
शिल्पकार देवेंद्र कुमार ने बताया कि सूरजकुंड मेले में 25 वर्षो से लगातार भाग ले रहे
फरीदाबाद (सच कहूँ/सागर दहिया)। Faridabad News: अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड आत्मनिर्भर शिल्प मेला न केवल देश-विदेश की कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल और स्वदेशी उत्पादों को भी नई पहचान दिला रहा है। इसी कड़ी में मेले की छोटी चौपाल के पास स्थित स्टाल नंबर 644 पर जूट से बने आकर्षक और उपयोगी उत्पाद पर्यटकों के बीच खास लोकप्रिय हो रहे हैं। मेले में स्टॉल नंबर 644 पर जूट से बने तकिया कवर, कुशन कवर, बेड कवर, हैंडबैग, शॉपिंग बैग, लैपटॉप बैग, फाइल कवर, टेबल मैट, पर्स, होम डेकोर आइटम्स सहित
लगभग 15 से 20 प्रकार के विभिन्न उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, जिन्हें पर्यटक काफी पसंद कर रहे हैं। ये सभी घर की सजावट के साथ-साथ दैनिक उपयोग के लिए भी बेहद उपयोगी हैं। स्टाल पर उपलब्ध जूट उत्पादों की कीमत 150 रुपये से लेकर 3500 रुपये तक रखी गई हैं, जिससे हर वर्ग के लोग अपनी पसंद और बजट के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं। कम कीमत में टिकाऊ और आकर्षक उत्पाद मिलने के कारण यह स्टाल परिवारों, युवाओं और महिलाओं के बीच विशेष लोकप्रियता हासिल कर रहा है।
देवेंद्र कुमार का सूरजकुंड मेले से 25 वर्ष का नाता | Faridabad News
शिल्पकार देवेंद्र कुमार ने बताया कि उनका सूरजकुंड मेले से 25 वर्षों का नाता है, वे पिछले 25 वर्षो से लगातार इस मेले में भाग ले रहे हैं। हर वर्ष उनके उत्पादों को देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का भरपूर समर्थन मिलता है। उन्होंने बताया कि जूट से बने उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल, टिकाऊ और लंबे समय तक उपयोगी होते हैं। यही कारण है कि वर्तमान समय में जूट उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर उन ग्राहकों के बीच जो प्लास्टिक के विकल्प के रूप में प्राकृतिक वस्तुओं को अपनाना चाहते हैं।
सूरजकुंड आत्मनिर्भर क्राफ्ट फेस्टिवल का किया भ्रमण
भिवानी: सेक्टर 13 स्थित चौ. बंसीलाल राजकीय बहुतकनीकी के फैशन डिजाइन और फैशन टेक्नोलॉजी के 40 छात्रों ने फरीदाबाद के सूरजकुंड में आयोजित 39वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट फेस्टिवल 2026 का शैक्षिक भ्रमण किया। प्राचार्य डा. गीता देवी के नेतृत्व में डा. कविता रानी (एचओडी, फैशन डिजाइन) और डा. सनी पन्नू (सीनियर लेक्चरर) भी साथ रहे। छात्रों ने विभिन्न हस्तशिल्प, डिजाइन और सांस्कृतिक पहलुओं का अध्ययन किया। यह भ्रमण छात्रों के लिए प्रेरणादायक रहा और उन्हें भारतीय शिल्प कौशल को करीब से जानने का अवसर मिला।
यह भी पढ़ें:– कांग्रेस नेता से मांगी पांच करोड़ की रंगदारी














