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Friday, April 10, 2026
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    Aadhaar Card News: ”अब बड़ों का आधार बनाने की कोई जरूरत नहीं”

    Aadhaar Card News

    आधार कार्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई ये बड़ी जनहित याचिका

    Aadhaar Card Plea: नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि भारत में आधार बनवाने की प्रक्रिया केवल छह साल तक के बच्चों तक ही सीमित हो। उनका कहना है कि अब बड़ों का आधार बनाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि भारत में पहले ही 144 करोड़ यानी 99 प्रतिशत लोगों के आधार बन चुके हैं।  याचिका में यह भी बताया गया कि अब जो बड़ों का आधार बन रहा है, उसका फायदा कुछ विदेशी लोग उठा रहे हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और रोहिंग्या घुसपैठिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर जाकर पैसे देकर फर्जी आधार बनवा रहे हैं। इसके चलते देश में फर्जी दस्तावेजों की संख्या बढ़ रही है और यह सुरक्षा व जनसंख्या संतुलन के लिए भी खतरा है। Aadhaar Card News

    अश्विनी उपाध्याय ने यह भी कहा कि छह साल से ऊपर के लोगों के आधार के लिए अब तहसीलदार या एसडीएम के आॅफिस में ही आवेदन किया जाए। इससे सभी फर्जी आधार बनाने वालों पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। पहले भारत में आधार केवल तहसील पर बनता था, लेकिन अब सीएससी पर आधार बनवाने से इस प्रक्रिया में ढील और घुसपैठियों का फायदा हुआ है। याचिका में यह भी कहा गया है कि आधार, राशन कार्ड या अन्य दस्तावेज के लिए आवेदन करते समय व्यक्ति से एक अंडरटेकिंग ली जाए। इसमें व्यक्ति को लिखित रूप से कहना होगा कि उसने जो जानकारी दी है वह सही है और वह जानता है कि फर्जी दस्तावेज बनाना गंभीर अपराध है। इससे भविष्य में धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी।

    अश्विनी उपाध्याय ने यह भी मांग की है कि फर्जी दस्तावेज बनाने वालों को कॉन्करेंट सजा नहीं, बल्कि लगातार सजा दी जाए। भारत में वर्तमान में कनकरेन्ट सजा होती है, मतलब एक साथ सभी धाराओं की सजा शुरू हो जाती है और कुल सजा कम हो जाती है। उन्होंने सुझाव दिया है कि अगर पांच धाराएं हों, तो एक पूरी होने के बाद दूसरी शुरू हो, ताकि सजा का प्रभाव और डर लोगों में हो। याचिका में मांग की गई है कि सीएससी या तहसील में जहां भी आधार बनता है, वहां स्पष्ट रूप से डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाए। बोर्ड पर लिखा होना चाहिए कि फर्जी आधार बनाना और बनवाना गंभीर अपराध है और पकड़े जाने पर पांच साल की सजा हो सकती है। यह नियम राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और जन्म प्रमाण पत्र जैसे अन्य दस्तावेजों पर भी लागू किया जाए। Aadhaar Card News