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    अपराधों की विवेचना को और अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और न्यायसंगत बनाया: जे. रविन्दर गौड़

    Ghaziabad News
    Ghaziabad News: अपराधों की विवेचना को और अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और न्यायसंगत बनाया: जे. रविन्दर गौड़

    साक्ष्य आधारित जाँच प्रणाली से गाजियाबाद पुलिस आधुनिक और वैज्ञानिक पुलिसिंग की और अग्रसर:पुलिस आयुक्त

    • गाजियाबाद में साक्ष्य-आधारित विवेचना प्रणाली: पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में बड़ा कदम
    • साक्ष्य, डिजिटल प्रमाण, तकनीकी विश्लेषण और फॉरेंसिक रिपोर्ट प्रणाली का मुख्य आधार

    गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। Ghaziabad News: देश की राजधानी दिल्ली से सटी हाईटेक गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने 6 मई 2025 से साक्ष्य-आधारित विवेचना प्रणाली लागू कर दी है, जिसका उद्देश्य अपराधों की विवेचना को और अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और न्यायसंगत बनाना है। पुलिस आयुक्त जे. रविन्दर गौड के निर्देशन में यह नई प्रणाली पूरे जिले के थानों पर लागू की गई है।

    इस प्रणाली का आधार साक्ष्य, डिजिटल प्रमाण, तकनीकी विश्लेषण और फॉरेंसिक रिपोर्ट है। अब विवेचना में हर कार्रवाई प्रमाणों पर आधारित होगी और व्यक्तिगत राय या अनुमान का कोई स्थान नहीं होगा। इसके तहत, अभियुक्तों के नामजदगी में गलती करने, धाराओं में वृद्धि या लोप करने जैसी महत्वपूर्ण कार्रवाई केवल जोनल पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त के अनुमोदन के बाद ही की जा रही है।

    प्रमुख अपराधों की विवेचना पर असर | Ghaziabad News

    साक्ष्य-आधारित विवेचना प्रणाली के तहत कुछ प्रमुख अपराधों जैसे एससी/एसटी अधिनियम,धारा 307/386/326,धारा 420/419 , और संपत्ति संबंधित अपराधों की विवेचना की प्रक्रिया में भी बदलाव आया है। इन मामलों में विवेचकों को अधिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

    अनुमोदन का विवरण

    1 मई 2025 से 30 नवंबर 2025 तक, जोनल पुलिस उपायुक्त और सहायक पुलिस आयुक्त ने जिन मामलों में अनुमोदन दिया, उनका संख्यात्मक विवरण भी सामने आया है। यह विवरण स्पष्ट करता है कि किस प्रकार विवेचनाओं में सुधार और पारदर्शिता आई है, साथ ही दोषियों की पहचान और दोषारोपण में कोई भी गलतफहमी या मनमानी कम हुई है।

    ये है प्रमुख विशेषताएँ

    साक्ष्य-आधारित जाँच: विवेचना में केवल प्रमाणिक दस्तावेज़, गवाहों के बयान, डिजिटल डेटा और फॉरेंसिक रिपोर्टों का ही उपयोग किया जा रहा है। न्यायसंगत प्रक्रिया: व्यक्तिगत राय या अनुमान के बजाय ठोस साक्ष्य पर आधारित निर्णय।
    तकनीकी सहयोग: सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), डिजिटल फॉरेंसिक आदि का इस्तेमाल।
    पारदर्शिता: विवेचना की प्रक्रिया को पूरी तरह से रिकॉर्ड किया जा रहा है ताकि न्यायालय में प्रस्तुत किया जा सके।
    प्रशिक्षण: सभी विवेचक अधिकारियों को इस नई प्रणाली के तहत विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

    ये आये महत्वपूर्ण परिणाम | Ghaziabad News

    अपराधों की विवेचना में तेजी और सटीकता आई है।
    न्यायालय में अभियोजन की दर में वृद्धि हुई है।
    जनता का पुलिस पर विश्वास और भरोसा बढ़ा है।
    गाजियाबाद पुलिस अब साक्ष्य-आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में अग्रणी बन चुकी है।

    गाजियाबाद पुलिस आयुक्त श्री गौड़ के इस प्रयास से न केवल विवेचनाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता में वृद्धि हुई है, बल्कि पीड़ितों और शिकायतकर्ताओं के विश्वास में भी मजबूती आई है। यह कदम पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद को एक आधुनिक और वैज्ञानिक पुलिसिंग की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रहा है। पुलिस आयुक्त के अनुसार आधारित जाँच प्रणाली से अपराधों की विवेचना को और अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और न्यायसंगत बनाया है। इस जाँच प्रणाली से पुलिस निरंतर आधुनिक और वैज्ञानिक पुलिसिंग की और अग्रसर है।

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