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Saturday, February 7, 2026
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    ‘‘हमारे प्यारे-प्यारे, मीठे-मीठे ‘मीत’ जीओ, हम बिल्कुल ठीक हैं।’’

    Shah Satnam Singh Ji Maharaj

    ‘गुरू का मीत’ की उपाधि

    एक बार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज, शाह मस्ताना जी धाम स्थित तेरावास में सीढ़ियों से नीेचे उतर रहे थे। उस समय पूज्य हजूर पिता जी नीचे खड़े थे। जब पूजनीय परम पिता जी अंतिम सीढ़ी पर आए तो पूजनीय हजूर पिता जी ने अपना पवित्र हाथ पूजनीय परम पिता जी के पवित्र कर-कमलों में थमाते हुए पूछा,‘‘हे सच्चे सतगुरू जी! आप जी ठीक हैं? ’’ इस पर पूजनीय परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘हमारे प्यारे-प्यारे, मीठे-मीठे ‘मीत’ जीओ, हम बिल्कुल ठीक हैं।’’ इसलिए पूजनीय परम पिता जी के मुखारबिंद से उपजे ‘मीत’ शब्द के बाद से पूज्य हजूर पिता जी अपने भजनों की रचना में ‘मीत’ शब्द लगाने लग गये। जब तेरावास से पूजनीय परम पिता जी व पूज्य हजूर पिता जी स्टेज पर जाने के लिए बाहर आते तो पूज्य हजूर पिता जी, पूजनीय परम पिता जी के रास्ते की तरफ निहारते ही रहते कि कहीं कोई कंकर या अन्य वस्तु पूजनीय परम पिता जी के चरणों के नीचे ना आए।

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    इस प्रकार पूज्य गुरू जी अपने मुर्शिद का बहुत ध्यान रखते। साथ वाले भाई जो हमेशा की तरह पूजनीय परम पिता जी के आगे-आगे चलते थे, उन्हें पूज्य हजूर पिता जी समझाते कि रास्ता बिल्कुल साफ होना चाहिए। अगर कभी ऐसा न होता तो पहले बहुत ही प्यार से समझाते और अगर उस पर अमल न होता तो सख्त हिदायत देते कि ऐसा दोबारा न हो। इस प्यार की लड़ी के तहत पूज्य हजूर पिता जी पूजनीय परम पिताजी की सेहत का स्वयं से भी ज्यादा ध्यान रखते और अगर कोई कंकर पूजनीय परम पिता जी के चरणों के नीचे आ जाता तो पूज्य हजूर पिता जी फरमाते कि वह कंकर हमारे दिल में चुभता है।

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    पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने स्वयं पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज के लिए ऊपर तेरावास में आने-जाने के लिए एक लिफ्ट तैयार करवाई ताकि पूजनीय परम पिता जी को ऊपर तेरावास में जाने के लिए सीढ़ियों पर चढ़ना न पड़े। पूज्य हजूर पिता जी ने शाह मस्ताना जी धाम का सारा कच्चा पंडाल पक्का करवा दिया, जिससे कि पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज को स्टेज पर विराजमान होने के लिए या पंडाल में घूमते समय किसी प्रकार की कोई भी तकलीफ न हो। पूज्य हजूर पिता जी ने पूजनीय परम पिता जी की सुविधा के लिए एक व्हील चेयर भी मंगवाई, जिस पर पूजनीय परम पिता को बैठाकर स्वयं पूज्य हजूर पिता जी अपने कर-कमलों से उसे चलाते तथा पक्के किए गए पंडाल में सुबह-शाम घुमाया करते।

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