तिरुवनंतपुरम। भारतीय क्रिकेटर संजू सैमसन ने टी20 विश्व कप 2026 के निर्णायक मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम इंडिया को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अंतिम तीन मैचों में उनकी दमदार बल्लेबाजी के चलते उन्हें टूर्नामेंट का ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया। बेटे की इस उपलब्धि पर उनके पिता सैमसन विश्वनाथ ने गर्व जताते हुए कहा कि संजू को करियर की शुरुआत में कई तरह की परेशानियों और अनदेखी का सामना करना पड़ा था। संजू के पिता ने बताया कि बेटे की मेहनत और समर्पण को देखकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है। उनके अनुसार, शुरुआती दौर में कुछ लोगों ने संजू के खेल में अनावश्यक बाधाएं पैदा कीं, लेकिन अब उम्मीद है कि उनकी प्रतिभा को सही पहचान मिलती रहेगी। Sanju Samson
सैमसन विश्वनाथ पहले दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे और साथ ही फुटबॉल के अच्छे खिलाड़ी भी रहे। उनके अनुसार, संजू का बचपन दिल्ली में बीता, जहां उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट की कोचिंग भी ली। लेकिन एक समय ऐसा आया जब शानदार प्रदर्शन के बावजूद संजू का चयन अंडर-13 टीम में नहीं हो सका, जिससे परिवार को निराशा हुई। उन्होंने बताया कि मात्र 18 वर्ष की आयु में उन्हें दिल्ली पुलिस में नौकरी मिल गई थी और 19 वर्ष की उम्र से वह पुलिस की फुटबॉल टीम का हिस्सा बन गए थे। करीब दो दशकों तक उन्होंने फुटबॉल खेला। इसी दौरान उनके बच्चों की परवरिश दिल्ली में हुई और संजू ने भी यहीं क्रिकेट की बारीकियां सीखीं।
एक टूर्नामेंट में संजू ने एक ही दौरे में लगभग 500 रन बनाए थे
पिता के अनुसार, एक टूर्नामेंट में संजू ने एक ही दौरे में लगभग 500 रन बनाए थे, लेकिन इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने उन्हें अंडर-13 टीम में शामिल नहीं किया। कारण यह बताया गया कि संजू की उम्र केवल 10 वर्ष है, जबकि प्रतियोगिता 13 वर्ष से कम आयु वर्ग के खिलाड़ियों के लिए थी। इस फैसले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विश्व फुटबॉल के दिग्गज लियोनेल मेसी ने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय पहचान बना ली थी, वहीं क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर भी किशोर अवस्था में ही बड़े स्तर पर खेल चुके थे। ऐसे में केवल उम्र के आधार पर किसी खिलाड़ी की प्रतिभा को नजरअंदाज करना उचित नहीं माना जा सकता। Sanju Samson
इस घटना के बाद सैमसन विश्वनाथ ने एक बड़ा फैसला लेते हुए दिल्ली पुलिस की नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली और परिवार के साथ केरल लौटने का निर्णय किया। हालांकि इस फैसले पर उनकी पत्नी ने शुरू में चिंता जताई, लेकिन उन्हें अपने बेटे की प्रतिभा पर पूरा विश्वास था। उन्होंने कहा कि यदि संजू को सही माहौल और अवसर मिले, तो वह अपनी प्रतिभा से लोगों का दिल जीत सकते हैं। केरल लौटने के बाद संजू ने लगातार मेहनत की और जूनियर स्तर के क्रिकेट में अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा को पहचान मिली और वे राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने में सफल रहे।
सैमसन विश्वनाथ ने कहा कि आज जब उनका बेटा देश के लिए विश्व कप जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, तो उन्हें अपने उस निर्णय पर गर्व है। उन्होंने यह भी बताया कि समय के साथ कई लोग अपनी पुरानी बातों के लिए उनसे माफी भी मांग चुके हैं। उनके अनुसार अब वे पुरानी घटनाओं को पीछे छोड़ चुके हैं और बेटे की सफलता को ही अपनी सबसे बड़ी खुशी मानते हैं। Sanju Samson















