चंडीगढ़/हिसारसच कहूँ/संदीप सिंहमार। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और राजस्थान में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से मौसम में बदलाव शुरू हो गया है। आसमान में घुमड़ रहे बादल किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रहे हैं। क्योंकि इस वक्त सरसों की फसल जहां कटाई होने के बाद खेतों में है, वहीं गेहूं की फसल भी पक कर तैयार है। ऐसे में बारिश से फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ रही है।
भारत मौसम विभाग के मुताबिक मौसम का यह बदलाव अब 1 अप्रैल तक बना रहने की संभावना है। इस दौरान हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की संभावना है। स्काईमेट वेदर के मुताबिक 30-31 मार्च तक बारिश का विस्तार उत्तर मध्य प्रदेश और केंद्रीय उत्तर प्रदेश तक दिखाओ दे सकता है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर की गति से तेज हवाएं और असमय बारिश खड़ी फसलों के लिए खतरा मंडरा सकता है। बारिश से तापमान में गिरावट, गर्मी से राहत और मौसम का संतुलन भी बना रहेगा। फरवरी और मार्च के पहले हिस्से में मौसम काफी शुष्क रहा, लेकिन अब उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश का दौर शुरू हो गया है।
पिछले कुछ दिनों से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं देखी गई हैं। एक नया और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से न केवल उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बल्कि मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी मौसम प्रभावित होगा। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के उत्तर और उत्तर-पश्चिम हिस्सों में हल्की बारिश और गरज-चमक शुरू हो सकती है। 29 मार्च तक बारिश की तीव्रता और फैलाव बढ़ने की संभावना है, जिससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के अधिकांश जिलों में मौसम सक्रिय होगा। इसके बाद बारिश की पट्टी धीरे-धीरे पूर्व और दक्षिण की ओर बढ़ेगी, और 30-31 मार्च तक यह उत्तर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मध्य हिस्सों तक पहुंचेगी। इस दौरान कई जगहों पर मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना रहेगी। यह बारिश का दौर 1 या 2 अप्रैल तक जारी रह सकता है, हालांकि बीच-बीच में छोटे ब्रेक हो सकते हैं। कुल मिलाकर, इस मौसम की गतिविधियों से तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी की तीव्रता कम होगी।















