
बाल विवाह में भागीदार लोगों पर होगी कानूनी कार्रवाई: रेखा अग्रवाल
- पंडितों, पाठियों और गुरुद्वारा प्रबंधकों रहे सतर्क: रेखा अग्रवाल
जाखल (सच कहूँ/तरसेम सिंह)। Jakhal News: जाखल खंड में स्थित तलवाड़ा की आईटीआई कॉलेज और गांव साधनवास में में दो अलग अलग जगह महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बाल विवाह, घरेलु हिंसा व दहेज़ प्रथा जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान कॉलेज के प्रधानाचार्य रामकुमार, आंगनवाड़ी सुपरवाइजर कीर्ति गिल, आईटीआई स्टॉफ, बच्चे और गांव की महिलाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल विवाह व घरेलु हिंसा और दहेज़ के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों तथा इसे रोकने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। Jakhal News
उन्होंने उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह समाज के विकास में भी एक बड़ी बाधा है। इस कुप्रथा के कारण लड़कियों का शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास प्रभावित होता है। अक्षय तृतीय के अवसर पर विशेष रूप से सजग रहने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी प्रकार के बाल विवाह की सूचना समय रहते संबंधित विभाग तक पहुंचाई जा सके। साथ ही आंगनबाड़ी वर्कर्स को अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने और संदिग्ध मामलों पर नजर रखने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक एवं कानूनी अपराध है: रेखा अग्रवाल
महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रेखा अग्रवाल ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर अपराध है, जिसे रोकना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि कहीं भी नाबालिग बच्चों की शादी की जानकारी मिलती है तो तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। बाल विवाह में शामिल किसी भी व्यक्ति को कानून के तहत दो साल और एक लाख रूपये तक सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गांव-गांव में जागरूकता की सबसे मजबूत कड़ी हैं। आप सभी अपने क्षेत्र में लोगों को समझाएं कि बाल विवाह से बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। Jakhal News
हमें मिलकर इस कुरीति को खत्म करना है और समाज को एक नई दिशा देनी है। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने भी बढ़-चढक़र भाग लिया और बाल विवाह को रोकने के लिए प्रशासन के साथ सहयोग करने का संकल्प लिया।कॉलेज में बाल विवाह क़ो रोकने के लिए सभी ने शपथ ग्रहण की।विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इस तरह के जागरूकता अभियान आगे भी लगातार चलाए जाएंगे, ताकि समाज को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके।अक्षय तृतीया के मद्देनजर बाल विवाह रोकने को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इसके विरुद्ध प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करना रहा।
बाल विवाह निषेध अधिकारी रेखा अग्रवाल ने उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग द्वारा बाल विवाह से संबंधित प्रत्येक सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जाती है तथा इस बुराई को रोकने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
रेखा अग्रवाल ने बताया कि अक्षय तृतीया के अवसर पर, विशेषकर 19 अप्रैल को, “अबूझ साया” होने की मान्यता के कारण विवाहों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में जिले के सभी पंडितों, पाठियों और गुरुद्वारा प्रबंधकों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। उन्होंने अपील की कि कोई भी विवाह संपन्न कराने से पहले दोनों पक्षों की आयु की जांच अवश्य करें। यदि लड़की की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक और लड़के की आयु 21 वर्ष या उससे अधिक हो, तभी विवाह संपन्न कराया जाए; अन्यथा तुरंत बाल विवाह निषेध अधिकारी को सूचना दी जाए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयु सत्यापन के लिए आधार कार्ड मान्य दस्तावेज नहीं है। जन्म प्रमाण पत्र अथवा दसवीं कक्षा का स्कूल सर्टिफिकेट ही वैध दस्तावेज माने जाएंगे। साथ ही, बाल विवाह की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। किसी भी प्रकार की सूचना आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर, सीडीपीओ, निकटतम थाना या चौकी, 1098 अथवा 112 पर दी जा सकती है। Jakhal News
कार्यक्रम में घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 तथा दहेज निषेध कानून के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई। उपस्थित विद्यार्थियों और स्टाफ को समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने, समय पर सूचना देने तथा बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन में सहयोग करने का आह्वान किया गया। जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया कि जिले में कहीं भी बाल विवाह न हो, इसके लिए जागरूकता और निगरानी दोनों स्तरों पर प्रभावी प्रयास जारी रहेंगे। इस दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता,कॉलेज के छात्र-छात्राओं, स्टाफ सदस्यों साहित प्रधानाचार्या मौजूद रहे।
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