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    संपादकीय : दोयम दर्जे का मंच बना ओटीटी

    OTT

    कोरोना महामारी ने हमें स्वास्थ्य प्रति सजग व जीवन जीना सिखाया, साथ ही मनोरंजन के साधनों के भी तौर-तरीके भी बिल्कुल बदल दिए। पिछले डेढ़ वर्ष के यदि मनोरंजन जगत के आँकड़े बोलते हैं कि ओवर द टॉप प्लेटफॉर्म यानी ओटीटी के दर्शक वर्ग में जबरदस्त इजाफा हुआ है। हालांकि ऐसा नहीं है कि डेढ़ वर्ष पूर्व ओटीटी प्लेटफॉर्म का कोई वजूद नहीं था लेकिन महामारी के कहर के चलते जब लोग अपने आपको घरों में कैद करने को मजबूर हो गए, फिल्मों की रिलीज पर रोक लग गई और सिनेमाघरों पर ताले लटक गए, तब ओटीटी प्लेटफॉर्म ही मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन बन कर उभरा। अब लोग फिल्म और सीरीज देखने नहीं बल्कि बिंज करने लगे। ओटीटी प्लेटफॉर्म मनोरंजन के रसिकों के लिए किसी परीलोक सरीखा था।

    जहां ना नए विषयों की कमी थी ना सेंसरशिप का कोई झंझट। दर्शकों ने भी इस नए प्लेटफॉर्म को हाथों-हाथ लिया। समय के साथ-साथ इसका दायरा बढ़ता गया। अमिताभ बच्चन से लेकर सलमान खान तक और अक्षय कुमार से लेकर अजय देवगन तक, हर किसी को इस कठिन समय में इस मंच ने संजीवनी दी। खैर, इन बड़े सितारों ने मजबूरी में अपनी फिल्मों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया। जाहिर है ओटीटी अब केवल खास लोगों के मनोरंजन का हिस्सा भर नहीं रहा अब ये आम जनमानस में भी सर्वस्वीकार्य है। दर्शकों के कुछ हटके देखने की भूख को डिजिटल प्लेटफॉर्म ने काफी हद तक शांत कर दिया है।

    युवा वर्ग पर तो इसका फितूर इस तरह चढ़ गया है कि वे अब सिनेमा घरों की तरफ मुंह ही नहीं कर रहे। नए विषयों पर बड़े चेहरों को लेकर दोयम दर्जे का कंटेंट बनाने के चक्कर में ये मंच अपनी विश्वसनीयता भी खो रहा है। ऐसे कई वेब सीरीज और वेब मूवी आईं जिनकी स्टार कास्ट और भव्यता पर तो बहुत ध्यान दिया गया, लेकिन कहानियों में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। सबसे ज्यादा निराश उन्ही फिल्मों और वेब सीरीज ने किया है जिनसे बॉलीवुड के बड़े-बड़े नाम जुड़े थे।

    चाहे सैफ अली खान अभिनीत और टाइगर जिंदा है के निर्देशक अब्बास अली जफर द्वारा निर्देशित सीरीज तांडव हो या फिर सदाबहार अभिनेत्री तब्बू का डिजिटल डेब्यू अ सूटेबल ब्वाय, मामला नाम बड़े और दर्शन छोटे का ही रहा। कुल मिलाकर दर्शकों को कुछ सफल वेब सीरीज के सीजन 1,सीजन 2 सीजन 3 के नाम पर भरमाया जा रहा है। और कभी-कभी ये सीजन 1-2 की नौटंकी भी खीज पैदा करती है। ऐसा लगता है कि ये कहानियों को विस्तार देने के लिए नहीं बल्कि सीरीज का नाम भुनाने की कवायद भर है। कुछ अधूरी शृंखलाओं के सीजन 2 तो आए ही नहीं। हालांकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इस मंच पर आज भी कुछ ऐसी अद्भुत रचनाएं देखने को मिल रहीं हैं जिन्हें रचने में मनोरंजन के पारंपरिक माध्यम अपेक्षाकृत नाकाम रहे हैं और ये रचनात्मकता ही वो कारण है जिसने दर्शकों को इस मंच की ओर आकर्षित किया था और अभी भी कर रही है।

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