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Sunday, February 1, 2026
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    घाटी में हड़ताल से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित

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    दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठानों पर लटके रहे ताले

    श्रीनगर, एजेंसी।

    नागरिकों और वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के विरोध में अलगाववादी नेताओं के बंद के आह्वान पर कश्मीर घाटी में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। हड़ताल को मद्देनजर किसी भी विरोध की आशंका को देखते हुए भीड़भाड़ वाले इलाके स्थित ऐतिहासिक जामिया मस्जिद को बंद रखा गया। श्रीनगर की सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को उतारा गया जबकि शहर के किसी अन्य इलाके में किसी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया था।

    राइजिंग कश्मीर के मुख्य संपादक और वरिष्ठ पत्रकार श्री बुखारी की ईद से एक दिन पहले सरेआम हत्या कर दी गयी थी। हड़ताल के कारण कारोबार पर असर दिखाई दिया। भीड़भाड़ वाले इलाके और शहर.ए.खास में सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था जबकि दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठानों के ताले नहीं खुले। सड़कों पर केवल कुछ वाहन देखे गए। ऊपरी इलाके और सिविल लाइन्स में भी सामान्य जनजीवन पर खासा असर नजर आया।

    लाल चौक, बुद्धशाह चौक, रीगल चौक, मैसुमा, हरी सिंह हाई स्ट्रीट, बटमालू, मौलाना आजाद रोड, रेजिडेंसी रोड और डलगेट समेत शहर के अन्य इलाकों में कारोबारी और सामान्य गतिविधियां नगण्य नजर आईं।

    ट्रेन सेवाएं फिर रहीं निलंबित, भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात

    कश्मीर में सरकारी कार्यालयों और बैंकों में भी कामकाज प्रभावित हुआ। हड़ताल की वजह से अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा जिससे विद्यालयों में चहल-पहल नदारद थी। सुरक्षा कारणों से घाटी में  को ट्रेन सेवाएं फिर निलंबित रहीं। बुखारी और नागिरकों की हत्या के विरोध में सैय्यद अली शाह गिलानी, मीरवायज मौलवी उमर फारुक और मोहम्मद यासीन मलिक के अलगाववादी नेताओं के समूह ने हड़ताल का आह्वान किया था।

    हड़ताल के मद्देनजर बड़े शहरों और दक्षिण कश्मीर के तहसील मुख्यालयों पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों और राज्य की पुलिस को तैनात किया गया। अनंतनाग,कुलगाम,पुलवामा और शोपियां में कारोबारी और अन्य गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित नजर आईं। किसी भी प्रकार के विरोध से निपटने के लिए श्रीनगर,जम्मू- राष्ट्रीय मार्ग पर भी सुरक्षा बलों की भरी तैनाती की गयीं।

    मध्य कश्मीर के बड़गाम और गंदेरबल में भी वीरानी छाई रही। बारामूला से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार वहां जनजीवन पर हड़ताल के कारण बुरा असर देखा गया। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए। पुलों, भीड़भाड़ वाले इलाकों,बारामूला में सिविल लाइन्स और सोपोर शहरों में भी बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मी मुस्तैद किए गए।

     

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