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Wednesday, April 1, 2026
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    पाकिस्तान को FATF से बड़ा झटका, टेरर फंडिंग पर ले सख्त एक्शन वरना कर दिया जाएगा ब्लैकलिस्ट

    Pakistan

    नई दिल्ली एजेंसी। पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) से बड़ा झटका लगा है  FATF ने पाकिस्तान को ‘ग्रे सूची’ में बनाए रखा है। FATF का कहना है कि पाकिस्तान ने टेरर-फंडिंग के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए हैं। पाकिस्तान को टेरर-फंडिंग के खिलाफ एक्शन लेने के लिए अक्टूबर तक की डेडलाइन दी गई है। FATF ने पाकिस्तान को निर्देश दिया है कि इस दौरान वह टेरर-फंडिंग पर कार्रवाई करे. इसी के साथ FATF ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर उसने टेरर-फंडिंग और आतंकी ट्रेनिंग कैंपों पर कड़े कदम नहीं उठाए तो उसे अक्टूबर में ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।

    बता दें कि FATF की बैठक अमेरिका में हुई। समूह ने पाकिस्तान को पिछले साल ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल किया था, जिससे पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को हर साल करीब 10 बिलियन डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि, भारत पाकिस्तान के ‘ब्लैक लिस्ट’ होने की उम्मीद कर रहा था. अगर ऐसा होता तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए ये बड़ा झटका होता।

    पाकिस्तानी पीएम ख़राब अर्थव्यवस्था को लेकर काफी चिंतित हैं।

    अगर पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट होता तो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस ने एक प्रस्ताव पेश कर जून 2018 में पाकिस्तान को FATF ने ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। अगर पाकिस्तान को FATF ब्लैकलिस्ट कर देता तो उस पर बहुत बड़े असर पड़ते। ब्लैकलिस्ट होने पर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिलने वाले 6 अरब डॉलर के कर्ज पर भी रोक लगाई जा सकती थी। इसके अलावा कई और बड़ी संस्थाएं भी पाकिस्तान को फंडिंग से मना कर सकती थीं। ऐसे में पाकिस्तान पाई-पाई को मोहताज हो जाता।

    क्या है FATF?

    यह दुनिया भर में आतंकी संगठनों को दी जाने वाली वित्तीय मदद पर नजर रखने वाली इंटरनेशनल एजेंसी है। यह एशिया-पैसिफिक ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग, जनसंहार करने वाले हथियारों की खरीद के लिए होने वाले वित्तीय लेनदेन को रोकने वाली संस्था है। इस संस्था की रिपोर्ट के आधार पर FATF कार्रवाई करती है।

    इमरान की चिंता बढ़ी

    आपको बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश के नाम संबोधन में कहा है कि 10 साल में पाकिस्तान का कर्ज़ 6000 अरब पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 30 हज़ार अरब पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है. इससे देश के पास अमेरिकी डॉलर की कमी हो गई है। हमारे पास इतने डॉलर नहीं बचे कि हम अपने कर्ज़ों की किस्त चुका सकें. मुझे डर है कि कहीं पाकिस्तान डिफॉल्टर ना हो जाए।

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