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    ‘परिवर्तन यात्रा’ के बाद भी नहीं आया कांग्रेस में ‘परिवर्तन’

    Lok Sabha, Elections, Haryana

    लोकसभा चुनाव। आपसी गुटबाजी के कारण नहीं हो पा रहा टिकटों के बटवारा

    • -हरियाणा में 6 दिन तक चली थी परिवर्तन यात्रा

    सच कहूँ/अश्वनी चावला
    चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस की तरफ से चलाई गई परिवर्तन यात्रा से हरियाणा में तो क्या परिवर्तन आना था खुद की कांग्रेस लीडरशिप में ही परिवर्तन नहीं आ पाया है। लगातार 6 दिन तक एक ही बस में घूमने के बावजूद भी हरियाणा के कांग्रेसी लीडर ना ही एक दूसरे को समझ पाए और ना ही जो एक दूसरे के खिलाफ दिल में जो खटास थी वह दूर कर पाए। जिसके चलते अभी भी हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी बरकरार है और इसी आपसी गुटबाजी के चलते ही हरियाणा की 10 सीटों पर कांग्रेस हाईकमान टिकटों का बंटवारा नहीं कर पा रही है क्योंकि हरियाणा के लीडरों के आपस में ही मत नहीं मिलने के चलते टिकटों का बंटवारा अधर में लटका हुआ है।

    अब गनीमत तो यह हो चली है कि हरियाणा में लोकसभा चुनाव 6वें फेस में होने हैं और अभी तक टिकटों का बंटवारा नहीं हो पाया जबकि हरियाणा के पड़ोसी राज्य पंजाब के चुनाव सातवें फेस में होने के बावजूद भी वहां पर कांग्रेस ने न सिर्फ टिकटों का बंटवारा कर दिया है बल्कि उन कांग्रेस के उम्मीदवारों के हक में चुनावी प्रचार की लहर भी शुरू कर दी है।

    तंवर को नहीं माना जा रहा अच्छा उम्मीदवार

    कांग्रेस हाईकमान के सामने एक गंभीर स्थिति पैदा हुई खड़ी है कि हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को ही सरसा से अच्छा उम्मीदवार नहीं माना जा रहा है। परंतु कांग्रेस हाईकमान अपने प्रदेश अध्यक्ष की टिकट को काटना नहीं चाहती है। जिसके चलते सरसा सीट पर अभी कुछ भी फाइनल नहीं हो पा रहा है। अशोक तंवर के विपक्षी कांग्रेसी लीडरों की तरफ से तर्क दिया जा रहा है कि अशोक तंवर तो चुनाव में उतारने की जगह चुनाव प्रचार करने की जिम्मेवारी दी जानी चाहिए क्योंकि वैसे भी सरसा लोकसभा सीट पर अशोक तंवर के हक में सर्वेक्षण नहीं आया है इसलिए सरसा लोकसभा सीट से किसी अन्य को टिकट दी जाए परंतु कांग्रेस हाईकमान अशोक तंवर की टिकट काटने को तैयार नहीं है।

    हुड्डा सोनीपत से हारे तो नहीं होंगे मुख्यमंत्री के उम्मीदवार

    भूपेंद्र सिंह को सोनीपत लोकसभा सीट से उतारने के लिए हरियाणा के ही कांग्रेस लीडर काफी दबाव डाल रहे हैं परंतु भूपेंद्र सिंह हुड्डा इसके लिए कतई तैयार नहीं हो रहे हैं क्योंकि वह इस बात को भली-भांति जानते हैं कि अगर सोनीपत लोकसभा सीट से उनकी हार हुई तो अगले 6 महीने बाद आने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री का उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा इसलिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा किसी भी हालत में सोनीपत लोकसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं।

    गुटबाजी की मानसिकता से ‘आजाद’ नहीं करवा पाए गुलाबनवी

    हरियाणा में कांग्रेसी लीडरों के बीच में चल रही गुटबाजी की मानसिकता को खत्म करने की जिम्मेवारी कांग्रेस हाईकमान ने अपने सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद को दी थी परंतु इस मामले में गुलाम नबी आजाद भी कामयाब नहीं हो पाए हैं। हालांकि गुलाब नबी आजाद की तरफ से भरपूर कोशिश करते हुए परिवर्तन यात्रा तक चलाई गई क्योंकि गुलाब नबी आजाद को इस बात का विश्वास था कि इस 6 दिन की यात्रा में जहां हरियाणा के लोगों में परिवर्तन की लहर दौड़ पड़ेगी वहीं पर गुटबाजी खत्म होते हुए हरियाणा काग्रेस के लीडरों के दिलों में भी परिवर्तन आएगा परंतु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है और आज भी हरियाणा कांग्रेस में कई गुट अलग अलग चलकर काम कर रहे हैं।

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