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    कलेसर नेशनल पार्क की सुरक्षा अब एआई से जंगल में होने वाली हर गतिविधि की मिलेगी सटीक जानकारी

    Pratap Nagar News
    Pratap Nagar News: कलेसर में वन्य प्राणी विभाग के कार्यालय में बनाया गया टावर का फाउंडेशन और लाया गया कंटेनर।

    वन्य जीव प्राणी विभाग के कार्यालय में बनाया जा रहा है कंट्रोल रूम।

    प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar News: लगभग 25 हजार एकड़ में फैले कलेसर जंगल और नेशनल पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में वन एवं वन्य प्राणी विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब नेशनल पार्क की निगरानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के माध्यम से की जाएगी, जिससे जंगल में होने वाली हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सकेगी।

    विभाग के अनुसार इस अत्याधुनिक प्रणाली के लागू होने से वन्य प्राणियों की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर भी समय रहते नियंत्रण संभव होगा।

    वन एवं वन्य प्राणी विहार विभाग ने कलेसर नेशनल पार्क में 42 मीटर ऊंचे दो निगरानी टावर स्थापित करने की योजना तैयार की है। इनमें से एक टावर सुखराव नदी के किनारे जंगल के बीचो-बीच लगाया जाएगा, जबकि दूसरा टावर वन एवं वन्य प्राणी विहार कार्यालय परिसर में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए दोनों जगह पर फाउंडेशन तैयार की जा चुकी है। जंगल के भीतर लगाए जाने वाले टावर में उच्च तकनीक से लैस रडार सेंसर और अत्याधुनिक कैमरे लगाए जाएंगे, जो जंगल में होने वाली बारीक से बारीक गतिविधि को भी पहचानने में सक्षम होंगे।

    यह एआई आधारित सिस्टम किसी भी संदिग्ध गतिविधि, हलचल या खतरे को तुरंत रिकॉर्ड कर कार्यालय स्थित टावर तक सिग्नल भेज देगा। कार्यालय के टावर को हाई डेफिनेशन प्लाज्मा टीवी से जोड़ा जाएगा, जिस पर जंगल की लाइव निगरानी की जा सकेगी। इससे वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारी हर समय गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर पाएंगे। Pratap Nagar News

    वन विभाग का कहना है कि इस तकनीक के माध्यम से न केवल वन्य प्राणियों की दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों पर सूक्ष्म निगरानी रखी जा सकेगी, बल्कि जंगल में आग लगने की घटनाओं, लकड़ी तस्करी, अवैध शिकार और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को भी शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकेगा। इससे नुकसान होने से पहले ही अलर्ट जारी कर कार्रवाई की जा सकेगी, जो अब तक पारंपरिक गश्त प्रणाली में संभव नहीं हो पाता था।

    वन एवं वन्य प्राणी विहार के निरीक्षक लीलू राम ने बताया कि विभाग वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर लगातार तकनीकी नवाचार कर रहा है। इसी कड़ी में एआई तकनीक पर आधारित एक मजबूत सुरक्षा चक्र स्थापित किया जा रहा है। यह सिस्टम जंगल में होने वाली घटनाओं और संभावित दुर्घटनाओं की जानकारी समय रहते विभाग तक पहुंचाएगा, जिससे हालात को नियंत्रण में लेने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए दिल्ली की एक तकनीकी एजेंसी को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से चुना जाएगा और जल्द ही सिस्टम स्थापित करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

    कालेसर नेशनल पार्क भौगोलिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह एक ओर हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है, तो दूसरी ओर यमुना नदी के किनारे उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क और उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़ा है। यही वजह है कि यहां वन्य प्राणियों की आवाजाही अधिक रहती है और सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत पड़ती है।

    पर्यटन की दृष्टि से भी कलेसर नेशनल पार्क हरियाणा का एक प्रमुख आकर्षण है। यहां तेंदुआ, हाथी, हिरण, सांभर, खरगोश, अजगर, तोता, मोर, बारहसिंघा और जंगली सूअर जैसे वन्य प्राणी पाए जाते हैं। इसके अलावा हजारों प्रजातियों की तितलियां, वर्षों पुरानी दीमक की बौंबियां और सैकड़ों साल पुराने साल, शीशम, बरगद, नीम, कीकर और पलाश के विशाल वृक्ष इस जंगल की जैव विविधता को और समृद्ध बनाते हैं। Pratap Nagar News

    वन विभाग का मानना है कि एआई आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद कलेसर नेशनल पार्क न केवल वन्य प्राणियों के लिए और अधिक सुरक्षित बनेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के क्षेत्र में भी यह एक नई मिसाल पेश करेगा।

    वहीं कुछ वन्य प्राणी और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि जंगल में इस तरह की तकनीक का उपयोग करके पेड़ो की भी सुरक्षा की जानी चाहिए। हर रोज कही ना कही खैर के पेड़ों पर भी खैर तस्कर कुल्हाड़ी चला रहे है जिससे काफी एरिया में जिले के जंगल खाली हो चुके है। इस तकनीक के माध्यम से पेड़ों की भी सुरक्षा होनी चाहिए। इस बारे में जिला वन्य प्राणी विभाग के निरीक्षक लीलू राम ने बताया कि नेशनल पार्क के एरिया की एआई तकनीक से निगरानी की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। जल्द ही टावर लगा दिए जाएंगे जिसका कंट्रोल रूम कलेसर के वन्य प्राणी विभाग के कार्यालय में बनाया जाएगा।

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