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Monday, March 30, 2026
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    Nitish Kumar Resigns: नीतीश कुमार ने दिया इस्तीफा, छोड़ी बिहार विधान परिषद की सदस्यता

    Nitish Kumar
    Nitish Kumar

    Nitish Kumar Resigns: पटना। नीतीश कुमार ने राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया। यह निर्णय संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है, जिसके तहत एक व्यक्ति एक साथ दोनों सदनों की सदस्यता नहीं रख सकता। विजय कुमार चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री पहले ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किए जा चुके थे, इसलिए परिषद की सदस्यता छोड़ना आवश्यक था। उनके त्यागपत्र से संबंधित पत्र परिषद सचिवालय को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके बाद आगे की औपचारिक कार्यवाही प्रारंभ की गई। Nitish Kumar

    मुख्यमंत्री के इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं। हालांकि अभी तक उनके मुख्यमंत्री पद से जुड़े किसी निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वे वर्ष 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे थे और 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद से ही परिषद की सदस्यता छोड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही थी।

    नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर वर्ष 1985 में हरनौत विधानसभा क्षेत्र से प्रारंभ हुआ

    राजनीतिक जीवन की दृष्टि से नीतीश कुमार उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों की सदस्यता ग्रहण की है। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान यह संकेत दिया था कि वे उच्च सदन के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी नई भूमिका निभाना चाहते हैं। उनका राजनीतिक सफर वर्ष 1985 में हरनौत विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने के साथ प्रारंभ हुआ। इसके बाद वर्ष 1989 में वे लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और आगे चलकर राज्य तथा केंद्र—दोनों स्तरों पर महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। अब वे पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी नई संसदीय पारी आरंभ करने जा रहे हैं और 10 अप्रैल को औपचारिक रूप से सदस्यता ग्रहण करने की संभावना जताई जा रही है।

    केंद्रीय मंत्रिमंडल में उन्होंने रेल तथा कृषि मंत्रालय जैसे प्रमुख विभागों का दायित्व संभाला और रेल सेवाओं में कई सुधारात्मक पहल कीं। वर्ष 2005 से वे बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं और प्रशासनिक सुधारों तथा सामाजिक योजनाओं के कारण उन्हें “सुशासन” आधारित नेतृत्व के लिए व्यापक पहचान मिली है। उनके कार्यकाल में लागू कई जनकल्याणकारी योजनाएँ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनीं। Nitish Kumar