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Tuesday, February 17, 2026
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    सोशल मीडिया पर हंसी का पात्र बनी जलपरी

    • नया प्रयास: देशी बसों के मुकाबले बेकार है बस, फेसबुक व ट्विटर पर उड़ रहा उप-मुख्यमंत्री सुखबीर बादल का मजाक
    • करोड़ों रुपए खर्च कर विदेश से मंगवाई पानी में चलने वाली बस
    • पंजाब के लोग मांग कर रहे सीबीआई जांच की मांग
    • 9 करोड़ रूपए खर्च किए प्रोजैक्ट पर

    ChandiGarh, Ashwani Chawla:  पंजाब के हरीके पत्तन से सोमवार से पंजाब सरकार ने पानी वाली बस की शुरूआत की। उप-मुख्यमंत्री सुखबीर बादल इसे एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं, लेकिन सच्चाई कुछ ओर ही है। लोग सोशल मीडिया पर जमकर मजाक उड़ा रहे हैं। लोगों ने इस प्रोजैक्ट को सबसे बेकार प्रोजैक्ट करार दिया। इसे न केवल पैसों की बर्बादी करार दिया जा रहा है, बल्कि इस प्रोजैक्ट की सीबीआई से जांच करवाने की मांग कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार उप-मुख्यमंत्री ने लगभग दो साल पहले केंद्रीय ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में जल्द ही पानी की बस चलाने का ऐलान किया था। इस ऐलान के बाद सुखबीर बादल की विरोधी पार्टियों व सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा खिल्ली उड़ाई गई, क्योंकि यह ऐलान हकीकत से काफी ज्यादा दूर नजर आ रहा था। विरोधी पार्टियों के निशाने पर आए सुखबीर बादल ने भी इस प्रोजैक्ट को अपना ड्रीम प्रोजैक्ट घोषित करते हुए हर हाल में बस को चलाने का ऐलान कर दिया था। जिसके बाद पंजाब के पर्यटन विभाग ने इस प्रोजैक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी लेते हुई एक विदेशी कंपनी को इस पानी वाली बस को तैयार करने का प्रोजैक्ट करार दिया।

    प्लेटफार्म पर तीन करोड़ रूपए किए खर्चे
    बस को पर्यटन विभाग ने 6 करोड़ रुपए में खरीदा गया है, जबकि इस बस को पंजाब में लाने और इसे चलाने के लिए हरीके पत्तन में प्लेटफार्म तैयार करनं पर अब तक कुल 3 करोड़ रुपए खर्च आ चुके हैं। इस प्रोजैक्ट को पूरा करने पर सरकार को 9 करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च करना पड़ा है।

    बस का देशी लुक
    सोमवार को सुखबीर बादल ने अपनी इस पानी वाली बस का उद्घाटन किया। उन्हें शाबाशी मिलने की बजाए सोशल मीडिया पर तलख टिप्पणीयों का सामना करना पड़ा। इस बस को देखकर कोई भी विश्वास नहीं कर सकता है कि यह विदेश से मंगवाई हो, क्योंकि इसकी लुक देखकर यूं लगता है कि इसे कोई नौसिखिया कंपनी ने पंजाब में ही तैयार किया हो।

    घोटाले की आशंका जताई
    सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि इस मामले की सीबीआई जांच करवाई जाए, क्योंकि बस को देखकर स्पष्ट नजर आ रहा है, इसकी खरीद में बड़ा घोटाला हुआ है। यहीं ही नहीं सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी की जा रही है कि पंजाब के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है और जनता का पैसा बर्बाद कर रहे हैं।

    पानी में चलने वाली बस को 6 करोड़ रुपए में खरीदा गया है, जबकि इसकी बनावट देखकर लगता नहीं कि इसकी कीमत छह करोड़ होगी। बस की बनावट भी बिल्कुल देशी तरीके की है, जिसे देखकर कोई नहीं कह सकता है कि इस बस को विदेश से तैयार करवाया गया हो।

    2 किलोमीटर का सफर 800 रुपए में
    पर्यटन विभाग ने इस बस पर बैठकर सैर करने की टिकट 800 रुपए तय की। शुरूआत में यह केवल 2 किलोमीटर का सफर ही तय करेगी। इसमें कोई ओर सुविधा नहीं दी जाएगी। सोशल मीडिया पर राकेश कुमार का कहना है कि वह कुछ महीने पहले ही कश्मीर जाकर आया है। जहां डल्ल झील में क्रूज में सैर करना भी इससे ज्यादा सस्ता है, जहां कि खूबसूरत नजारे के साथ नाश्ता भी मिलता है। उन्होंने कहा कि यह बस तो एक मोटर बोट जैसी है।

    खजाना फूंकने की ठानी
    सांसद भगवंत मान ने कहा कि सुखबीर बादल ने तो सरकारी खजाना लूटने की ठान रखी है, क्योंकि जिस व्यक्ति से सड़कों पर रोडवेज की बसें नहीं चली, वह वह पानी वाली बस कैसे चलाएगा। भगवंत मान ने कहा कि सुखबीर बादल ने केवल बेवकूफी में ऐलान के कारण अपनी इज्जत बचाने इस पर 9 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं, जबकि सुखबीर बादल को भी पता है कि इस प्रोजैक्ट पर उसने केवल पैसा ही बर्बाद किया है।

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