कोलकाता। पश्चिम बंगाल में ‘तार्किक विसंगति’ श्रेणी में चिह्नित मतदाताओं के दस्तावेजों की न्यायिक समीक्षा की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। हाल ही में Supreme Court of India के निर्देशों के अनुपालन में सोमवार से यह कार्यवाही औपचारिक रूप से प्रारंभ हुई। West Bengal News
इस बीच भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों—मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना—में नियुक्त न्यायिक अधिकारियों ने अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है। इन क्षेत्रों में संवेदनशील परिस्थितियों तथा पूर्व में सामने आई सुरक्षा संबंधी घटनाओं को देखते हुए यह अनुरोध किया गया है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार Election Commission of India ने न्यायिक अधिकारियों की आशंकाओं का संज्ञान लिया है और राज्य पुलिस प्रशासन को पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। West Bengal News
‘तार्किक विसंगति’ श्रेणी में चिह्नित दस्तावेजों की संख्या लाखों में
सूत्रों के मुताबिक ‘तार्किक विसंगति’ श्रेणी में चिह्नित दस्तावेजों की संख्या लाखों में है, जिनमें सर्वाधिक मामले मुर्शिदाबाद जिले से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक आंकड़ा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। प्रत्येक प्रकरण में न्यायिक अधिकारियों को दस्तावेज स्वीकार या अस्वीकार करने के कारणों का स्पष्ट उल्लेख करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
समीक्षा प्रक्रिया की दैनिक प्रगति रिपोर्ट Calcutta High Court को प्रस्तुत की जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, न्यायिक परीक्षण के लिए लंबित मामलों को छोड़कर राज्य की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की जानी है। जिन मामलों का निर्णय बाद में होगा, उनके पात्र मतदाताओं को पूरक सूची के माध्यम से जोड़ा जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष मुख्य चुनौती यह है कि बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जा सके। यदि समीक्षा कार्य समय पर पूर्ण नहीं हुआ तो अंतिम सूची के प्रकाशन पर प्रभाव पड़ सकता है।राज्य प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और विधिसम्मत ढंग से संपन्न कराया जाएगा। West Bengal News















