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    शिशु के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम आहार

    Child-Care

    जीवन के शुरूआती दिनों में अच्छा पोषण बच्चे की बढ़ोतरी और विकास के लिए महत्वपूर्ण है और इसका बच्चे के स्वास्थ्य पर बहुत अधिक समय तक गहरा प्रभाव पड़ता है। बच्चे को सही तरीके से अच्छा आहार खिलाना बहुत जरूरी है। आज आपको सच कहूँ बताएंगा की आप अपने छोटे बच्चों को संतुलित आहार के रूप में उनको क्या-क्या खिला सकते हैं।

    Child

    बच्चों को आहार खिलाने का सही तरीका

    पहले 6 महीनों के दौरान दूध शिशुओं के लिए पोषण का एकमात्र स्रोत होता है। मां का दूध बच्चे के लिए जरूरी पोषक तत्वों और अन्य जैवसक्रिय पदार्थों की पूरी श्रेणी उपलब्ध कराता है। जिन बच्चों को मां का दूध नहीं पिलाया जाता, उन बच्चों के माता-पिता को बच्चे को उसकी जरूरत के अनुसार शिशु फार्मूले का सेवन कराना चाहिए। 6 से 24 माह, इस अवधि के दौरान शिशु केवल दूध के आहार की अपेक्षा वयस्कों वाले विभिन्न प्रकार के आहार खाना शुरू कर देता है। इस दौरान शिशु खाने के लिए दूसरे पर निर्भर रहने की अपेक्षा अपने आप कप और चम्मच से खाना शुरू कर देता है।

    माता-पिता को लगभग 6 माह की आयु के आसपास शिशु को ठोस आहार खिलाना शुरू कर देना चाहिए। शिशु के लिए परिवार के भोजन जैसे अनाज, सब्जियों, फल और बीन से ही पोषक शिशु आहार तैयार किया जा सकता है। शिशु को गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां मुहैया कराकर आयरन की मात्रा का सेवन कराना सुनिश्चित करें। बच्चे को विभिन्न स्वाद, बनावट और रंग वाले आहार खिलाने चाहिए। इससे बच्चे को आहार के बारे में जानने, भोजन का आनंद लेने और खाने की अच्छी आदतें विकसित करने में मदद मिलती है।

    2 से 5 वर्ष: परिवार के साथ भोजन का लुत्फ उठाना

    इस आयु तक पहुंचने पर बच्चे को परिवार के साथ भोजन करना शुरू कर देना चाहिए। आपस में मिलकर संतुलित भोजन खाने के साथ-साथ, बच्चे माता-पिता की खाने संबंधी अच्छी आदतें भी अपनाने लगते हैं। परिवार का भोजन करने का समय उन्हें परिवार की दिनचर्या को समझने और माता-पिता और बच्चे के बीच बातचीत को बढ़ाने में मददगार होता है।

    जिन बच्चों को स्तनपान नहीं कराया जाता है, उनको दे फार्मूला दूध

    12 माह से कम आयु के बच्चों के लिए मां के दूध के अलावा शिशु फार्मूले का दूध अच्छा होता है। एक वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए गाय का दूध ठीक नहीं होता। 1 साल की आयु के बच्चे गाय का पूरी चिकनाई वाला दूध पी सकते हैं अथवा पूरी चिकनाई वाले दूध के पाउडर का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिन बच्चों की आयु 2 वर्ष अथवा उससे अधिक है, उनके लिए कम चिकनाई वाला दूध ठीक होता है। जिन बच्चों को गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन से एलर्जी होती है, उन्हें विशेष फार्मूला दूध की आवश्यकता होती है। माता-पिता को अपने बच्चों को विशेष फार्मूला दूध पिलाना शुरू करने से पहले चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए।

    1 साल के बच्चे को दे सकते हैं दूध से बने उत्पाद

    विभिन्न प्रकार के भोजनों से युक्त आहार के एक भाग के रूप में 1 से 5 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 360 से 480 ग्राम दूध उसकी पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा करने के लिए उचित होता है। दिन में 2 से 4 बार नाश्ते के समय और स्नैक्स के साथ छोटे कप में दूध देना चाहिए। आप बच्चे को विकल्प के तौर पर दूध से बने उत्पाद भी दे सकते हैं। दूध कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों का एक अच्छा स्रोत है। हालांकि, यदि कोई बच्चा बहुत अधिक दूध पीता है, तो इससे उसकी अन्य पोषक आहारों की भूख कम हो जाएगी और उसके लिए खाने की स्वास्थवर्धक आदतें अपनाना मुश्किल हो जाएगा। टोफू, कैल्शियम संवर्धित सोया दूध अथवा गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम से प्रचूर आहार हैं। यदि बच्चा इन आहारों का प्रतिदिन और पर्याप्त मात्रा में सेवन करता है, तो उसे अपनी कैल्शियम संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए दूध की कम मात्रा की जरूरत होती है।

    बच्चे को 18 माह के बाद बोतल से दूध पिलाना बंद कर दे

    18 माह की आयु होने तक बच्चे को बोतल से दूध पीना बंद कर देना चाहिए। बोतल का लगातार प्रयोग करने वाले बच्चों के दांतों में जल्दी कीड़ा लगने की संभावना होती है। उनके मोटे होने की संभावना अधिक रहती है। वे दूध अधिक पीते हैं और अन्य आहारों में उनकी रुचि कम होती है। अपने शिशु को 8 से 9 माह की आयु में एक प्रशिक्षण कप प्रदान करें और पीने में उसकी मदद करें। बाद में वह नली (पाईप) की मदद से भी पी सकता है। अधिकतर बच्चे 1 वर्ष की आयु होने तक प्रशिक्षण कप से दूध पी सकते हैं। शिशु के पहले जन्मदिन के बाद उसे बोतल से दूध पीना छुड़ाना शुरू कर दें।

    यदि बच्चा भोजन में निकाले मीन-मेख तो अपनाएं पिकी ईटर फार्मूला दूध

    तथाकथित पिकी ईटर फार्मूला दूध में विभिन्न विटामिन, मिनरल अथवा चिकनाई वाले एसिड आदि मिले हुए होते हैं। ये सभी पोषक तत्व उस भोजन में मौजूद होते हैं, जिसे हम सामान्य तौर पर खाते हैं। इसके विपरीत, दैनिक आहार में पाए जाने वाले सभी लाभदायक पदार्थ फार्मूला दूध में नहीं पाए जाते। इन भोजनों में ऊर्जा की मात्रा और मीठे का स्तर नियमित फार्मूला दूध अथवा गाय के पूरी चिकनाई वाले दूध की अपेक्षा अधिक होता है। यदि बच्चे किसी समूह विशेष के आहार को खाने से लगातार मना करते हैं, तो उन्हें पर्याप्त पोषक तत्व प्राप्त नहीं होने का जोखिम रहता है। पूरक आहार के रूप में गाय के दूध की अपेक्षा नियमित फार्मूला दूध दिया जाना चाहिए। दूध पीने की मात्रा को एक दिन में 480 मिली. से कम रखना बहुत जरूरी है। अपने बच्चे को विभिन्न प्रकार का आहार मुहैया कराकर, भोजन के समय विभिन्न प्रकार के व्यंजन मुहैया कराकर, आहार के बारे में सीखने में उसकी मदद करें, खाने में मीन-मेख निकालने से निपटने में उसकी मदद करने के लिए उसके साथ भोजन खाना जरूरी है। यदि माता-पिता को अपने बच्चे के आहार और विकास को लेकर कोई चिंता है, तो वे चिकित्सीय सलाह ले सकते हैं।

    जेनिवा में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में डॉ. टेड्रोस ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस मुद्दे पर स्टडी किया है और पाया है कि वायरस संक्रमण के जोखिम की तुलना में बच्चे के लिए स्तनपान के फायदे अधिक हैं। डॉक्टर टेड्रोस ने कहा, “हम ये जानते हैं कि बड़ों के मुकाबले बच्चों में कोविड-19 का जोखिम कम होता है, लेकिन दूसरी ऐसी कई बीमारियां हैं जिससे बच्चों को अधिक खतरा हो सकता है और स्तनपान से ऐसी बीमारियों को रोका जा सकता है। मौजूदा प्रमाण के आधार पर संगठन ये सलाह देता है कि वायरस संक्रमण के जोखिम से स्तनपान के फायदे अधिक हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन में रिप्रोडक्टिव हेल्थ मामलों के सलाहकार डॉ. अंशु बनर्जी ने कहा है, अब तक हम मां के दूध यानी ब्रेस्टमिल्क में किसी लाइव वायरस का पता नहीं लगा पाए है। कई मामले हैं, जिनमें ब्रेस्टमिल्क में वायरस के आरएनए के टुकड़े पाए गए हैं (कोरोना वायरस आरएनए यानी एक प्रोटीन मॉलीक्यूल से बना है) लेकिन अब तक हमें असल में ब्रेस्टमिल्क में कोई लाइव वायरस नहीं मिला है। इस कारण मां से बच्चे में कोरोना संक्रमण फैलने का जोखिम साबित नहीं किया जा सका है।

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