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Friday, April 10, 2026
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    Iran-US Ceasefire: ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद तेल की कीमतें हुई कम, पाकिस्तान ने दिया ‘इस्लामाबाद वार्ता’ का न्योता

    Iran-US Ceasefire
    Iran-US Ceasefire: ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद तेल की कीमतें हुई कम, पाकिस्तान ने दिया 'इस्लामाबाद वार्ता' का न्योता

    Oil prices fell: वॉशिंगटन। वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उस समय उल्लेखनीय नरमी देखने को मिली जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के विरुद्ध प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को दो सप्ताह के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इस निर्णय से खाड़ी क्षेत्र में संभावित बड़े सैन्य टकराव की आशंकाएं घट गईं, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गए, जिससे हाल के सप्ताहों की तेजी पर विराम लग गया। यह तेजी मुख्यतः Strait of Hormuz के आसपास कई सप्ताह से बने तनाव के कारण उत्पन्न हुई थी। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसके माध्यम से विश्व के कुल तेल परिवहन का बड़ा भाग संचालित होता है। Iran-US Ceasefire

    उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दोनों देशों के प्रतिनिधियों को इस्लामाबाद आने का न्योता दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी उम्मीद है कि ‘इस्लामाबाद वार्ता’ स्थायी शांति प्राप्त करने में सफल होगी। अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते के लिए युद्धविराम की आपसी सहमति के बाद आधिकारिक रूप से सीजफायर की घोषणा कर चुके हैं। इसमें पाकिस्तान बिचौलिए की भूमिका निभा रहा है।

    युद्धविराम की घोषणा के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में सकारात्मक संकेत देखने को मिले

    द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि Tehran जलडमरूमध्य में नौवहन गतिविधियों को पूर्ण रूप से सामान्य करता है, तो सैन्य कार्रवाई को टालने की संभावना बनी रह सकती है। इस घोषणा के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में सकारात्मक संकेत देखने को मिले और प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों से जुड़े वायदा अनुबंधों में दो प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताहों से ईरान द्वारा इस मार्ग में आंशिक प्रतिबंध लगाए जाने की खबरों के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो गया था और व्यापारिक गतिविधियों पर दबाव बना हुआ था। Iran-US Ceasefire

    हालांकि, संभावित युद्धविराम की घोषणा के बाद एशियाई बाजारों में भी उत्साह दिखाई दिया। जापान का निक्केई सूचकांक तथा साउथ कोरिया का कोस्पी सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होने का संकेत मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों के एक वर्ग ने पहले ही यह अनुमान लगाया था कि ट्रंप प्रशासन कूटनीतिक दबाव की रणनीति अपनाते हुए सैन्य कार्रवाई की समयसीमा आगे बढ़ा सकता है। इसी संभावना के आधार पर बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बनी रही।

    स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं कही जा सकती

    इसके बावजूद विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि स्थिति अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं कही जा सकती। प्रस्तावित दो सप्ताह की अवधि इस बात पर निर्भर करेगी कि जलमार्ग में आवाजाही पूरी तरह सामान्य रहती है और क्षेत्रीय तनाव में पुनः वृद्धि नहीं होती। इस दौरान मिसाइल एवं ड्रोन गतिविधियों की छिटपुट सूचनाएं सामने आने से निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज विश्व के सबसे संवेदनशील ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा का प्रभाव तत्काल वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए खाड़ी क्षेत्र की परिस्थितियां विशेष महत्व रखती हैं। तेल की कीमतों में निरंतर उतार-चढ़ाव का असर महंगाई दर, मुद्रा स्थिरता तथा समग्र आर्थिक विकास पर पड़ सकता है। ऐसे में आगामी दो सप्ताह की कूटनीतिक गतिविधियां वैश्विक ऊर्जा बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। Iran-US Ceasefire