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Saturday, February 28, 2026
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    शाह सतनाम जी अनामी सुख आश्रम कोटड़ा में संगत का कमाल, ऐसे मनाया अवतार माह

    नामचर्चा के दौरान 25 बच्चो को गर्म कपड़े वितरित किए गए

    कोटड़ा (उदयपुर)। सच्चे दाता रहबर, मुर्शिद-ए-कामिल पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज के पावन अवतार माह की खुशी में कड़ाके की ठंड के बीच शाह सतनाम जी अनामी सुख आश्रम कोटड़ा जिला उदयपुर राजस्थान नामचर्चा में आई साध-संगत ने मानवता भलाई के कार्य किए। इस अवसर पर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन सन्निध्य में चलाए जा रहे 147 मानवता भलाई कार्यों के तहत 25 जरूरतमंद को गर्म कपड़े वितरित किए गए। जिससे बच्चों के चेहरों पर मुस्कान खिल उठी।

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    सच्चे सौदे का मकसद क्या है?

    पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि सच्चे सौदे का मकसद क्या है? सच्चा, ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम है। वो सच था, सच है और सच रहेगा। वो ना बदला था, ना बदला है, ना कभी बदलेगा, जिसे ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड कहा जाता है। तो सच्चा तो हो गया परमात्मा। सौदा, बिजनेस, व्यापार, कौन सा सौदा? सौदे से लगता है सौदेबाजी चलती है, जी हाँ, जहां चलती है कौन सी सौदेबाजी, आप अपने बुरे कर्म ले आओ, अपनी बुरी आदतें ले आओ, वो जो आप नशे के आदी हो गए हैं, अपने पाप गुनाह ले आओ और ओउम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु की कृपा से, शाह सतनाम, शाह मस्तान जी की कृपा से यहां दे जाओ, बदले में अनमोल राम का नाम, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड का नाम ले जाओ।

    जो घर में बैठकर जितना जाप करते रहोगे, जितना उसे लगाते रहोगे दिलोदिमाग, रूह पर उतना ही चेहरे पर नूर आएगा, घर में बरकतें आएंगी, बिजनेस व्यापार, जो भी काम-धंधा आप करते हैं, उनमें आपको और तरक्कियां हासिल होंगी। तो ये है सच्चा सौदा। यहां पर ओर चढ़ावा नहीं, ये चढ़ावे चढ़ते हैं। क्या कोई पैसे की बात नहीं होती? जी बिल्कुल होती है, प्रेरित किया जाता है सच्चा दान करने के लिए, सच्चा दान कौन सा है? क्योंकि हमारे सभी धर्मों में दान निकालने की प्रथा है। कोई तीसरा, कोई सातवां, कोई दसवां, कोई पन्द्रहवां निकालने की चर्चा करते हैं हमारे संत-पीर, पैगम्बर, गुरु साहिबान, महापुरुष और उन्होंने सही कहा, सच कहा।

    समय के अनुसार रेशो (अनुपात) कम-ज्यादा होता रहा, लेकिन वो सच है। 100 में से एक रुपया निकालो, 10 निकालो, 15 निकालो, 20 निकालो, जितना आप निकाल सकते हो। उसको निकालो और अपने घर में रख लो। या तो कोई संत सतगुरु पूर्ण हो, वो कहे फलां जगह लगाओ, वो कहां लगवाता है? बेसहारों का आसरा बनवाओ। दीन-दुखियों का इलाज करवाओ, जो पढ़ नहीं पा रहे दुनियावीं ज्ञान के साथ-साथ उन्हें राम के नाम से जोड़ो, नशेड़ियों का नशा छुड़वाओ, ऐसी जगह बनाओ जहां आकर लोग राम-नाम गा सकें। इस दौरान ट्रैफिक, पेयजल, लंगर-भोजन सहित सभी समितियों के सेवादारों ने अपनी ड्यूटियों को बखूबी निभाया।

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