यह पहल मजबूत डोनर नेटवर्क के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रही:डॉ. उपासना अरोड़ा
- स्टेम सेल दान को लेकर यशोदा मेडिसिटी की नई पहल
- ‘ए मैच दैट सेव्स लाइव्स’ अभियान से बढ़ाई जन-जागरूकता
गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। Ghaziabad News: देश की राजधानी दिल्ली से सटे इंदिरापुरम स्थित यशोदा मेडिसिटी ने स्टेम सेल दान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से “ए मैच दैट सेव्स लाइव्स” नामक जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया। इस पहल का मुख्य फोकस एक सरल बक्कल स्वैब परीक्षण की जीवनरक्षक भूमिका और भारत में स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्री के विस्तार की आवश्यकता पर रहा।
यशोदा मेडिसिटी द्वारा यह अभियान डाट्री स्टेम सेल डोनेशन रजिस्ट्री और जेनोवा बायो फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के सहयोग से आयोजित किया गया। अभियान में आसपास की आवासीय सोसायटियों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया, जो स्टेम सेल दान को लेकर बढ़ती सामाजिक जागरूकता का संकेत है। कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी एवं आईएएस अधिकारी अभिनव गोपाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
70 प्रतिशत मरीजों को नहीं मिलता पारिवारिक डोनर | Ghaziabad News
आज के चिकित्सकीय परिदृश्य में इस तरह की पहल की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, थैलेसीमिया और अन्य गंभीर रक्त विकारों से पीड़ित अनेक मरीजों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट ही एकमात्र प्रभावी उपचार होता है। आंकड़ों के अनुसार, 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों को परिवार के भीतर उपयुक्त डोनर नहीं मिल पाता।
संबंधित डोनर मिलने की संभावना बेहद कम
संबंधित डोनर से मेल मिलने की संभावना भी लगभग 10 हजार में एक होती है, क्योंकि इसके लिए ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (एचएलए) का अत्यंत सटीक मिलान जरूरी होता है। यही कारण है कि मरीजों और संभावित डोनरों के बीच की दूरी आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
बक्कल स्वैब टेस्ट से जीवन बचाने की दिशा में पहला कदम
अभियान के दौरान लोगों को बताया गया कि जीवन बचाने की दिशा में पहला कदम एक साधारण बक्कल स्वैब परीक्षण हो सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित, त्वरित और बिना दर्द की होती है। साथ ही स्टेम सेल दान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने पर विशेष जोर दिया गया। Ghaziabad News
विशेष पंजीकरण बूथ लगाए गए
जागरूकता को वास्तविक भागीदारी में बदलने के लिए यशोदा मेडिसिटी, इंदिरापुरम और यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, कौशांबी में विशेष जागरूकता एवं पंजीकरण बूथ लगाए गए। यहां लोगों ने स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराया, बक्कल स्वैब सैंपल दिए और विशेषज्ञ चिकित्सकों से संवाद किया। अभियान के तहत स्वास्थ्य वार्ताओं और पैनल चर्चाओं का भी आयोजन किया गया। इनमें थैलेसीमिक्स इंडिया एवं थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन की सचिव शोभा तुली, डाट्री की नॉर्थ इंडिया प्रमुख बिंदिया साहनी सहित कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने समय पर उपयुक्त डोनर मिलने से उपचार परिणामों में होने वाले सकारात्मक बदलावों पर प्रकाश डाला।
सर्वाइवर की ज़ुबानी सामने आईं प्रेरक कहानियां
अभियान के मानवीय पक्ष को उजागर करने के लिए बीएमटी की कहानी: सर्वाइवर की ज़ुबानी के तहत मरीजों और सर्वाइवरों की वास्तविक कहानियां साझा की गईं, जिन्होंने स्टेम सेल दान के जीवन बदलने वाले प्रभाव को रेखांकित किया।
क्या बोले यशोदा अस्पताल समूह के चिकित्सक
डॉ. पी. एन. अरोड़ा , अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, यशोदा अस्पताल समूह ने कहा कि स्टेम सेल दान के प्रति जागरूकता फैलाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और यह अभियान जनस्वास्थ्य के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। डॉ. उपासना अरोड़ा , प्रबंध निदेशक ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य स्टेम सेल दान की जीवन रक्षक क्षमता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और डोनर पंजीकरण को सरल बनाना है। उन्नत बोन मैरो ट्रांसप्लांट सुविधाओं के साथ यह पहल मजबूत डोनर नेटवर्क के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रही है। डॉ. निवेदिता ढींगरा, निदेशक एवं प्रमुख, हेमेटोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट ने कहा कि हर नया पंजीकृत डोनर मरीजों को उपचार की सफलता के और करीब ले जाता है।
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