Noida Student Death Case: नोएडा। नोएडा के एक निर्माणाधीन क्षेत्र में जलभराव से जुड़े हादसे में छात्र हर्षित भट्ट की मृत्यु ने प्रशासनिक सतर्कता और निर्माण स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। घटना उस स्थान पर हुई, जहां लंबे समय से अधूरा पड़ा निर्माण कार्य और खुले गहरे गड्ढों में भरा पानी स्थानीय लोगों के लिए जोखिम का कारण बना हुआ था। Noida News
बताया जा रहा है कि संबंधित भूमि को पूर्व में हैबिटेट सेंटर परियोजना के निर्माण हेतु नोएडा ऑथोरिटी द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम को उपलब्ध कराया गया था। हालांकि परियोजना का कार्य काफी समय से रुका हुआ था और स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित नहीं किए जा सके थे, जिसके कारण यह क्षेत्र दुर्घटनाओं के लिए संवेदनशील बन गया।
सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के बावजूद ऐसी गंभीर घटना कैसे घटित हो गई?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, निर्माण स्थल के आसपास चेतावनी संकेत, बैरिकेडिंग तथा निगरानी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से नहीं थीं। यह भी प्रश्न उठाया जा रहा है कि सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के बावजूद ऐसी गंभीर घटना कैसे घटित हो गई। Noida News
इस मामले की पृष्ठभूमि में भूमि स्वामित्व से संबंधित विवाद भी सामने आया है। वर्ष 2022 से इस भूमि से जुड़ा विषय मध्यस्थता प्रक्रिया में विचाराधीन बताया जा रहा है। इसी दौरान पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी ऋतु माहेश्वरी द्वारा प्राधिकरण की 205वीं बोर्ड बैठक में निर्माण निगम के साथ किया गया अनुबंध निरस्त करने का निर्णय लिया गया था तथा परियोजना को सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत विकसित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया था।
इसके बावजूद भूमि का वास्तविक नियंत्रण लंबे समय तक निर्माण निगम के पास बना रहने से स्थिति और जटिल होती चली गई। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे संभावित जोखिम वाले स्थलों को शीघ्र सुरक्षित बनाया जाए तथा जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। Noida News















