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    अज्ञात सूत्रों पर फिर हंसी साध-संगत

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    बरनावा। सत्संग कार्यक्रम के दौरान पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि हमने बहुत सारी ििचयों में लिख था कि गुरु हम थे, हम है और हम ही रहेंगे। 100 प्रतिशत, 1000 प्रतिशत, लाख परसेंट, चाहे लाखों बार कहलवा लो हम थे, हम है और हम ही रहेंगे। पता नहीं कुछ दिनों बाद क्या खाज उठती है, फिर शुरू हो जाते है, फिर खाज उठती है और फिर शुरू हो जाते है। कहते है कि हमे सूत्रों से पता। हमें आज तक ये सूत्र नहीं पता चले कि कहां रहता है ये सूत्र नाम का प्राणी। हमने काफी ढूंढ़ा, ये अज्ञात सूत्र होता किधर है। कमाल है सिर्फ उन्हें लिखना ही है कि अज्ञात सूत्रों से जानकारी मिली। बुरा ना मानना हमारे चौथे स्तंभ। क्योंकि हमारे से जो मुंह में बात आ जाती है वो रहती नहीं, निकल जाती है। हमने अपनी हैंडराइटिंग से सभी ििचयों से भी लिख दिया और आज बोल दिया कि चाहे लाखों बार कहलवा लो, हम थे, हम है और हम ही रहेंगे और हमने अपनी साध-संगत को भी पिछली बार भी यह कसम दिलाई थी कि गुरु के समतुल्य समझना अपनी आशिकी को दाग लगवाना है और साध-संगत ने हमें वो तोहफा दिया था कि अपने गुरु पर 100 परसेंट यकीन करेंगे और उसके बराबर किसी को नहीं समझेंगे। आज भी साध-संगत ने अपने हाथ खड़े करके यह प्रण लिया।

    पूज्य गुरु जी ने कहा कि हनीप्रीत हमारी धर्म की बेटी है, मुख्य शिष्या है। यह हमने बोल भी दिया है। उनका हमने छोटा सा नाम

    रूह दी दे दिया। क्योंकि साध-संगत की मांग थी कि दीदी कहने से पता नहीं चलता कि वो किसे कह रहे है। इसलिए उनका नाम रूह दी यानि रूहानी दीदी रख दिया है। इसलिए वो थी, है और इससे भी ज्यादा वो खुशियां लेती रहेगी तथा साध-संगत के साथ मिलकर मानवता भलाई के कार्य करती है। लेकिन वो अपने पापा गुरु की बात सुनती है, फिर आगे बोलती है, वो अपने पास से तो कुछ कहती नहीं। लेकिन लोग कुछ न कुछ कहते रहते है, उन्हें इसका कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि वो हमारी बिटियां है और हमें पता है तथा साध-संगत की वो बहन है, उसका भी सभी को पता है। एक बच्चे बच्चे का पता है। इसलिए हमारा कहने का मतलब ये है कि हकीकत को हकीकत मानो।

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