

    आईआईटी से इंजीनियरिंग किये हुए विद्यार्थियों को देश व विदेश की बढ़ी कंपनियों की तरफ से जॉब के लिए प्राथमिकता मिलती है। अधिकतर विद्यार्थियों की तो पढ़ाई के दौरान ही बहुत अच्छे पकेज पर जॉब पक्की हो जाती है। इन संस्थानों में प्रवेश होना कठिन है जिसके लिए विद्यार्थियों को पूरी निष्ठा से संघर्ष करना पढ़ता है लेकिन आई आईआईटी से इंजीनियरिंग करने की बाद विद्यार्थियों का भविष्य उज्ज्वल है।

    -नीरज पाहुजा, जिला गणित विशेषज्ञ, सरसा)

    ये हैं आईआईटी के मुख्य संस्थान

    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, मुंबई।
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, कानपुर। 
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, दिल्ली।
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, कानपुर।
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, गुवाहटी।
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, रूडकी।
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, भुवनेश्वर।
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, हैदराबाद।
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, इंदौर।
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, वाराणसी।
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, जम्मू।
    • -भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, गोवा।
    • भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान, पटना।
    • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास।

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