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Saturday, February 7, 2026
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    weather : छाए बादल, हल्की बूंदाबांदी, कड़ाके की ठंड से मिली राहत

    IMD Alert Rain

     नए साल पर सर्दी के तेवर फिर तीखे होने के आसार

    हनुमानगढ़। पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से जारी कड़ाके की ठंड व शीतलहर से गुरुवार को दूसरे दिन भी कुछ राहत मिली। बुधवार को जहां कोहरा गायब रहा और दिनभर तल्ख धून खिली तो गुरुवार को मौसम विभाग के पूवार्नुमान के अनुसार बादल छाए रहे और सूर्य देवता बादलों की ओट में छिपे रहे। बुधवार रात्रि व गुरुवार को हल्की बूंदाबांदी हुई। इससे न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई और ठंड से राहत मिली।

    तापमान बढऩे से लोगों को कोल्ड-डे की स्थिति से राहत मिली है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से रात से ही बादलों की आवाजाही शुरू हो गई और न्यूनतम तापमान बढ़ने लगा। बादलों की आवाजाही के चलते लोगों को कड़ाके की ठंड से थोड़ी राहत मिली, लेकिन मौसम में गलन की वजह से सर्दी का अहसास बढ़ गया है। गुरुवार को दूसरे दिन भी क्षेत्र में कोहरे का असर नजर नहीं आया। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का मौसम पर शुक्रवार तक असर रहेगा। इससे न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी होगी। नए साल पर सर्दी का रुख फिर तेज होने के आसार हैं।

    नए साल पर सर्दी के तेवर फिर तीखे होने के आसार

    करीब एक हफ्ते से ज्यादा समय तक जबरदस्त शीतलहर का दौर आएगा। इसका मतलब है कि नए साल का पहला हफ्ता हाथ-पैर जमाने वाली ठंड में बीतेगा। कृषि अधिकारियों की मानें तो हल्की बूंदाबांदी गेहूं-चने की फसल को फायदा पहुंचाएगी। मौसम केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इस नए सिस्टम का प्रभाव 30 दिसम्बर से जब कम होगा तो मौसम में फिर बदलाव आएगा। उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्सों में कोहरा छाने के साथ तापमान में गिरावट होगी। वहीं, जनवरी में 3-4 तारीख से शीतलहर का नया दौर शुरू हो सकता है।

    प्रदेश में इस बार उम्मीद के मुताबिक कड़ाके की ठंड नहीं पड़ी। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार विंटर सीजन कमजोर रहने के पीछे पश्चिमी विक्षोभ की कम सक्रियता और उत्तरी इलाकों से सर्द हवाओं की बजाय समुद्री हवाएं एक्टिव रही। आंकड़े बताते हैं कि जिस साल विंटर सीजन में मावठ हुई, उस साल पारा सामान्य से नीचे गया और लगातार कड़ाके की ठंड का दौर चला। मावठ नहीं होने से रबी की फसल पर भी खासा प्रभाव पड़ा है। किसानों को दो से तीन बार सिंचाई करनी पड़ी। मावठ होने से फसल में सिंचाई की जरूरत कम होती है।

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