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    ‘मीरा देवी’ के 100वें जन्मदिवस पर उमड़ा जनसैलाब

    Bhattu Kalan

    आजाद हिंद फौज के सिपाही स्व. बिहारी लाल बरतानिया की धर्मपत्नी है मीरा देवी

    भट्टू कलां (सच कहूँ/मनोज सोनी)। आज के समय में जब वृद्धावस्था को अक्सर असहायता और निर्भरता से जोड़कर देखा जाता है, ऐसे दौर में गांव दड़ौली निवासी मीरा देवी ने 100 वर्ष की आयु में भी श्रम, आत्मनिर्भरता और सादगी का जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है। उनकी दीर्घायु, अनुशासित जीवनशैली और सकारात्मक सोच आज क्षेत्रभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। Bhattu Kalan

    मीरा देवी, स्व. बिहारी लाल बरतानिया की धर्मपत्नी हैं। उनका जन्म संवत 1982 में गांव ढुकड़ा निवासी पं. नानक राम शर्मा के परिवार में हुआ। उनके पति भारतीय सेना में कुक के रूप में सेवाएं देने के साथ-साथ आजाद हिंद फौज के सिपाही भी रहे। आजादी के बाद वे बिना पेंशन के घर लौट आए और सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत किया। वर्ष 1998 में उनके निधन के पश्चात भी मीरा देवी ने साहस, आत्मबल और धैर्य के साथ जीवन को आगे बढ़ाया।

    मीरा देवी छह पुत्रों और तीन पुत्रियों की माता हैं। उनकी पुत्रियां- स्व. सुमित्रा देवी, ओम देवी और कृष्णा देवी भी संस्कारों से परिपूर्ण जीवन जीती रहीं। परिवार में पोते-पोतियां, दोहते-दोहती और पड़पोते-पड़पोतियों की बड़ी संख्या है, जो उन्हें सम्मान और स्नेह के साथ संभालते हैं। वर्तमान में वे अपने पुत्र राजेन्द्र कुमार (70) के साथ निवास कर रही हैं। उनके जुड़वां पौत्र मन्दीप कुमार और मंजीत कुमार तथा उनकी पत्नियां भी दादी की सेवा को अपना कर्तव्य मानती हैं।

    मीरा देवी का जीवन यह सिखाता है कि लंबी उम्र का रहस्य दवाइयों में नहीं, बल्कि सादगी, श्रम, संतुलित आहार और सकारात्मक सोच में छिपा है। उनका जीवन आज की युवा पीढ़ी ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक जीवंत प्रेरणा है।

    100 वर्ष की आयु में भी पूरी तरह सक्रिय | Bhattu Kalan

    आज 100 वर्ष की उम्र में भी मीरा देवी पूर्णत: स्वस्थ हैं। वे अपनी दैनिक दिनचर्या स्वयं निभाती हैं- नहाना-कपड़े धोना, छोटे घरेलू श्रमसाध्य कार्य आज भी नियमित रूप से करती हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि अनुशासन और श्रम से बढ़ती उम्र भी बाधा नहीं बनती।

    सादा खान-पान और संयमित जीवनशैली

    उनका खान-पान अत्यंत सादा और संतुलित है। वे केवल घर का बना भोजन ग्रहण करती हैं, दिन में दो बार भोजन और दो-तीन बार चाय लेती हैं। न उन्हें अधिक मसालेदार भोजन पसंद है और न ही अत्यधिक मीठा। स्वभाव से वे शांत, संयमी और सरल हैं। उनकी स्मरण शक्ति आज भी प्रखर है और वे बचपन की अनेक घटनाओं को स्पष्ट रूप से याद कर लेती हैं।

    मीरा देवी के 100वें जन्मदिवस के अवसर पर क्षेत्र में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। गांव भट्टू, सदलपुर, आदमपुर, चूली बागड़ियान, दड़ौली, मोडाखेड़ा, मोहब्बतपुर, ढाणी मोहब्बतपुर, किशनगढ़, खारा बरवाला, चूली कलां सहित अनेक गांवों से लगभग एक हजार लोग इस आयोजन में शामिल हुए।

    इस अवसर पर मोहिंदर सिंह (रिटायर्ड अंग्रेजी प्रवक्ता), खंड शिक्षा अधिकारी जाखल सुभाषचंद्र भांभू, असरावां के प्राचार्य राधेश्याम, बांडाहेड़ी के डीपीई रामकुमार, दड़ौली के सरपंच मनोज कुमार डूडी, पूर्व सरपंच राजबीर हुड्डा, भट्टू कॉलेज के भूगोल प्रवक्ता मदन लाल बिश्नोई, समाजसेवी जीत भदरेचा, अनूप मांजु, प्राचार्या शकुंतला खीचड़, गोरा सिंह कैप्टन (रिटायर्ड), सुखबीर डूडी (पूर्व चेयरमैन मार्केट कमेटी आदमपुर मंडी) सहित अनेक शिक्षाविद्, समाजसेवी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। Bhattu Kalan