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Saturday, February 7, 2026
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    Land-Aadhaar Link: अब कोई दबंग नहीं हड़प सकेंगा आपकी जमीन, सरकार ने लागू किया ये नियम, भूमि का भी बनेगा भू-आधार

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    Land-Aadhaar Link: अब कोई दबंग नहीं हड़प सकेंगा आपकी जमीन, सरकार ने लागू किया ये नियम, भूमि का भी बनेगा भू-आधार

    Land Property Linked With Aadhaar Card: अनु सैनी। क्या आपने भी दूसरे शहर में जमीन खरीद कर रखी है? क्या आपको भी यह चिंता सता रही है की कही कोई आपकी उस भूमि पर कब्जा न कर लें? तो अब आपको इस बात की कोई चिंता नहीं करनी हैं क्योंकि सरकार ने एक नया कानून लागू कर दिया है, जिसमें जमीन का भी आधार कार्ड बनेगा अब भूमि को 14 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान किया जायेगा, जिसे भू-आधार ULPIN कहा जता हैं, इस भू आधार के लागू होने पर जमीन पर मालिक का हक स्पष्ट होगा और जमीन संबंधी विवाद खत्म होंगे, इसमें किसी भी जमीन पर कब्जा करने की समस्या खत्म हो जाएगी। Land-Aadhaar Link

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    बता दें कि यह नया आदेश केंद्र सरकार ने बजट में पेश किया हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में भूमि संबंधी सुधारों पर निर्मला सीता रमन ने घोषणा की है की ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के लिए विशिष्ट पहचान संख्या या भू आधार और शहरी भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण का प्रस्ताव रखा हैं, भू-आधार से जमीन पर मालिक का हक स्पष्ट होगा और भूमि से जुड़े विवाद खत्म होंगे, भूमि का भू-आधार के नाम से कार्ड बनाया जाएगा, जिससे उसकी पहचान आसानी से कर सकते हैं।

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    दरअसल इस योजना का उल्लेख वित्त वर्ष के बजट में किया गया हैं, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में सभी भूमि भूखंडों के लिए विशिष्ट पहचान संख्या प्रदा करने की घोषणा की गई हैं, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भूमि संबंधी सुधार एक कार्यवाई में भूमि प्रशासन, योजना, प्रबंधन एवं शहरी नियोजन, उपयोग, भवन उपनियम शामिल होंगे, इस योदना के अंतर्गत बनने वाले कार्ड को भू आधार का नाम दिया गया हैं। सरकार द्वारा किए जाने वाले भू-आधार की प्रक्रिया जिसमें शहरी भूमि अभिलेख का डिजिटलीकरण 2027 तक पूरा करने का प्रयास किया जायेगा, यानि की वित्तीय सहायता के माध्यम से आने वाले 3 वर्ष की अंदर भू-आधार कार्ड का कार्य राज्य सरकार की सहायता से किया जाएगा, यह नियम ग्रामीण और शहरी दोनों के लिए लागू किया जाता हैं।

    भू आधार कैसे काम करता हैं? Land-Aadhaar Link

    सबसे पहले तो भूमि को जीपीएस तकनीक का प्रयोग करके जियोटैग किया जाएगा, जिसकी सहायता से भूखंड का सटीक भौगोलिक स्थिति की पहचान कर सकते हैं, इसके बाद भूखंड की सीमाओं का भौतिक सत्यापन और माप करते है फिर भूखंड के लिए भूमि मालिक का नाम, उपयोग श्रेणी, क्षेत्र आदि विवरण एकत्रित किया जाता हैं, फिर सभी जानकारी भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली में दर्ज करना होगा, सिस्टम स्वचालित के अनुसार भूखंड के लिए 14 अंक का भू-आधार संख्या तैयार करेगा, जो डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ा होता हैं।

    भू आधार कार्ड में राज्य कोड, जिला कोड, उप जिला कोड, गांव कोड, भूखंड की विशिष्ट आईडी संख्या आदि होते हैं, भू आधार संख्या को डिजिटल और भौतिक भूमि रिकॉर्ड दस्तावेज पर अंकित होता हैं।

    भू-आधार से जुड़ी मुख्य बिंदू

    यह मानचित्रण और मैप की सहायता से सटीक भूमि की जानकारी प्रदान करता हैं और भूखंड पहचान में अस्पष्ट दूर होती हैं, भूमि से जुड़ी विवाद के कारण आधार कार्ड से लिंक होने पर भूमि अभिलेख एक ऑनलाइन पहुंचना सक्षम होता है। सबसे बड़ी बात इसकी सहायता से सरकार को सटीक भूमि डाटा मिलेगा।

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