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    Drugs Drugs: लाखों बह गए बोतल के बंद पानी में... Drugs से उजड़ता युवा वर्ग, बिगड़ रही सेहत

    Drugs: ड्रग्स के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय पाबंदी के बावजूद भी ड्रग्स के सेवन से वैश्विक स्तर पर युवा वर्ग की सेहत बिगड़ती जा रही है। इसका खुलासा विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कई बार कर चुका है। चेतावनी के बावजूद भी विश्व का कोई भी देश ड्रग्स की तस्करी को रोक नहीं पा रहा है। वैसे तो विश्व स्वास्थ्य संगठन की एडवाइजरी के अनुरूप प्रत्येक देश की सरकार अपने-अपने अनुसार ड्रग्स के खिलाफ अभियान चलाती है। लेकिन फिर भी इसका प्रचलन इस कदर बढ़ता जा रहा है कि विशेषकर युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा चपेट में है।

    आज की युवा पीढ़ी अपने शौक पूरे करने व स्टेटस सिंबल बनाने के लिए भी नशे का सेवन करते हैं। बाद में उन्हें यह आदत बन जाती है। इसी नशे की वजह से भविष्य में ऐसी-ऐसी बीमारियां उन्हें अपनी चपेट में दे लेती हैं, जिनका उन्हें पता भी नहीं पता चल पाता। हाई ब्लड प्रेशर की समस्या इन में एक आम बीमारी के रूप में पूरे विश्व में उभर रही है हाई ब्लड प्रेशर को कार्डियोलॉजिस्ट व न्यूरो सर्जन साइलेंट किल्लर के नाम से पुकारते हैं। क्योंकि ब्लड प्रेशर की समस्या के कारण ही दिल संबंधी बीमारियां होती है। वह इसी की वजह से ब्रेन हेमरेज होता है। यह वैश्विक स्तर पर गहन मंथन का विषय है। Drugs

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    युवा पीढ़ी का दिल हो रहा कमजोर

    ड्रग्स के सेवन से जहां युवा पीढ़ी दिल संबंधित बीमारियों से बीमार हो रहा है वही कम उम्र में हार्ट अटैक व कार्डियक अरेस्ट जैसी घटनाएं आमतौर पर देखने को मिल रही हैं। यदि गौर किया जाए तो पहले एक वह भी जमाना था जब दिल संबंधी बीमारियां नाम मात्र की होती थी। तब खाने में वसा संबंधित ड्राई फ्रूट का सेवन भी अधिक होता था। उसके बावजूद भी ह्यूमन बॉडी में बेड कोलेस्ट्रोल का लेवल कंट्रोल में रहता था। लेकिन आजकल खानपान के तौर तरीके बदलते जा रहे हैं। एक तो आज की युवा पीढ़ी घर का बना खाना पसंद ना करके बाजार का रूप अपनाती है। दूसरी ओर खाने से पहले या बाद में स्टेमिना बढ़ाने के लिए ड्रग्स का सेवन करते हैं। किसी भी स्तर का खेल हो या फिर रूटीन की सेहत की बात हो ऐसी दोनों ही स्थितियों में बाजारों में हेल्थ सप्लीमेंट के नाम से बहुत प्रोडक्ट मिलते हैं। इन प्रोडक्ट की निर्माण की विधि सही तरीके से पढ़ी जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनमें कि ड्रग्स का कितनी मात्रा में मिश्रण है। यह नहीं है कि इसको किसी भी देश का स्वास्थ्य विभाग जानता ना हो। सब जानते हुए भी अंजान बने रहना चिंतन की बात है।

    सबसे ज्यादा मौतों की वजह शराब,फिर भी प्रचलन बढ़ा | Drugs

    सोचने की बात है कि नशों में सिर्फ ड्रग्स या दवाइयों पर ही छापेमारी की जाती है,लेकिन एक ऐसा भी नशा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। लेकिन विश्व में सबसे अधिक मौत इसी की वजह से होती है। इसका नाम है शराब। यदि भारत देश का जिक्र किया जाए तो कुछ राज्य ऐसे भी हैं,जहां पूर्ण रूप से शराबबंदी है। लेकिन इन राज्यों में भी ड्रग्स की सप्लाई में शराब की सप्लाई हुई खुलेआम होती है।

    साथ लगते राज्यों की सीमा से होता है नशे का गौरखधंधा

    एक दूसरे राज्य के की सीमा पर से नशे की सप्लाई का गोरख धंधा होता है। यदि सरकार वास्तव में युवा पीढ़ी को नशे के चंगुल से बाहर निकलता आना चाहती है तो शराब को भी नशीले पदार्थों में शामिल करते हुए इसे बंद करना होगा।हालांकि शराब भारत का पेय पदार्थ नहीं है, इसके अलावा किसी भी प्रकार की सॉफ्ट ड्रिंक भी पेय पदार्थ में शामिल नहीं है। लेकिन फिर भी सरकार इनका लाइसेंस देकर धड़ल्ले से बिक रही है और दूसरी तरफ नशे के खिलाफ जोर-जोर से अभियान चला रहे हैं।

    खुद सरकार दे रही है नशे बेचने का लाइसेंस | Drugs

    एक तरफ तो सरकारी नशे में ड्रग्स के खिलाफ युद्ध स्तर पर अभियान चला रही है तो दूसरी तरफ नशे बेचने का लाइसेंस खुद देकर लोगों का स्वास्थ्य खराब कर रही है। नशा, नशा ही होता है। चाहे वह शराब का हो या फिर अन्य किसी भी प्रकार की ड्रग्स का। आजकल की युवा पीढ़ी ने नशे के विकल्प इतने तलाश लिए हैं कि उन्हें पकड़ पाना मुश्किल है। ग्रामीण स्तर पर गांजा, धतूरा,भांग, अफीम व का सेवन अत्यधिक मात्रा में किया जा रहा है। इनमें से एक नशे का नाम स्मैक भी है। स्मैक का नशा करने वाले किसी भी व्यक्ति को यदि एक समय भी समय उपलब्ध न हो तो उनके बदन में बेचैनी बन जाती है। इसके अलावा मेडिकल के तौर पर प्रयोग किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के इंजेक्शन व टैबलेट्स का प्रयोग भी बढ़ता जा रहा है। हालांकि बिना मनोरोग चिकित्सक पर्ची के बिना ऐसी प्रतिबंधित दवाई मिलना असंभव है। ऐसी दवाई बेचने वालों फार्मासिस्ट को भी डॉक्टर की पर्ची के साथ-साथ संबंधित मरीज का रिकॉर्ड भी दर्ज करना होता है लेकिन ब्लैक मार्केट के धंधे में सब कुछ संभव है।

    हमास के आतंकियों ने भी किया था ड्रग्स का सेवन | Drugs

    कुछ दवाई तो ऐसी हैं,जिनको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो दशक पहले बंद कर दिया गया है। लेकिन इनका अंतरराष्ट्रीय प्रयोग अब तक धड़ाधड़ से होता रहा है। कई अरब देश तो ऐसे हैं जिनका मुख्य व्यवसाय ही नशीली दवाओं पर निर्भर है। पिछले 22 दिनों से इजराइल में फिलिस्तीन समर्थित आतंकवादी संगठन हमास के बीच चल रही जंग के दौरान भी हमास के आतंकवादियों द्वारा एक बड़े स्तर पर ड्रग्स के सेवन की बात सामने आई है। इस पर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन चिंता जता चुका है।

    अपराधों की सबसे बड़ी वजह नशा | Drugs

    नशेड़ी व्यक्ति चाहे युवा हो या किसी भी आयु वर्ग का व्यक्ति हो वह अपनी जरूरत पूरी करने के लिए समाज में लूटपाट, चोरी व डकैती जैसी घटनाओं को अंजाम देने से भी नहीं चूकते। ऐसे अपराधियों को संबंधित राज्य की पुलिस जब गिरफ्तार करती है तो पूछताछ में सबसे पहले यही सामने आता है कि उन्होंने अपने नशे की जरूरत को पूरा करने के लिए ऐसा किया। नशे में पागल व्यक्ति अपनी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियां को भूलकर ऐसी घटनाओं को अंजाम देता है। अधिकतर दुष्कर्म व हत्या जैसी घटनाएं भी नशे की वजह से होती है।

    27.5 करोड़ लोग दुनियाभर में नशेड़ी | Drugs

    एक रिपोर्ट के अनुसार 27.5 करोड़ लोग दुनिया भर में अवैध रूप से नशे का सेवन करते हैं। इसके अलावा 19.2 करोड़ लोग गांजा को नशे के रूप में दुनिया भर में इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं 33 लाख लोगों की मौत हर साल अकेले नुकसानदायक एल्कोहल से हो रही है। सबसे चिंताजनक बात 1.1 करोड़ लोग इंजेक्शन लगाकर नशा कर रहे हैं, जिसमें से 13 लाख को एचआईवी (एड्स) से पीड़ित है। जो विश्वस्तर पर लाईलाज बीमारी है। जिसकी अभी तक विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास किसी भी प्रकार की कोई वैक्सीनेशन उपलब्ध नहीं है। 55 लाख लोग हेपेटाइटिस सी की बीमारी से ग्रस्त हैं।

    लगभग 10 लाख लोग एचआईवी व हेपेटाइटिस सी दोनों से पीड़ित

    लगभग 10 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें एचआईवी और हेपेटाइटिस सी दोनो है। इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के बावजूद भी यदि नशे का गौरव धंधा इसी प्रकार चला रहा तो आने वाले वक्त में युवा पीढ़ी खोखली होती चली जाएगी। यहां उन नशीली दावों का जिक्र नहीं करना चाहते ताकि युवा पीढ़ी इस लेख को पढ़कर ऐसी दवाओं के बारे में सर्च न कर सके।

    सप्लीमेंट्स के असर से जिम में भी आने लगे अटैक

    यह नशीली दावों या सप्लीमेंट का ही असर है कि आजकल अपने सेहत के लिए जिम जाने वाले लोगों को भी हार्ट अटैक आने लगे हैं, क्योंकि उन्हें आवश्यकता से अधिक सप्लीमेंट दिए जाते हैं। इस दिशा में पूरे सरकारी तंत्र को सोचने की जरूरत है। नहीं तो जिस प्रकार अधिक कीटनाशकों के प्रयोग से हमारी जमीन की उत्पादक क्षमता लगातार काम होते जा रही है। इसी प्रकार इंसानी शरीर की ताकत भी लगातार कमजोर होती जाएगी। अकेले सरकारों को ही नहीं, इस दिशा में समाज के पहरेदारों को भी नजर रखनी चाहिए। ताकि आज के युवा वर्ग को नशे की दलदल से बचाया जा सके।

    डॉ संदीप सिंहमार
    वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार।

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