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    आधुनिकता की दौड़ में महंगे शौंक छोड़ अपना रहे ‘साईकलिंग’

    Cycling
    हमारे वेदों-पुराणों में निरोग स्वास्थ्य को सबसे बड़ी दौलत माना गया है।

    संगरूर के साईकलिंग ग्रुप लोगों को कर रहे जागरूक, महंगे शौंक जीवन में डाल रहे बुरा प्रभाव: धालीवाल | Cycling

    • लॉकडाउन के बाद से बढ़ रहा साईकिल व्यापार

    संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)। हमारे वेदों-पुराणों में निरोग स्वास्थ्य (Health) को सबसे बड़ी दौलत माना गया है। बेशक आधुनिकता की इस दौड़ ने लोगों को महंगी गाड़ियां रखने के शौकिनों की संख्या में बड़ा विस्तार किया है लेकिन इन महंगे शौकों ने इन्सान के स्वास्थ्य में बडेÞ स्तर पर बुरा प्रभाव डाला है, जिस कारण अब महंगी गाड़ियां चलाने वाले लोग डॉक्टरों की राय अनुसार साईकिल चलाने लगे हैं। इसी कारण लोगों में स्वास्थ्य को लेकर बड़ी जागरूकता आई है व शहरों, गांवों व कस्बों के लोगों ने फिर से साईकिल चलाने शुरू कर दिए हैं। Sangrur News

    शहरों में सुबह के समय सड़कों पर गाड़ियों से अधिक साईकिल ज्यादा चलते नजर आने लगे हैं। वहीं अगर बात पारंपरिक शहर संगरूर की की जाए तो लोगों में अपने स्वास्थ्य को लेकर बड़ी जागरूकता आई है। बड़ी संख्या में लोग साईकिल चलाने लगे हैं। साईकिल चलाने को एक नया रूप देने के लिए यहां कई ग्रुप बने हुए हैं, जिनमें रॉयल पैडलर्स, संगरूर पैडलर्स व अन्य भी कई ग्रुप हैं, जिनमें सैकड़ों की संख्या में सदस्य हैैं और धीरे-धीरे इन सदस्यों की संख्या में लगातार विस्तार होता जा रहा है। संगरूर पैडलर्स ग्रुप के सक्रिय सदस्य प्रताप सिंह धालीवाल ने ‘सच कहूँ’ से बात करते बताया कि लॉकडाऊन से लोगों में साईकिल प्रति भारी जागरूकता आई है और उन्होंने अपने आप को फिर से साईकिल से जोड़ा है। Sangrur News

    उन्होंने बताया कि हमारे बीच डेढ़ सौ से ज्यादा सदस्य हैं, जिनमें बड़ी संख्या में हर रोज साईकिल चलाते हैं। उन्होंने बताया कि हमारे ग्रुप सदस्य औसतन 30 किलोमीटर प्रतिदिन साईकिल चलाते हैं, जिस पर लगभग डेढ से दो घंटों का समय लगता है। ग्रुप सदस्यों का हर महीने एक मुकाबला भी करवाया जाता है, जिसमें विजेता को इनाम भी दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि हमारी रोजाना की रूटीन बन चुकी है और यह उनकी आदत में शामिल हो चुकी है। ग्रुप सदस्यों के जन्म दिन या कोई अन्य खास दिन भी साईकलिंग कर किसी दूर-दराज के होटल में बैठ के मनाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि ग्रुप में 20 से लेकर 60 साल तक के सदस्य शामिल हैं, जो हर रोज उत्साह के साथ साईकिलिंग करते हैं।

    साईकिलिंग से होता है रक्त संचार बेहतर: डॉ. अमनदीप अग्रवाल | Cycling

    सच कहूँ के साथ बात करते डॉ. अमनदीप अग्रवाल जो खुद भी प्रतिदिन साईकिल चलाते हैं, ने बताया कि पुराने समय में लोग इस कारण तंदरूस्त रहते थे कि उनका ज्यादा समय साईकिल चलाकर निकलता था, उन्होंने बताया कि साईकिल चलाने से हृदय बहुत अच्छे तरीके से काम करता है। फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, रक्त का संचार बेहद अच्दा तरीके से होता है और सबसे बड़ी बात सुबह के समय आॅक्सीजन नाक से शरीर के अंदर जाती है, जिसका बेहद अच्छा परिणाम मिलता है। उन्होंने बताया कि सबसे अच्छा असर घुटनों पर भी पड़ता है, जिससे घुटनों की अच्छी एक्सरसाईज हो जाती है।

    साईकिल चलाने का रुझान बढ़ने से बिक्री भी बढ़ी: साहनी

    संगरूर के मशहूर साहनी साईकिल हाऊस के मालिक गुरमीत सिंह साहनी से बातचीत दौरान उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों से लोगों का रुझान साईकलिंग की तरफ होने से साईकिल मार्केट को एकदम उछाल मिला है। लॉकडाऊन में साईकलिंग व्यापार में काफी विस्तार हुआ। अगर पिछले सालों के मुकाबले बात की जाए तो इस साल लगभग डेढ गुना साईकिलों की बिक्री अधिक हुई है। उन्होंने कहा कि औसतन अच्छी साईकिल की कीमत 7 से 10 हजार रुपये करीब है। हीरो, एवन, फारगो व अन्य कंपनियों द्वारा साईकिलों के नए मॉडल लांच किए जा रहे हैं। Sangrur News

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