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Wednesday, February 4, 2026
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    पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं, खरीदा जा रहा यूपी का गेहूँ

    Wheat

    प्रतापनगर मंडी में चल रही खरीद

    • हथिनीकुंड बार्डर से आ रहे गेहूं से लदे वाहन

    खिजराबाद। (सच कहूँ/राजेन्द्र कुमार) फसल का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होने के बाद गेहूँ खरीद के दावों के बीच उत्तर प्रदेश व हिमाचल से जमकर गेहूँ की खरीद प्रतापनगर (Khijarabad News) अनाजमंडी में की जा रही है। मंडी में गेहूँ खरीद का बड़ा हिस्सा बाहरी राज्य खास तौर पर उत्तर प्रदेश से आता है, जबकि बाहरी किसानों के लिए रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था नहीं है, फिर आखिर किस प्रकार यह गेहूँ खरीदा जा रहा है। दिनभर मंडी में गेहूँ से लदी उत्तर प्रदेश की ट्रैक्टर-ट्रालियां व अन्य वाहन बड़ी संख्या में देखे जा सकते हैं।

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    प्रतापनगर के अलावा छछरौली-खारवन मंडी में भी उत्तर प्रदेश का गेहूं बड़ी संख्या में आता है, हालांकि इसमें सबसे बड़ा हिस्सा प्रतापनगर मंडी में आता है। प्रदेश में सरकार ने एक पोर्टल बना रखा है, जिसमें रजिस्ट्रेशन के बाद गेट पास जारी होता है। उसके आधार पर ही फसल की खरीद की जाती है। इसके बावजूद दूसरे राज्यों की गेहूँ का एक बड़ा हिस्सा इन मंडियों में खरीदा जा रहा है। अब आखिर यह किसकी शह पर व कैसे हो रहा है? प्रतापनगर मंडी में किसी भी समय जाकर देखा जा सकता है कि अगर मंडी में गेहूँ से लदे 20 वाहन खड़े हैं तो उसमें 10 से अधिक यूपी के होंगे, यानी वह यूपी से गेहूँ लेकर आए होंगे।

    वहीं हथिनीकुंड बैराज से धड़ाधड़ गेहूँ से भरी ट्रालियां मंडी में आ रही है। ऐसे में पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन का क्या मतलब रह जाता है और अगर बाहर की गेहूँ की खरीद हो रही है तो वह किसके नाम से हो रही है। बाहरी राज्यों से आने वाले गेहूँ को यहां की अपेक्षा कम दामों पर खरीद कर कमीशन एजेंट्स अपने कमीशन के साथ सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेच कर दोनों हाथों से चांदी कूट रहे हैं।

    जांच का विषय किसके नाम से हो रही है खरीद

    मंडी में बाहरी राज्यों की गेहूँ की आखिर किसके नाम से खरीद हो रही है और उसका पैसा किसके खाते में जा रहा है। यह एक बड़ी जांच का विषय है, क्योंकि सरकार फसल का पैसा किसान के खाते में डाल रही है और बाहरी राज्य के किसान का प्रदेश के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है तो फिर यह खरीद किसके खाते में हो रही है व उसका पैसा बाहरी राज्य के किसान तक कैसे पहुंच रहा है? वहीं इस बारे में जब छछरौली के मार्किट कमेटी के सचिव उमेश से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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