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    अगर पत्नी करवा चौथ का व्रत रख सकती है तो पति क्यों नहीं? | Karwa Chauth

    करवा चौथ

    जानें कब है करवा चौथ और कैसे रखें करवा चौथ का व्रत | Karwa Chauth

    करवा चौथ की कहानी

    चंडीगढ़ (एमके शायना) । यह महीना अक्टूबर का त्यौहारों का महीना होता है। इस महीने में करवा चौथ, दशहरा, दीपावली जैसे शुभ पर्व आएंगे। करवा चौथ तो महिलाओं का खास त्यौहार होता है। पूरे साल महिलाएं इस त्यौहार की प्रतीक्षा करती हैं। सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत विशेष महत्व रखता है। हर साल कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इस बार करवा चौथ का त्यौहार 13 अक्टूबर गुरुवार को है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु की कामना के साथ व्रत रखती हैं। शाम को भगवान का नाम लेने के बाद चंद्र दर्शन किए जाते हैं और चंद्रमा को अर्ध्य दिया जाता है। इसके बाद ही महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं ऐसे में सभी को उस रात अपने गांव शहर में चांद के निकलने का इंतजार रहता है। करवा चौथ का व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना के साथ करती हैं। माना जाता है कि इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और उनका वैवाहिक जीवन सुख में गुजरता है यह व्रत उत्तर भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।

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    करवा चौथ कब है 2022
     मुख्य बातें

    • 13 अक्टूबर 2022 को रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत।
    • पति की दीर्घायुं के लिए महिलाएं रखती हैं करवा चौथ का व्रत।
    • करवा चौथ में सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है निर्जला व्रत।

    ऐसे रखें करवा चौथ का व्रत:

    हर त्यौहार को लेकर लोगों में बहुत से पाखंड भी फैलाए जाते हैं। लोग त्यौहारों का असली मकसद भूल जाते हैं कि त्यौहार मनाए क्यों जाते हैं। इस दिन लोग करवा चौथ के नाम पर ठूस-ठूस कर खाते हैं, जो कि गलत है। इस दिन कई पत्नियां अपने पति का बहुत ज्यादा खर्चा करवा देती हैं। व्रत के नाम पर हो रहे इस पाखंडवाद को खत्म करते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां करवाचौथ के बारे विस्तार में समझाते हुए फरमाते हैं कि हम सबको व्रत कैसे रखना चाहिए। एक सत्संग में उन्होंने करवा चौथ पर व्याख्या करते हुए फरमाया, कि

    व्रत दुनियावी तौर पर लोक करवा चौथ का व्रत रखते हैं वह सुबह-सवेरे चूरमा ठोक लेते हैं। दस दिन का भोजन दो घंटों में रगड़ देते हैं और सारा दिन खाली पेट रहकर दिखाना और फिर दिन में भी फ्रूट वगैरह लाओ जी, यह लाओ जी, शाम का इंतजाम दोपहर को ही शुरू हो जाते हैं और इस दिन दुकानों पर जाके देखो आपको लगता ही नहीं व्रत है। ऐसे लगता है कि वहीं खाने पीने का कोई कम्पीटिशन होने वाला है। वहां ढेर लगे पड़े होते हैं साजो-सामान के और फिर बेचारे पति के पैसे जो आम तनख्वाह वाला है, पहले ही सुबह सवेरे ही कई दिनों की रगड़ देती हैं माता-बहनें उसकी जो वेतन है तनख्वाह है और शाम को भी अगर ना ला के दे तो कहती हैं आपको पता नहीं है आपकी लंबी उमर के लिए कर रहे हैं। बेचारा मरता क्या ना करता, फिर लाके देता है बहुत सारा सामान।

    करवा चौथ में सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है निर्जला व्रत। Karwa Chauth

    बस अभी चंद्रमा निकलेगा और फिर कम्पीटिशन शुरू होगा खाने का, तो यह हमें समझ नहीं आती यह बात क्या मतलब? व्रत रखो अगर व्रत सही तरीके से रखो तो उसका फायदा भी है कि सारा दिन गुनगुने पानी पे रहो, सुबह कुछ ना खाओ, यह थोड़े ना तीन बजे उठकर पेट इतना बढ़ा लेते हैं इतना तो उंठ ना उठाए बोरे वजन, आंतड़ीया इतनी भर जाती हैं उनको हिलने की जगह नहीं मिलती, इसलिए दोपहर को खुरार्टे मारते हैं माता बहन जो भी कोई व्रत रखता है और कहां गरम पानी पर रहना चाहिए सुबह से कुछ ना लो, ठीक है ताजा पानी जो होता है गुनगुना तो उस पर रहें तो अंतड़ियों की सफाई होती है, परम पिता परमात्मा की याद आती है और शाम को जो व्रत तोड़ो जब भी आप तोड़ना चाहो चौबीस घंटे बारह घंटे के बाद तो उसके बाद बिल्कुल हल्का फुल्का कोई भोजन लो तो यकीनन वो खाने से शरीर तंदुरुस्त होता है, मालिक की याद आती है और हमें लगता है कि बहनें रखती है तो भाइयों को भी एक दिन रखना चाहिए, क्योंकि अगर पत्नी पतिव्रता है तो पति पत्नीव्रता के होने में शर्म क्या है? हम सुना करते थे यह तो पत्नी का गुलाम है तो इसका मतलब पत्नी आपकी गुलाम रह सकती है आप नहीं बन सकते?

    क्या औरतों ने देश पर राज नहीं किया?

    बड़ी हैरानी होती है, गुलाम कोई किसी का नहीं होता प्यार मोहब्बत का यह रिश्ता होता है ना पति ना पत्नी, जब तक विचार मिलते हैं तो सब कुछ ठीक ठाक , जब विचार नहीं मिलते तो कहते हैं गल पेआ ढोल बजाना पैंदा है वह वाली बात है, सो दोनों को बराबर का हिस्सेदार होना चाहिए, तो जरूरी है कि एक दिन पति महोदय भी व्रत रखें, वो भी उस तरह रहा करे ताकि बराबर का प्यार बराबर, हम तो शुरू से कहते आ रहे हैं कि दोनों का हक बराबर होता है, पर यहां पुरुष प्रधान समाज है, यहाँ तो बेइज्जती हो जाती है आदमी की मूंछें नीचे हो जाती हैं। अगर वो यह सोच ले कि यार मैं पत्नी से सलाह करूंगा , कोई नहीं कहता था बाहर डर का मारा ,कोई बात चल रही हो यार यह काम करना है, कहता सोच कर बताऊंगा, यह नहीं कहता कि मैं पत्नी से पूछ के बताऊंगा डरता मारा कहेंगे यह गुलाम है। गांव में देखा है हमने बड़े बड़ों को ऐसे होते देखा है तो इसमें शर्म की क्या बात? क्या औरतों ने देश पर राज नहीं किया? क्या वे कई देशों के हैड नहीं कहलाई? तो क्यों ऐसा क्यों तो राय लेनी चाहिए घर परिवार में बैठकर। एक जैसा सम्मान करना चाहिए पुरुष को औरत का औरतों को पुरुष का। दोनों एक दूसरे का सम्मान करेंगे तो गृहस्थ जिÞंदगी बड़े सुखमय ढंग से गुजरेगी। लोगों का क्या है अग लगाई डब्बू कुत्ता कंध ते, इनका तो काम ही है उंगलियां लगाणा, जो आदमी को देखते कहते हैं बस.. बस.. ताकि वो पीटे उसको। तो ऐसा कभी नहीं करना चाहिए।

    13 अक्टूबर 2022 को रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत | Karwa Chauth

    रही बात अगर परम पिता परमात्मा के लिए यह चीज आप निभाना चाहें तो प्रेम करना कहना सौकखा ते निभाउणा बड़ा औखा, ये तलवार की धार पर चलने के मायने होता है। यह नहीं साईयां किते ते बधाईयां किते। यह कहावत पंजाबी की कि लाईयां किते ते बजाईयां किते। दृढ़ यकीन के साथ दृढ़ मोहब्बत के साथ आप आगे बढ़िए। साध-संगत बहुत सी ऐसी है जो हफ्ते में एक दिन बरत रखती ही रखती है, चौबीस घंटे का रखती है व्रत और जो भी खाने का पैसा होता है जितना भी खाना होता है वह उनको देते हैं, जो लाचार अंगहीन अपंग होते हैं और हम कहते हैं इससे बढ़िया व्रत तो दुनिया में कोई हो ही नहीं सकता। जो आपके पेट में भोजन नहीं गया वह उनके पेट में गया और उनकी दुआएं आएँगी वो फूड बैंक में चला जाता और फूड बैंक वाले पूरा-पूरा महीना जो आर्थिक तौर से तंग है, अंगहीन अपंग हैं, उनको पूरे महीने का राशन देते हैं, उसमें आपका भी हिस्सा होता है। तो बहुत बड़ा फल मिलता है बहुत खुशी मिलती है। और जो भी आज व्रत रखा है जैसा आपको बोला कि वरत खोलना कैसे होता है और कैसे आप उस व्रत का दीन दुखियों तक अपना पैसा या खाना पहुंचाते हैं तो यह बहुत बहुत बहुत बड़ी बात है। सो सबके घरों में खुशियां आएं, मालिक से प्यार बढ़े, मालिक रहमों करम से नवाजे। और वाक्य ही रुहानियत में पतिव्रता आपको मालिक जरूर बनाए उस अल्लाह, राम, सतगुरु मौला की। आपको खुशी दे वचनों पर आप पक्के रहें, तो अंदर बाहर कोई कमी ना छोड़े, बरकत दे मालिक। यह मालिक से दुआ है और जब भी आपका समय है जब भी आपका दिल करे आप नारा लगाकर अपना व्रत खोल सकते हैं।

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