पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार सरदार हरबंस सिंह जी (पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का पहला नाम) के घर का सारा सामान रात के समय डेरा से बाहर रखवा दिया गया। साईं जी अपने भावी गद्दीनशीन की कड़ी परीक्षा ले रहे थे। सर्दी का मौसम था, हल्की बूंदाबांदी और ठंडी हवाएँ चल रही थीं। ऐसे में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपने छोटे-छोटे बच्चों और पूजनीय माता जी सहित पूरे परिवार ने पूरी रात सामान की निगरानी के लिए खुले आसमान के नीचे बिताई। MSG Maha Rahmokaram Month
प्यारे सतगुरु जी की आज्ञा पालन का ऐसा उदाहरण मिलना असंभव
अपने प्यारे सतगुरु जी की आज्ञा पालन का ऐसा उदाहरण मिलना असंभव है। परीक्षा और सख्त हो गई। सुबह सूरज निकलने के समय पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने तेरावास से बाहर आते ही पूछा, ”भाई श्री जलालआणा साहिब वाले सरदार हरबंस सिंह जी कहाँ हैं?” साध-संगत ने बताया, ”साईं जी, वे तो आपजी के हुक्मानुसार अपने सामान के पास बाहर बैठे हैं।”
पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने आप जी को अपने पास बुलाकर फरमाया, ”भाई, यह सामान किसका है?” पूरा परिवार अपने प्यारे सतगुरु जी के चरणों में हाथ जोड़कर इस अलौकिक लीला को देख रहा था। सभी ने नम्रता से विनती की, ”साईं जी, यह सब आपका ही है।” तब पूजनीय बेपरवाह साईं जी ने हुक्म फरमाया, ”यदि पूरे परिवार में से किसी की भी आँख से एक आँसू निकला तो सतगुरु इस सामान को स्वीकार नहीं करेंगे।”
क्रमश: स्रोत: भाग-2 सच्चे रूहानी रहबर | MSG Maha Rahmokaram Month















