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    क्या हुडुडा समर्थकों की मद्द से तंवर कर सकेंगे चुनावी वैतरणी पार?

    Lok Sabha Elections 2019

    -23 मई के चुनावी परिणाम ही बताएंगे कांग्रेस की एकजुटता का गुणा भाग

    सरसा सच कहूँ/सुनील वर्मा। गर्मी का मौसम उबाल पर है और ऐसे में राजनेताओं की साख भी दांव पर लगी है। राष्टÑीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल के प्रत्याशी भी अपने समर्थकों के साथ गर्मी के इस मौसम में गांव-गांव, घर-घर, कस्बा-कस्बा मतदाताओं के द्वार पर दस्तक दे रहे हैं। हालांकि किस राजनीतिक पार्टी की जीत होगी, किसकी हार, यह अभी तक सुनिश्चित नहीं है, मगर इतना सुनिश्चित अवश्य है कि राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की ओर से अपनी अपनी जीत के दावों में कोई कमी नहीं है। आरक्षित सरसा संसदीय सीट पर इस समय चार प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशी अपने समर्थकों सहित अपना चुनाव प्रचार करने में जुटे हैं

    । सरसा संसदीय सीट पर मुख्य तौर पर तीन राष्टÑीय पार्टियों जिनमें कांग्रेस, भाजपा और बसपा व लोसुपा मैदान में हैं वहीं क्षेत्रीय स्तर पर इनेलो और जजपा व आम आदमी पार्टी का गठबंधन चुनावी समर में है। इस समय जो सर्वाधिक चर्चा का विषय है वो है कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. अशोक तंवर का चुनाव लड़ना। क्योंकि हरियाणा कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और डॉ. अशोक तंवर के बीच का  द्वंद्व जाहिर है।

    वर्ष 2014 के संसदीय चुनाव में डॉ. अशोक तंवर को मिली हार के बाद से तंवर खेमे ने इस हार के लिए हुड्डा गुट को जिम्मेदार मानते हुए हुड्डा के समतुल्य संगठन खड़ा करने की होड़ की थी। इसी कड़ी में डॉ. तंवर ने विधानसभा चुनावों के दौरान सरसा और फतेहाबाद के विधानसभा क्षेत्र में अपनी मनपसंद के कांग्रेस उम्मीदवार बनाए थे। दोनों गुटों के बीच की कड़वाहट कम करने की दिशा में कांग्रेस के अनेक दिग्गजों ने प्रयास किए थे मगर यह कम नहीं हो पाई थी।

     

     

     

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