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    जैसे मैं मर रही, वही मौत शाहरूख को भी मिले… मरने से पहले अंकिता का बयान

    Ankita Murder Case

    वरिष्ठ महिला अधिवक्ता ने अंकिता के लिए न्याय की मांग की

    पटना (एजेंसी)। 23 अगस्त को झारखंड के दुमका में 12 वीं कक्षा की छात्रा अंकिता कुमारी को तेजाब डालकर जला दिया था जिसके बाद कई दिन अस्पताल में इलाज चला लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई है। इलाज के दौरान अंकिता ने वीडिया बनाया और कहा जैसे मैं मर रही, वैसे ही शाहरूख भी मरे। वहीं इस मामले पर पटना उच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता छाया मिश्रा ने झारखंड के दुमका में 12 वीं कक्षा की छात्रा अंकिता कुमारी सिंह को जलाकर मारने की घटना की जांच पॉक्सो अधिनियम के तहत कराये जाने की मंगलवार को मांग की। अधिवक्ता मिश्रा ने से विशेष बातचीत में कहा कि अंकिता की घटना ने फिर एक बार निर्भया कांड की याद दिला दी।

    सरकारें चाहे किसी भी पार्टी की हो, ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखाने में कभी तत्परता नहीं देखी गई। एडवोकेट्स एसोसिएशन की पूर्व संयुक्त सचिव ने दुख व्यक्त करते हुए कहा, ‘अंकिता के साथ न्याय नहीं किया गया। लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण के अधिनियम पॉक्सो के तहत मामले की त्वरित जांच कराये जाने और दोषियों की फांसी की सजा की मांग की है। उन्होंने कहा कि अंकिता ने अपने बयान में कहा था कि जिस तरह वह तड़प-तड़प कर मर रही है वैसी ही सजा दोषी को भी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘छात्रा के पिता ने आरोप लगाया कि रांची के अस्पताल में जहां वह पांच दिनों तक भर्ती रही, डॉक्टर लापरवाह रहे। अच्छा इलाज के लिए दर्द से तड़ती छात्रा को दिल्ली नहीं भेजा गया।

    छात्रा की नाजुक हालत के देखते हुए उसे सर्वाधिक उन्नत इलाज देने के लिए तुरंत देश के बाहर भेजे जाने की व्यस्था की जानी चाहिए थी, लेकिन अफसोस इस बात का है कि हमारे देश में लड़किया कभी दुष्कर्म से, तो कभी तेजाब से, तो कभी अग्नि में झोंकर मारी जाती हैं और सरकारें मूक तमाशा देखती हैं। यह सरकारी और चिकित्सका व्यवस्था को शर्मसार करने के साथ-साथ मानवता के चेहरे पर भी करारा तमाचा है।

    सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने में भी झारखंड फिसड्डी साबित

    श्रीमती मिश्रा ने कहा कि न्यायमूर्ति जे एस वर्मा आयोग की सिफारिशों का झारखंड और बिहार में अमल नहीं हो रहा है। निर्भया कोष जिसमें तीन हजार करोड़ रुपए जमा है, इन दो राज्यों में समुचित उपयोग भी नहीं किया जा रहा है। झारखंड में 11 लाख रुपए ही खर्च हुए। इस राज्य में डायन बताकर महिलाओं पर अत्याचार किया जाता है। वन स्टॉप सेंटर सिर्फ रांची में खोला गया है। धनबाद में कुछ साल पहले कॉलेज की एक छात्रा पर तेजाब फेंका गया था जिससे उसका चेहरा बुरी तरह जल गया था। इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने में भी झारखंड फिसड्डी साबित हुआ है।

    ‘बिहार की स्थिति भी निर्भया कोष के मामले में खराब ही है

    उन्होंने कहा,‘बिहार की स्थिति भी निर्भया कोष के मामले में खराब ही है। बिहार मुजफ्फरपुर और गाय घाट पटना के शेल्टर होम्स के मामले में बदनाम हो चुका है। इस राज्य में सीसीटीवी, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम और सीसीटीवी लगाने के मामले में बहुत ही धीमा काम हुआ है। राज्य में 12.29 करोड़ रुपए जो, सपोर्ट सिस्टम के लिया तय किया गया था,एक पैसा भी नहीं खर्च हुआ है। अधिवक्ता ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह महिलाओं के प्रति अत्याचारों और हिंसा के प्रति बेहद संवेदनशील हो और निर्भया कोष का उपयोग पीड़ित बालिकाओं और महिलाओं के राहत के लिए करे।

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