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Saturday, February 7, 2026
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    पड़ौसी राज्यों से आ रही लकड़ी ने गिराए दाम

    • दुविधा। एशिया की सबसे बड़ी लक्कड़मंडी जगाधरी में 20 दिन से जारी है हड़ताल, कौड़ियों के भाव लकड़ी बेच रहे किसान
    • हरियाणा के किसानों की बढ़ी परेशानियां
    • धड़ल्ले से बिक रहा अन्य राज्यों से आया पॉपुलर-सफेदा
    • 50 से 70 फीसदी तक टूटे दाम

    ChandiGarh, Anil Kakkar: बाहरी राज्यों से आ रहे पॉपुलर-सफेदे के कारण औंधे मुंह गिरे लकड़ी के दामों ने प्रदेश के किसानों की चिंताए बढ़ा दी हैं वहीं दाम बढ़ाने की मांग को लेकर लगभग 20 दिन से एशिया की सबसे बड़ी लक्कड़ मण्डी यमुनानगर-जगाधरी, हड़ताल के कारण बंद पड़ी है। विपक्ष ने सरकार पर किसानों, मजदूरो, आढ़तियों, प्लाईबोर्ड उद्यमियों और व्यापारियों की तरफ ध्यान न देने का आरोप लगाया है। इस मामले में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार से लकड़ी के दाम बढ़ाने तथा यमुनानगर तथा जगाधरी में प्लाईवुड उद्योग लगाने के लिए लाइसेंस देने की मांग की है।
    बता दें कि पड़ोसी राज्यों पंजाब, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश से भारी मात्रा में पॉपुलर-सफेदा यमुनानगर तथा जगाधरी के मंडियों में लाकर बेचा जाता है। इस बार सप्लाई ज्यादा होने की वजह से लकड़ी के दाम 50 से 70 फीसदी तक टूट गए हैं जिससे किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। मिली जानकारी के अनुसार पॉपुलर-सफेदा जो कि पहले 800 रुपए प्रति क्विंटल (18 इंच), 1000 रुपए (18 से 24 इंच) तथा 1300 रुपए (24 इंच से ज्यादा) बिक रहा था अब क्रमश: 200, 350 तथा 400 रुपए पर बिक रहा है।

    दूसरे राज्यों से आई लकड़ी ने ही गिराए दाम
    दाम गिरने का कारण दूसरे राज्यों से सप्लाई ज्यादा होना है। वहीं उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार प्लाईवुड उद्योग के लिए लाइसेंस उपलब्ध नहीं करवा रही जिससे किसान अपना माल कौड़ियों के भाव बेचने को मजबूर हैं। यहां 400 के करीब प्लावुड उद्योग युनिट्स हैं परंतु प्रदेश में जितना पॉपुलर तथा सफेदे का उत्पादन हो रहा है उससे दो-तीन गुणा ज्यादा यहां बाहरी राज्यों से आकर बिकता है। जिस कारण खपत कम हो जाती है और माल सस्ता हो जाता है।
    संदीप राणा,डायरैक्टर
    पॉपुलर कमिशन एजेंट्स यूनियन

    नए लाइसेंस का प्रस्ताव लागू करे सरकार
    दिनांक 10 नवम्बर 2016 को हरियाणा की एस.एल.सी. द्वारा 425 पुराने लाईसैन्स और 509 नये लाईसैन्स देने का प्रस्ताव पास किया लेकिन अभी तक इस बारे कोई भी गाईडलाईन जारी नहीं की गई यानि कि नई इकाई लगाने की अनुमति देने की प्रक्रिया प्रारम्भ नहीं की जो कि एक किसान हितैषी कदम नहीं है। इसलिए सरकार को चाहिए कि किसान को उचित भाव देने के लिए शीघ्र अति शीघ्र हरियाणा में पापुलर-सफेदा अधारित प्लाईबोर्ड इकाईयां की स्थापना हेतु कार्यवाही करनी चाहिए क्योंकि इनके कम भाव ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है।

    हुड्डा का आरोप, 400 रुपए से भी कम में बिक रहा पॉपुलर-सफेदा
    पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि किसानों की यह अनदेखी समझ से बाहर है क्योंकि जो पॉपुलर-सफेदा पहले 1000 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक बिकता था वह अब 400 रुपए से भी कम भाव में बिक रहा है और प्रदेश में पिछले 10 वर्षों से अधिक से कोई प्लाईवुड उद्योग नहीं लगा क्योंकि 2002 में सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी और सभी अधिकार सी.ई.सी. को दे दिए थे। इसके उपरांत 5 अक्तूबर 2015 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हर राज्य में एस.एल.सी. (स्टेट लेवल कमेटी) बना दी थी और हर राज्य को लकड़ी की उपलब्धता के अनुसार नये उद्योग स्थापित करने का अधिकार दे दिया था लेकिन एक साल से अधिक हो गया है सर्वोच्च न्यायालय के आदेश आए, लेकिन सरकार ने अभी तक किसी भी नये उद्यमी को लाईसैन्स नहीं दिया है जबकि सैंकड़ो लाईसैन्स आज भी पुराने अन-ईशुड पड़े हैं और लकड़ी की आमद पहले से कहीं ज्यादा हो गई है। हाल ही में वन विभाग हरियाणा द्वारा जो लकड़ी की आमद का सर्वे करवाया गया है उसमें अढ़ाई लाख क्विंटल लकड़ी प्रतिदिन लक्कड़ मण्डियों में आती है और लकड़ी की अधिकता के कारण ही पापुलर-सफेदा के भाव बहुत ज्यादा कम हैं लेकिन हरियाणा सरकार व वन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

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